जानिये क्यों Shweta Salve की तरह आपको भी Water Birth अपनाना चाहिए

जानिये क्यों Shweta Salve की तरह आपको भी Water Birth अपनाना चाहिए

अभिनेत्री श्वेता साल्वे जिन्होंने ट्विटर पर अपनी प्रेगनेंसी की घोषणा की, बताया की वो वाटर बर्थ का तरीका अपनाएंगी ।
" मैंने गोआ में अपनी डिलीवरी का प्लान बनाया है क्योंकि मेरे माता पिता भी वहीं रहते हैं । महाराष्ट्र में एक रिवाज़ है की पहला बच्चा महिला अपने माता पिता के घर में जन्म देती है। मैं वाटर बर्थ को अपनाउंगी । गोआ में कई होम बर्थ सेंटर्स हैं उनमे से ही कोई एक चुनुँगी।" - श्वेता ने पिछले हफ्ते एक इंटरव्यू के दौरान ये बयान दिए ।

वाटर बर्थ का कांसेप्ट समझें :
दिल्ली के चाणक्यपुरी में प्राइमस सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के एमडी और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. शैली सिंह बताती हैं "वाटर बर्थिंग एक वैकल्पिक तरीका है जिसमे माँ एक गर्म पानी से भरे पूल में बच्चे को जन्म देती है ।वाटर लेबर अलग चीज़ है उसके लेबर तो पानी के अंदर होता हैं पर डिलीवरी पानी के बाहर होती है ।"

बेसिक थ्योरी ये है की बच्चे माँ के गर्भ ने 9 महीनों तक एमनीओटिक फ्लूइड में रहते हैं और इस मेथड में भी बाहर वैसा ही कुछ माहौल बनाया जाता है जो बच्चे के लिए कम तनावपूर्ण होता है।डॉ. शैली वाटर बर्थ के लिए स्टेप्स बताती हैं :

  • माँ को जब लेबर होना शुरू होता है तो वो पानी में जाती हैं।
  • वाटरप्रूफ डोप्प्लेर के मदद से एक्सपर्ट्स द्वारा उनकी स्थिति पर निगरानी रखी जाती है । ये एक्सपर्ट्स होने शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक सपोर्ट देते हैं।
  • बच्चे के पानी में जन्म लेने के बाद उसे पहली सांस लेने से पहले पानी से ऊपर उठाया जाता है
  • बच्चे पानी में डूबते नही हैं इसीलिए पानी में उनका जन्म लेना पूरी तरह सुरक्षित है

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वाटर बर्थ के फाएदे :

"अगर आपको लगे की लेबर के दौरान दर्दनिवारक दवाइयां लेने से परहेज है तो वाटर बर्थ आपके लिए है । गर्म पानी की राहत और आराम न सिर्फ आपके शरीर को सपोर्ट करती है बल्कि आपके दर्द को भी कम करती है और आपको मूवमेंट करने की भी आजादी देती है । कई महिलाएं लेबर तो पानी में करती हैं लेकिन बच्चे बाहर आकर जन्म लेते हैं जबकि कुछ महिलाएं पानी के अन्दर ही बच्चे को जन्म देती हैं । चुनाव और फैसला आपका है , अगर ठीक न लगे तो आप बाहर आ सकते हैं" - दिल्ली में एससीआई इंटरनेशनल हॉस्पिटल के स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. शिवानी गौर ।

दिलचस्प बात ये है की वाटर बर्थ के कई फाएदे हैं :

  • मोबिलिटी ज्यादा होती है : वाटर बर्थ में माँ आसान मुद्रा में बैठ या लेट सकती है और उसे मूवमेंट करने की पूरी आज़ादी होती है । विशेषज्ञ बताते हैं की शरीर पानी के अन्दर रेस्ट करता है और दर्द, थकान,और चिंता को कम कर देता है । इससे स्ट्रेस होर्मोनेस कम रिलीज़ होते हैं और दर्द निवारक हॉर्मोन एंडोर्फिन बनने शुरू हो जाते हैं जिसे फील गुड हॉर्मोन भी कहा जाता है ।इससे आपको दवाइयों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता है और सी सेक्शन आदि के रिस्क को भी कम करता है ।
  • दर्द भगाने में काम आता है : जो महिलाएं पानी के भीतर लेबर करती हैं उन्हें दूसरों के मुकाबले दर्द की अनुभूति बहुत ही कम होती है । एक अध्यन के मुताबिक पहली बार माँ बन्ने जा रही और वाटर बर्थ अपनाने वाली महिलाओं में से केवल 24 परसेंट को ही आज तक दवाइयों का सहारा लेना पड़ा है । ये आंकडा साधारण डिलीवरी में 50 परसेंट है ।
  • लेबर की गति बढ़ाता है : डॉ. सिंह के मुताबिक पानी शरीर में खून का प्रवाह तेज़ कर देता है जिससे लेबर और फ़ास्ट होता है । ये वजाईनल टिअर और एपिसियोटोमिज से भी बचाता है
  • टिअरिंग के रिस्क से बचाता है : डॉ. गौर के मुताबिक ये तिअरिंग के रिस्क से बचाता है । पानी आपके वैजाइना और एनस के बीच के हिस्से को मुलायम बनाए रखता है जिससे वो बच्चे के सर के आकार के मुताबिक़ आसानी से स्ट्रेच हो पाते हैं । इसका मतलब ये भी है की आपको एपिसियोटॉमी की जरूरत नहीं पड़ेगी ।
  • ये माँ के वजन को सपोर्ट करता है :डॉ. गौर बताती है की पूल बहुत ही प्राइवेट हिस्सा होता है जो आपको सेफ और सिक्योर फील करवाता है जब आप लेबर में होती हैं ।ये आपके वजन को सपोर्ट करता है आपको सीधे रखने में मदद करता है जिससे आपके पेल्विस का खुलना आसान हो जाता है । पानी का ऊपर की और उछाल आपको अपनी पोजीशन चंगे करने में आसानी प्रदान करता है ।"

डॉ. गौर फाइनली बताती हैं की "आप इसे पेन रिलीफ के बाकी दूसरे तरीकों के साथ जोड़ सकते हैं जैसे मसाज, एक्यूप्रेशर और अरोमाथेरेपी आदि । आप पानी में सारे मशीन और पेथिडाइन का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगी क्योंकि इससे आपको बेहोशी जैसा फील होता है जो आपके मोबिलिटी को रेस्ट्रिक्ट कर सकता है । आप इन सबके लिए पूल से कभी भी बाहर आ सकती हैं "

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