TV, टैबलेट या मोबाइल फोन..क्या है आपके बच्चे के लिए ज्यादा खतरनाक..जानिए आज

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बचपन में अधिक भारी यंत्रो का प्रयोग करने से बच्चों के समस्या को हल करने के कौशल पर असर पड़ता है।

क्या आपको अपना बचपन याद है, जब आप किसी का ध्यान अपने ऊपर लाने के लिए रोते थे और आपके पैरेंट्स या तो आपको इग्नोर करते थे नहीं तो अटेंशन देते थे?

हां, तब हमारे पास दो ही विकल्प थे, लेकिन तकनीक के विकास से हम अपनी जिंदगी और आसान बना रहे हैं या फिर अधिक मुश्किल कर रहे हैं?

 
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क्या आपने कभी सोचा है कि बच्चे खाना या किसी एक्टिविटी की जगह स्क्रीन को देखकर इतना शांत क्यों हो जाते हैं?

बोस्टन यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ मेडिसिन के रिर्सचर ने पाया कि बच्चों को अपनी भावनाओं के लिए सेल्फ-रेग्युलेशन के रास्ते निकालने आना चाहिए ना कि ध्यान भटकाने वाले गेम्स या प्रोग्राम की मदद से इन सबसे अलग हो जाना चाहिए।

अब सवाल ये उठता है कि अगर आप इन तीनों चीजों को नजरअंदाज करने की कोशिश करते हैं लेकिन फिर भी बच्चे सामाजिक संबंधों या दोस्तों के कारण स्क्रीन टाइम से सामना कर ही लेते हैं।

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टेलीविजन

मुझे याद है कि हमारे पैरेंट्स टीवी को इडियट बॉक्स बोला करते थे क्योंकि उनका मानना था कि ये सिर्फ समय को बरबाद करता है। इसके बाद इंटरनेट आया , लेकिन फिर भी हम इंटरनेट की अहमियत से इंकार नहीं कर सकते हैं।

फायदा: टेलीविजन चैनल को कंट्रोल किया जा सकता है और हम नजर रख सकते हैं। आप चाहें तो बच्चों को कुछ अच्छे शो दिखा सकते हैं या कुछ चैनल को लॉक कर सकते हैं ताकि वो ना देख पाएं।

इसके साथ ही बड़ा स्क्रीन होने की वजह से बच्चे इससे दूरी बना कर देख सकते हैं और अपनी आखों के बिल्कुल पास क्लियर विजन के लिए नहीं रखेंगे।टीवी के भी रेडियोएक्टिव इमिशन होते हैं लेकिन Wifi से कम होते हैं।

नुकसान: आज कल स्मार्ट टीवी को कंप्यूटर में बदला जा सकता है और उनपर वीडियो गेम भी खेला जा सकता है।अपने बच्चों को असमाजिक नहीं बनाना चाहते हैं या आप चाहते हैं कि वो शारीरिक एक्टिविटी में भाग लें तो उन्हें जितना हो सके टीवी के सामने कम ही आने दें।

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टैबलेट

आजकल इसे ज्यादा आईपैड के नाम से जाना जाता है। टैबलेट को लग्जरी डिवाइस माना जाता है और इससे कॉल के अलावा वो सबकुछ किया जा सकता है जो एक फोन कर सकता है।

फायदा: ये मोबाइल जैसा ही होता है लेकिन इसकी स्क्रीन बड़ी होती है। बच्चे गलती से कॉल नहीं कर सकते हैं जिससे आप कभी अनचाही स्थिति में फंसेंगे।

नुकसान: टैबलेट पर बच्चे आजकल अधिक समय बिताते हैं क्योंकि वो इसे शांति का आधुनिक साधन समझते हैं। किताब की जगह आजकल बच्चे टैबलेट को तरजीह देते हैं और इससे वो हो सकता तकनीकी रूप से अधिक सक्षम हो लेकिन उनकी आखों के लिए ये गलत है।

इसकी वजह से बच्चों में धैर्य खत्म होता है और वो कुछ भी देखने के लिए पैरेंट्स की अनुमति का इंतजार नहीं करते फिर चाहे ये शो, फिल्म या खिलौनों की ऑनलाइन शॉपिंग हो।

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मोबाइल फोन

वो दिन जा चुके हैं जब बच्चे हाथ में लैंडलाइन लिए हैलो बोलने की कोशिश करते हुए क्यूट लगते थे। मोबाइल फोन को आप चाहें तो वरदान भी मान सकते हैं और अभिशाप भी। इसके ऊपर विस्तार से चर्चा हम कभी और करेंगे।

फायदा: आप अपने बच्चों की खबर रख सकते हैं कि वो कहां हैं और सुरक्षित हैं या नहीं।

नुकसान: इस वायरल टेक्नॉलॉजी के काफी नकारात्मक प्रभाव भी हैं। फोन का अधिक इस्तेमाल लंबे समय तक करने से अपूर्णीय क्षति होती है। ये दिमाग और विजन दोनों को धीरे-धीरे कमजोर करता है।

द टेलीग्राफ के अनुसार,बोस्टन यूनिवर्सिटी के डेवलपमेंटल बिहेवियर पेडिएट्रिक्स  Dr Jenny Radesky ने कहा है कि मोबाइल हर जगह मौजूद है और बच्चे इसका इस्तेमाल कम उम्र से कर रहे हैं। इसका बच्चे के विकास और व्यवहार पर असर पड़ता है या नहीं ये अभी तक बिल्कुल भी साफ नहीं हो पाया है।जब बच्चों को हर तरह से शांत कर पाना नामुमकिन हो जाता है तो  आईपैड देकर उन्हें बहलाना बहुत आसान लगता है। लेकिन बाल मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि इससे बच्चों के भावनात्मक विकास पर असर पड़ता है, क्योंकि वो अपनी भावनाओं को काबू करना नहीं सीख पाते हैं।

 
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Dr Radesky ने ये भी कहा कि बचपन में मोबाइल, टैबलेट आदि का इस्तेमाल करने से बच्चों में सहानुभूति का विकास, सामाजिक और समस्या को हल करने का कौशल नहीं आ पाता है। ये डिवाइस सेंसरिमोर और विज़ुअल-मोटर जैसी गतिविधियों को भी बदल सकते हैं जो गणित और विज्ञान सीखने के लिए जरूरी होते हैं।