उच्च शिक्षा के लिए यूजीसी अब मातृत्व अवकाश के साथ और अधिक समय देगा

उच्च शिक्षा के लिए यूजीसी अब  मातृत्व अवकाश के साथ और अधिक समय देगा

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने हाल ही में घोषणा की कि शादीशुदा महिलायें अब अपनी MPhil और पीएचडी के लिए और ज्यादा समय ले सकेंगी । ये मैरिड वीमेन के लिए खुशखबरी ही मानी जा सकती है ।घोषणा करते हुए स्मृति ईरानी ने कहा किये नियम शारीरिक चुनौती झेल रही और शादीशुदा महिलाओं पर लागू होगा जो मास्टर ऑफ़ फिलोसोफी और डॉक्टरेट ऑफ़ फिलोसोफी करना चाहती हैं ।

मुख्य बिंदु:

  • 40 प्रतिशत विकलांग महिलाओं समेत सभी महिलाओं को दोनों डिग्री पूरी करने के लिए एक्स्ट्रा समय दिया जाएगा
  • जो शादीशुदा महिलाएं ये दोनों डिग्री की उन्हें मैटरनिटी और चाइल्ड केअर लीव के लिए 240 दिन की छुट्टी दी जाएगी।
  • जिन्होंने भी 11 जून 2009 से पहले इस कोर्स के लिए अप्लाई किया है उन्हें असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए नेट या किसी और राज्य स्तरीय परीक्षा देने की जरूरत नहीं होगी ।
  • जो महिलाएं शादी के बाद दूसरी जगह चली जाएंगी उन्हें अपनी मर्ज़ी के यूनिवर्सिटी में रिसर्च डेटा देने की आज़ादी होगी बशर्ते वो उस रिसर्च का क्रेडिट पैरेंट इंस्टिट्यूशन को दें ।

इस बदलाव का कारण

इस बदलाव का मुख्य मकसद है इन लोगों को शिक्षा के क्षेत्र में बराबर का मौक़ा देना । एक लीडिंग अखबार को इंटरव्यू देते हुए ईरानी ने कहा "एम फिल को 2 से 3 साल और पीएचडी को 6 से 8 साल करने की कोशिश की गयी है"
भारत में कई महिलाएं हायर डिग्री लेती हैं लेकिन उनमे से कुछ ही यूनिवर्सिटी में पढ़ा पाती हैं । दूसरी जगह जाने की स्थिति में उन्हें मिलने वाले भत्ते के बारे में स्मृति कहती हैं "हम ये भी तय कर रहे हैं हम उन्हें एक यूनिवर्सिटी से दुसरे यूनिवर्सिटी जाने की स्थिति में भत्ता दें "

"हमें पुरुषों से 10 गुना ज्यादा काम करना है ।"

महर्षि कर्वे स्त्री शिक्षण संस्था के क्युमिन कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग के सिल्वर जुबली के उपलक्ष में ईरानी ने प्रोफेशनल महिलाओं के आगे चुनौतियों पर बातचीत की ।उन्होंने कहा की महिलाओं को पुरुषों से 10 गुना ज्यादा मेहनत करनी होगी । लोगों को लगता है की अगर आप कॉम्पटेटिव हैं तो आप डोमेस्टिक नहीं हैं । उम्मीद है की आने वाली नई जनरेशन इस मिथक को तोड़ेगी और मेरिट के आधार पर लोगों को परखा जाएगा ।"

उन्होंने महिलाओं के प्रति होने वाले पक्षपात के बारे में भी बात की । "हम अक्सर working महिलाओं से पूछते हैं की वो काम और घर के बीच कैसे समन्वय बना लेती हैं, यही सवाल पुरुषों से नहीं पूछा जाता है ।हमे इस मेन्टल ब्लॉक से अब भी बाहर आना बाकी है। हालांकि फेमिनिन होना कोई बुरी बात नहीं है ।"

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