Shocking...स्कूल के छात्रों ने लगाया 'स्लैप बेट'..कान का परदा हुआ क्षतिग्रस्त

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स्कूल ने कंफर्म किया है कि ये डराने-धमकाने की घटना नहीं बल्कि 'स्लैप बेट' है।

सोशल मीडिया के इस जमाने में हमारी यंग जेनरेशन अभी भी सही और गलत को नहीं पहचान पा रही है। जागरुकता, संवेदनशीलता और मार्गदर्शन की कमी के कारण कई बार मस्ती करना शारीरिक और मानसिक रूप से नुकसान पहुंचाता है। 

‘स्नैपस्लैप स्टोरी’ के तहत तीन छात्रों ने एक वीडियो रिकॉर्ड किया जिसमें एक छात्र ने निशाना बनाकर तीन तक गिनती की और दूसरे को थप्पड़ मारा। 27 सेकेंड का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और इससे पता चलता है कि सोशल मीडिया की वजह से बच्चे कहीं ना कहीं गलत रास्ते पर जा रहे हैं। 

स्कूल प्रशासन ने इस बात की पुष्टि की कि ये कोई चिढ़ाने या धमकाने की नहीं बल्कि थप्पड़ की शर्त लगाने की घटना है। छात्रों के पैरेंट्स किसी भी तरह की सूचना देने के लिए तैयार नहीं थे। 

यह घटना नोएडा के पाथवे स्कूल में 2 बजे के आसपस हुई और वीडियो देखकर ऐसा लगता है मानो इसे बाथरुम में रिकॉर्ड किया गया हो। जब यह वीडियो पीड़ित के पैरेंट्स को फॉरवार्ड किया गया तो उन्होंने कहा कि उनका बेटा मजबूर था जिस वजह से उसे शारीरिक और मानसिक चोट पहुंची है। 

अगर रिपोर्ट की माने तो थप्पड़ की वजह से छात्र के कान के परदे को चोट पहुंची है। ये भी कहा जा रहा है कि स्कूल प्रशासन ने किसी तरह की आपातकाल चिकित्सा मुहैया नहीं कराई और ना ही पैरेंट्स को सूचित करने की जरुरत समझी। 

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स्कूल के डायरेक्टर शालिनी आडवानी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि ये काफी दुख भरा हादसा है। हालांकि ये किसी तरह की डराने धमकाने की घटना नहीं है। ये थप्पड़ मारने की शर्त थी जो छात्रों ने आपस में लगाया था। पाथवे स्कूल ने जरूरी कार्रवाई करते हुए इसमें शामिल बच्चों और उनके पैरेंट्स को घटना की जानकारी दे दी है।’

एक दैनिक अखबार के अनुसार नोएडा पुलिस ने अभी तक किसी के खिलाफ शिकायत दर्ज नहीं की है। कई स्कूलों के प्रिंसिपल इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि पैरेंट्स को बच्चों की हरकतों पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है और वो भी खासकर उनके सोशल मीडिया अकाउंट, टेक्नॉलॉजी आदि पर भी ध्यान दें ताकि वो जिम्मेदारी के साथ इस्तेमाल करें।

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Watch this chilling short-film on child sexual abuse that has taken over the social media

बेशक अभी ये पैरेंट्स के लिए चैलेंज है कि वो बच्चों पर अधिक नजर रखें और उनके आसपास क्या हो रहा है इसकी भी जानकारी रखें।इस तरह की परिस्थितियों से बच्चों को बचाने के लिए पैरेंट्स कुछ ऐसे कदम उठा सकते हैं। 

1. दोस्त बनें पैरेंट नहीं

किसी को भी लेक्चर सुनना पसंद नहीं आता। सबसे आसान तरीका है कि उनकी भावनाओं और सोच को समझें। उनके दोस्त बनें और उनके विचारों को भी समझें। 

2. खुद को डिजिटल मामले में अपडेट रखें

इस डिजिटल जमाने में अपने बच्चों को समझाने और गाइड करने के लिए पहले आप खुद को अपडेट रखें ताकि आप समझ सकें कि क्या सही है और क्या गलत फिर उन्हें भी समझा सकें। 

3. संवाद बनाए रखें

एक अच्छा संवाद काफी कुछ कर सकता है। हमेशा ईमानदार रहें और बातचीत के दौरान खुलकर अपनी राय रखें। किसी तरह की जबरदस्ती से बच्चे अधिक बागी हो सकते हैं। बातचीत करने से ना सिर्फ आप सही समाधान निकाल सकते हैं बल्कि आपको समझ में भी आएगा कि उनके दिमाग में क्या चल रहा है। 

4. दोस्तों को पहचानें 

बच्चों के सर्किल से हमेशा जुड़ी रहें क्योंकि उनके विकास में उनके दोस्त और उनका सर्किल कैसा है ये भी अह्म भूमिका निभाता है। सुनिश्चित कर लें कि आप उन्हें पहचानती हैं और बच्चे अगर किसी तरह के तर्क भरे गलत विचार दें तो उन्हें गाइड करें और सही राह दिखाएं। 

5. रिर्सच करें

चाहे नया स्कूल, कॉलेज , एक्सट्रा करिकूलर एक्टिविटी या नाइट आउट ही क्यों ना हो लेकिन उन्हें भेजने से पहले अपनी रिर्सच जरुर करें उसके बाद अपनी सहमति दें। लेकिन हां कुटिलता दूर रखें और व्याकुल ना हों ।