अगर आप माँ हैं तो पढ़िए कैसे आपका बच्चों के साथ सख्त रवैया उनके स्वास्थ्य पर असर डालता है । 

ये अपने तरह का पहला शोध है जहाँ माता पिता के वर्ताव को बच्चों के स्वास्थ्य से जोड़कर देखा गया है ।

एक नया अध्ययन ये कहता है की ज्यादा सख्ती दिखाने से या ज्यादा आधिकारिक रूप से बात करने से उनमे मोटापा बढ़ने की संभावना होती है । सबसे बड़े शॉक की बात ये है की इससे उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ता है ।
कैलिफ़ोर्निया-डेविस विश्वविद्यालय और यूनाइटेड स्टेट्स सेंटर्स फॉर डिजीज कण्ट्रोल एंड प्रिवेंशन के अध्ययनकर्ताओं ने शारीरिक स्वास्थ्य को माता पिता के द्वारा मिलने वाले व्यवहार से जोड़ने की कोशिश की है ।
इस अध्ययन को अंजाम देने के लिए वैज्ञानिकों ने 451 परिवारों के (2 पैरेंट परिवार) स्टाइल और वर्ताव को वीडियो रिकॉर्ड किया।  उन्होंने सालों से बच्चों के स्वास्थ्य में होने वाले बदलावों का भी निरिक्षण किया ।
ये अपने तरह का पहला शोध है जहाँ माता पिता के वर्ताव को बच्चों के स्वास्थ्य से जोड़कर देखा गया है और साथ ही असर को बचपन से लेकर वयस्कता तक मापा गया है ।
  • उन्होंने बॉडी मास इंडेक्स पर माता पिता के गुस्सा होने और और प्यार से रहने के असर को मापा
  • ये भी ध्यान देने की बात है की इस शिद्ध में किस भी पेरेंट्स ने बच्चों पर हाथ नहीं उठाया था, इसके अलावा धक्का देना, चींटी काटना आदि शामिल थे ।
  • नतीजों से पता चलता है की शारीरिक स्वास्थ्य और बी.एम.आइ पर शुरू में ज्यादा फल नहीं पड़ता है । लेकिन वयस्क होने के साथ साथ उनमे असर बहुत साफ़ साफ़ दिखाई देने लगता है।
  • शोध ये भी बताती है की अपने कड़क रवैये के बाद उसे ठीक करने के लिए पेरेंट्स का अच्छा व्यवहार भी बच्चों के हेल्थ रिस्क को कम नहीं कर पाता है ।
पेरेंटिंग के नकारात्मक पहलु
" माता पिता का कठोर व्यवहार एक ऐसा जीर्ण तनावपूर्ण माहौल बना देता है जिसका असर बच्चों पर करीब 20 साल से भी ज्यादा रहता है । इससे शारीरिक स्वास्थ्य खराब होता है, फिर चाहे सब मिलकर उसे कितना भी खुश करने की कोशिश क्यों न करें । "मैं कानून में हूँ और मेरी पत्नी सुसमाचार है" जैसे रवैये से, ये जान लीजिये की बच्चे की आदत, व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आता है ।" -लोवा स्टेट यूनिवर्सिटी, यूनाइटेड स्टेट्स के अध्ययनकर्ता थॉमस स्कॉफील्ड
अध्ययन में "कठोर पेरेंटिंग" को उन माता पिता से परिभाषित किया है जो अस्वीकार, विवश, शारीरिक रूप से आक्रामक हैं और आत्म-केन्द्रित कर रहे हैं । " इसका बच्चों पर और उनके दिमागी विकास पर बहुत दूरगामी असर हो सकता है ।
हम अपनी ओर से जो कर सकते हैं वो ये की पेरेंट्स को समझाएं की वो बच्चों के प्रति कठोर रवैया न रखें । अगर आपको ये तय करना है को बच्चे का स्वास्थ्य ठीक हो, सकारात्मक हो, शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ हो तो सबसे आसान तरीका है उनपर कठोर होना बंद कर दें"
ये अध्यन सोशल साइंस एंड मेडिसिन जर्नल में पब्लिश हुई ।

इस आर्टिकल के बारे में अपने सुझाव और विचार कॉमेंट बॉक्स में ज़रूर शेयर करें  

Hindi.indusparent.com द्वारा ऐसी ही और जानकारी और अपडेट्स के लिए  हमें  Facebook पर  Like करें