Ultrasound Guided Embryo Transfer IVF के Success Rate को बढ़ा देता है ।

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पिछले 6 साल से बंगलौर के आर्किटेक्ट कपल दिव्या और विजिश जॉन कंसीव करने की कोशिश कर रहे हैं ।आर्टिफीसियल इंसेमिनेशन के दो फेल्ड एटेम्पट के बाडी फाइनली वो सफल हुए और दिव्या गर्भवती हुईं ।
ये कैसे सम्भव हुआ ?
वेल इसमें प्रार्थना का ज्यादा नहीं बल्कि साइंटिफिक प्रोसेस का ज्यादा रोल रहा है जिसका नाम है अल्ट्रासाउंड गाइडेड एम्बरयो ट्रान्सफर। ये एक नयी टेक्नोलॉजी है जो भारत में बहुत तेज़ी से अपना पैर जमा रहा है ।
मुम्बई के मालपानी इनफर्टिलिटी क्लिनिक की एम.डी डॉ अनिरुद्ध मालपानी बताती हैं "आजकल बच्चों को गर्भ में पालने का ट्रेंड कम होता जा रहा है । इसका कारण है आज के समय में मौजूद कई सारे एग फ्रीजिंग या आईवीएफ के ऑप्शन्स जो अल्ट्रासाउंड गाइडेड एम्बरयो ट्रान्सफर द्वारा किये जाते हैं ।"

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परिभाषा
एक अल्ट्रासाउंड गाइडेड एम्बरयो ट्रान्सफर आईवीएफ का फाइनल स्टेप होता है । आईवीएफ में ये स्टेप फॉलो किये जाते हैं :
स्टेप 1 : महिला को इंजेक्टेबल दवाई दी जाती है जो ओवरी फॉलिकल में एग के विकास में मदद करता है ।
स्टेप 2 : एक बार फॉलिकल मैच्योर हो जाता है तो फिर एग्स को ओवरी से निकाल दिया जाता है ।
स्टेप 3 : इसमें स्पर्म मिलाया जाता है ।
स्टेप 4 : अब इन एग्स को अगले दिन फर्टिलिसशन के लिए चेक किया जाता है ।
स्टेप 5 : फिर एक सेट एम्बरयो की संख्या उटेरीने कैविटी में अल्ट्रासाउंड गाइडेड एम्बरयो ट्रान्सफर की मदद से डाल दिया जाता है ।

एतिहासिक रूप से इस प्रोसेस को क्लीनिकल टच मेथड से किया गया ।  डॉक्टर ने उस समय एक कैथेटर का इस्तेमाल किया जो की एक लंबा पतला सा ट्यूब होता है सिरिंज के साथ । इसे उटेरिन कैविटी में ऊपरी हिस्से को छूने के लिए इस्तेमाल किया गया था ।जैसे ही भ्रूण कैविटी में चला गया कैथेटर को निकाल लिया गया । लेकिन ये एक ब्लाइंड तकनीक थी । लेकिन आज अल्ट्रासाउंड के इस्तेमाल से इस प्रक्रिया में एक्यूरेसी बढ़ी है ।

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अल्ट्रासाउंड गाइडेड एम्बरयो ट्रान्सफर का प्रोसीजर
अल्ट्रासाउंड गाइडेड एम्बरयो ट्रान्सफर तकनीक में कैथेटर ले द्वारा एम्बरयो को यूटरस में डाला जाता है । कैथेटर अल्ट्रासाउंड में साफ़ तौर पर देखा जा सकता है इसीलिए एम्बरयो को यूटेरस में डालने की एक्यूरेसी बढ़ जाती है ।
ये स्टेप्स होते हैं पुरे प्रोसेस के दौरान :
स्टेप 1 : पेशेंट अपने पैर ऊपर करके टेबल पर लेट जाती हैं
स्टेप 2 : वैजाइनल स्पेक्युलुम से सर्विक्स को एक्सपोज़ किया जाता है ।
स्टेप 3 : इसके बाद एम्बरयो को कैथेटर के द्वारा ट्रान्सफर किया जाता है
स्टेप 4 : इसके बाद डॉक्टर कैथेटर के टिप को ध्यान से यूटरस में अंदर डालते हैं और फाइनली उटेरीन कैविटी में यूटरस को रख दिया जाता है ।और अधिक समझने के लिए इस वीडियो को देखें :

