भारतीय महिलाएं breastfeeding की समस्या से जूझ रही हैं : रेणुका शहाणे

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"हाँ स्तनपान कराना बहुत ही ज्यादा जरूरी है लेकिन फिर भी मुझे लगता है की यंग मॉम आजकल breastfeeding को लेकर बहुत ज्यादा प्रेशर में हैं । अगर कभी milk supply ठीक न हो तो फार्मूला मिल्क देना कोई बुरी बात नहीं है।"

रेणुका शहाणे बताती हैं की मदरहुड एक लाइफ चेंजिंग एक्सपीरियंस होता है क्योंकि माँ बनने के बाद आप एक सेकंड में लिए भी नहीं भूल सकती की अब आप एक माँ हैं ।हम आपमें में है कौन में भाभी का रोल करने वाली रेणुका आज भी लाखों दिलों पर राज करती हैं । जहाँ दुनिया उन्हें आज भी इस रोल के लिए जानती है वहीँ उन्होंने बॉलीवुड में और भी कई फिल्में की और उनसे काफी नाम भी कमाया है । 

आशुतोष राणा से इनकी शादी को 10 साल से ऊपर हो गए । इनके 13 साल और 11 साल के 2 बच्चे हैं शौर्यमान और सत्येंद्र और रेणुका की दुनिया इन्ही के इर्द गिर्द घूमती है । ज्यादा लोग नहीं जानते हैं की रेणुका एक मशहूर लेखक और क्रिटिक शांत गोखले की बेटी हैं । वो बताती हैं की उनकी माँ ने उन्हें कुछ सीख दी थी जिनका पालन वो आज भी करती हैं । Indusparent ने हाल ही में इनके साथ एक इंटरव्यू किया जिसके अंश कुछ इस प्रकार हैं ।
 
“मदरहुड एक लाइफ चेंजिंग एक्सपीरियंस होता है क्योंकि माँ बनने के बाद आप एक सेकंड में लिए भी नहीं भूल सकती की अब आप एक माँ हैं । बच्चे होने से पहले आप सिर्फ अपने बारे में सोच सकते हैं, अन्य लोगों के साथ घुलमिल सकते हैं , कली भी फैसला ले सकते हैं । लेकिन जैसे ही आपके लाइफ में बेबी आता है वैसे आपके फैसले आपपर बहुत लंबे समय तक असर करते हैं । बच्चों को बहुत साड़ी सुरक्षा की जरूरत होती है और इसका फैसला आपको करना होता है। और फिर चाहे इसका नतीजा अच्छा हो खराब हो आपको मानना ही पड़ता है । इसीलिए आपकी ज़िन्दगी बहुत तेजी से बदल जाती है । खुशियों के साथ साथ चिंता भी आती है ।
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"6 सालों से मैं कुछ भी नही कर रही थी और ये मेरे अंतर्मन का निर्णय था की बच्चे होने के बाद मैं आराम करूँ। मेरी माँ बच्चों को देखने के लिए पास होती थी।  जब मैं 8 साल की थी तब उन्होंने काम मरना शुरू किया और बचवन के वो कुछ समय मेरे लिए हमेशा बेशकीमती रहेंगे । माँ हमेशा आसपास रहती थी और जब आपके पेरेंट्स साथ हों तो सुरक्षित महसूस होता है । मेरे मन में सुरक्षा भवन और प्यार को लेकर इसका बहुत ज्यादा फर्क पड़ा और यही मैं अपने बच्चे के साथ करना चाहती हूँ । "

“इसीलिए मैं किसी भी हाल में तुरन्त काम पर नहीं जानेवाली थी । आज भी मैं उतना काम नहीं करती हूँ । इसीलिए मैं टीवी भी नही करती हूँ क्योंकि इमे बहुत ज्यादा टाइम लगता है । रैलिरी शो करने में मुझे कोई परेशानी नहीं होती है क्योंकि उसमे एक फिक्स समय तक ही काम करना पड़ता है ।

“इसी तरह से मैं अपने प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ को बैलेंस करती हूँ ।मुझे लगता है की ये कुछ साल हैं वो कभी वापस नहीं आएँगे। ये मेरे लिए एक चैलेंज भी है क्योंकि पेरेंटिंग कोई आसान काम तो बिलकुल नही है लेकिन इसने मुझे न जाने कितनी ख़ुशी और शान्ति दी है । आज मैं अपने बच्चों को मूल्यों के साथ बड़ा होते हुए देखती हूँ जो मेरे दिए हुए हैं, मेरी मेड या मेरे बुजुर्गों के नही । "
 

सबसे अच्छी वैल्यू जो मुझे मेरी माँ से मिली है वो है ईमानदारी

"सबसे पहली और अच्छी सीख जो मुझे मेरी माँ से मिली हो है ईमानदारी ।मेरी माँ हमेशा कहती थी की अपने पर्सनल या प्रोफेशनल लाइफ में कभी भी ईमानदारी से समझौता मत करना । वो एक बेहतरीन कुक थीं और सिलाई बुनाई के काम में भी माहिर थीं ।मेरे ज्यादातर कपड़े उन्हीने ही सिले थे और मैं उन कपड़ों को कॉलेज जाने तक पहना करती थी ।"