अल्ट्रासाउंड गाइडेड एम्बरयो ट्रान्सफर के फायदे :
पूरा प्रोसेस सिर्फ 10 से 20 मिनट लेता है और ये बहुत ज्यादा एक्यूरेट होता है ।
गुडगाँव के डब्लू प्रतीक्षा फर्टिलिटी एंड आईवीएफ सेंटर  की क्लीनिकल डारेक्टर डॉ रागिनी अग्रवाल बताती हैं " पुरानी तकनीक के मुकाबले ये प्रक्रिया क्लीनिकल प्रेगनेंसी रेट को बढ़ा देती ही । अल्ट्रासाउंड के मदद से हम एम्बरयो को सबसे एक्यूरेट तरीके से उसकी जगह पर रख पाते हैं । " वो बताती हैं की ये तकनीक उन कपल के लिए वरदान हैं जो नैचुरली कंसीव नहीं कर पाते हैं ।

प्रोसीजर के बाद प्रेगनेंसी के चांसेस बढ़ाने के लिए डॉ मालपानी कुछ तरीके बताती हैं :

  • फालतू की दवाइयाँ न लें
  • धूम्रपान या कैफिनेटेड ड्रिंक न पियें
  • वेट लूज़ करने के चक्कर में न पढ़ें
  • सेक्स करने से बचें
  • सॉना बाथ लेने से बचें

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वो पुरुषों के लिए भी उपाय बताते हैं :

  • सॉना और हॉट टब बात से बचें
  • पुरानी बीमारियो की जानकारी साझा करें खासकर के अगर आपको हाल ही में बुखार आया हो तो
  • ड्रग्स, कैफ़ीनटेड ड्रिंक या धूम्रपान मत करें
  • सेक्स करने से बचें

अगर आप प्रोसीजर से पहले इन बातों का ध्यान रखेंगे तो प्रोसीजर के बाद गर्भवती होने के चांसेस बढ़ जाते हैं । इसके पीछे की मंशा एक स्वस्थ एम्बरयो के निर्माण में सहयोग करने की है ।क्योंकि एम्बरयो की क्वालिटी की इस प्रोसेस की सफलता तय करती है ।


अगर एम्बरयो में 4 से 5 सेल हैं तो ये ग्रेड ए का एम्बरयो है और इसमें गर्भवती होने के अच्छे चांसेस होते हैं । एक एम्बरयो की ग्रेडिंग उसके सेल डिवीज़न से होती है । अगर उनमे ज्यादा ग्रगमेंट होंगे तो वो लो क्वालिटी एम्बरयो होंगे। हालांकि ओसे एम्बरयो से भी जन्मे बच्चे पूरी तरह स्वस्थ होते है।डॉ मालपानी एम्बरयो के अच्छे क्वालिटी के बारे में बताते हैं " उदाहरण के लिए अगर 3 अच्छे एम्बरयो ट्रान्सफर किये जाते हैं तो सफलता का प्रतिशत 40 होता है । इसिलोए फर्टिलिटी सोसाइटी ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया के मुताबिक 3 से ज्यादा एम्बरयो ट्रान्सफर नहीं करने चाहिए । गोलबल स्टडीज के मुताबिक 30 प्रतिशत पर भी गर्भवटी होने के अच्छे खास चांस होते हैं । "पर ये सब्जी पेशेंट्स के लिए सही नहीं है"
एक एम्बरयो से ज्यादा के ट्रान्सफर पर गर्भवरि होने की सम्भावना बढ़ती है लेकिन इसका फैसला आपको और आपके
OB-GYN को एल साथ मिलकर करना चाहिए । याद रखें एक से ज्यादा एम्बरयो के मामलों में निम्न परेशानियां भी आ सकती हैं :

  • मल्टीप्ल प्रेगनेंसी के चांस बढ़ जाते हैं
  • खर्च भी बढ़ जाता है क्योंकि एल प्रोसेस की कीमत ही 2 से 3 लाख रूपये है ।

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यूनाइटेड किंगडम में जहाँ 2 एम्बरयो ट्रान्सफर करने की अनुमति है वहीँ अमेरिका और भारत जैसे देशों में इसे लेकर कोई कानून नहीं है । इसीलिए कई बार अधिक उम्र की महिलाओं में 4 से 6 एम्बरयो भी ट्रान्सफर कर देते हैं ।
डॉ अग्रवाल बताते हैं की " एम्बरयो ट्रान्सफर के लिमिट भले ही न हों पर इसका क्रिटिकल मानदंड तय करना जरूरी है। इसके फ़ैल होने की स्थिति में सरोगेसी ओवुम डोनेशन जैसे काम भी किये जा सकते हैं ।"
तमिलनाडु के सीजी हॉस्पिटल के प्रोफेशनल बताते हैं की अल्ट्रासाउंड गाइडेड एम्बरयो ट्रान्सफर उन महिलाओं में भी हो सकता है जो लो इंप्लांटेशन रेट के कारण गर्भ धारण नहीं कर पा रही हों । या उन्हें यूटरस, या अछि गुणवत्ता वाले एम्बरयो आदि की कोई समस्या हो ।

एक बार ये प्रोसेस होने के बाद आपको 2 हफ्ते रुकना पड़ता है ।
डॉ. मालपानी के मुताबिक " इस समय को ड्रीडड टू वीक भी कहते हैं,आपका दिल कहेगा की आप गर्भवरि है लेकिन दिमाग इसे मानने से मना करता रहता है  "

इंप्लांटेशन के कुछ घंटो बाद शरीर में बहुत से बदलाव होंगे जैसे :

  • एक हेल्थी एम्ब्र्यो शेल से टूट कर बाहर आ जाएगा ।और फर्टिलाइजेशन के 5-7 दिन बाद ये ब्रेक आउट हो जाएगा ।
  • 2-5 दिन के भीतर एम्बरयो उटेरीन की दीवारों से जुड़ने लगेगा ।
  • एम्बरयो ट्रान्सफर के 9-11 दिन बाद आप ब्लड टेस्ट के लोए जा सकते हैं ताकि आपकी प्रेगनेंसी कन्फर्म को जा सके । एक्सपर्ट बताते हैं की आपको आईवीएफ के बाद यूरिन प्रेगनेंसी टेस्ट नहीं करना चाहिए ।

डॉ मालपानी की किताब टेस्ट ट्यूब बेबीज़ - आईवीएफ एंड गिफ्ट बताती है की कैसे कुछ सावधानियां आपके प्रेगनेंसी के चांसेस को बढ़ा देती हैं ।

  • रिप्लेसमेंट के 48 घण्टे तक स्विमिंग या सॉना बाथ न लें
  • टैम्पॉन आदि का इस्तेमाल करने से बचें
  • जबतक भ्रूण अल्ट्रासाउंड में नहीं दिख जाता या प्रोसेस विफल नहीं हो जाता तब तक न आप सेक्स कर सकते हैं और ना ही ओर्गास्म ।
  • ज्यादा शारीरिक काम न करें
  • कोई बजारी वास्तु न उठाएं
  • 24 घण्टे के बेड रेस्ट के बाद ही कुछ काम करने की सोचें
  • घूमने की शुरुवात 2-3 दिन बाद करें

अल्ट्रासाउंड गाइडेड एम्बरयो ट्रान्सफर व
एक महंगी तकनीक है जिसमे पेशेंस का होना बहुत ज्यादा जरूरी है ।

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