"मैं दोनों तरफ से सबसे बेहतर ढंग से बड़ी हुई हूँ । क्योंकि बच्चों द्वारा एक वर्किंग मॉम को एक्सेप्ट करना भी एक बड़ी बात है क्योंकि इससे उन्हें पता चलता है की माँ का उनके जीवन में क्या रोल है । मुझे जब भी माँ की जरूरत पड़ती थी वो मेरे साथ होती थी । अपने काम के साथ साथ वो हमें भी अपना पूरा ध्यान देती थीं । इससे हमें भी पता चला की बाहर जाकर कमाना केवल पुरुषों का ही काम नहीं है ।"
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"यही बातें अब मेरे बच्चे धीरे धीरे सीख रहे हैं । कभी कभी वो पूछते भी हैं की आप काम क्यों करते हो और मैं उन्हें समझाता हूँ की काम सिर्फ जरूरतों को पूरा करने के लिए ही नही बल्कि ये आत्म-सम्मान के लिए भी जरूरी है ।  मुझे ये भी मेरी माँ ने ही सिखाया की जबतक आप खुद अपनी इज़्ज़त नहीं करेंगे तबारक कोई दूसरा आपकी इज़्ज़त नहीं कर सकता । यही वो कुछ प्रिंसिपल और वैल्यू हैं जिनपर मेरा जीवन आधारित है और मैं कोशिश करती हूँ की अपने बच्चों को भी ये सभी वैल्यू दूँ ।"
"हम एक मिडिल क्लास फॅमिली से थे, मेरे बच्चे मुझसे ज्यादा किस्मत वाले हैं । उन्हें हर वो चीज़ मिल जाती है जो वो चाहते हैं लेकिन धीरे धीरे मैं उन्हें पैसों के बारे में कुछ बातें सिखाना चाहती हूँ । उन्हें समझना चाहती हूँ की वो हर तबके के लोगों का सम्मान करें और उनकी परेशानियों, मेहनत और जज्बे को समझें ।"
 

मैं girly chatter बहुत मिस करती हूँ ।

"2 बेटों को बड़ा करना थोडा मुश्किल है क्योंकि हमारे नेचर अलग अलग होते हैं । मेरे बेटों को लड़कियों की तरह साड़ी बात शेयर करने की आदत नहीं है लेकिन फिर भी उनके साथ मेरा बांड बड़ा प्यारा और खूबसूरत है । वो इमोशनली सुरक्षित होते हैं, इसीलिए उन्हें शेयर करने की आदत नहीं होती है । इसीलिए मैं girly talks को बड़ा मिस करती हूँ। "
 
मैं बहुत lenient मॉम हूँ
 
" मैं बहुत lenient मॉम हूँ इसीलिए मुझे कई बाद खुद को याद दिलाना पड़ता है की उदार होने के साथ साथ बच्चों को अनुशासन में रखना भी उतना ही जरूरी है । पेरेंट्स होने के नाते हमें linient होना पड़ता है खासकर के उनके academic performance को लेकर । मुझे लगता है की हमारा एजुकेशन सिस्टम बच्चों को खुला दिमाग रखने से, जिज्ञासा रखने से डराता है। उन्हें लगता है की ऐसा करने से कुछ गलत हो जाएगा या नंबर कम आ जाएंगे । इसी वजह से बच्चों को सही शिक्षा नहीं मिल पाती है ।"
 
"मुझे लगता है की एजुकेशन मार्क्स के लिए नही होनी चाहिए । एजुकेशन का मतलब नयी चीजें सीखना, नए आईडिया को एक्स्प्लोर करना आदि होना चाहिए । मैं कोई ‘helicopter parent’ नहीं हूँ और ना ही अपने बच्चों को फ़ालतू की एक्टिविटी में हिस्सा लेने के लिए फ़ोर्स करती हूँ । मैं उन्हें आज़ादी देती हूँ क्योंकि यही वो समय है जब वो फ्री हैं उनपर कोई जिम्मेदारी नहीं है । उन्हें इस समय को एन्जॉय करना चाहिए ।"
 

मेरे बच्चे अपने पापा को हलके में नही लेते हैं ।

"एक अभिनेता के तौर पर आशुतोष बहुत ज्यादा बिजी रहते हैं इसलिए हनारे घर में लगभग एकतरफा सिस्टम है । कभी कभी वो बहुत समय के लिए हमारे साथ होते हैं लेकिन ये बहुत कम होता है क्योंकि उन्हें अपने काम के लिए बहुत ज्यादा ट्रेवल करना पड़ता है । लेकिन जब वो घर पर होते हैं तो बच्चे मुझसे ज्यादा उनसे डर कर रहते हैं क्योंकि मैं हमेशा उनके साथ होती हूँ इसीलिए वो मुझे for granted लेते हैं । लेकिन वो जानते हैं की वो पापा के साथ ऐसा नहीं कर सकते । हम इसे भी कभी कभी पेरेंटिंग टूल की तरह इस्तेमाल करते हैं (हंसते हुए) ।"
 
एक परिवार के तौर पर हम एक दुसरे के साथ एन्जॉय करते हैं ।
“हम जब भी साथ होते हैं तो घर में बहुत से खेल खेलते हैं ख़ासकर के board games। हम सबको खेलना बहुत पसन्द है । हम बाहर भी बहुत ज्यादा जाते हैं, क्लब भी जाते हैं घूमते भी हैं । इसके अलावा भी हम बहुत कुछ करते हैं । जब आशुतोष घर पर होते हैं तो हम ज्यादातर समय घर पर ही बिताते हैं एक दुसरे से बात करते हैं, फॅमिली के सातग क्वालिटी टाइम बिताते हैं । हमे एक दुसरे से बात करना फॅमिली में बड़ा पसंद है।"
 
ईमानदारी हर तरह के रिश्तों की बुनियाद होती है ।
"मुझे लगता है हर अच्छे रिश्ते की बुनियाद ईमानदारी ही होती है । हम कोशिश करते हैं की बच्चों के सामने लडें झगड़ें नहीं ताकि उन्हें आसपास का वातावरण सुरक्षित लगे। ये उनके लिए एक रोल मॉडल की तरह भी काम करता है । अगर हम एक दूसरे के साथ सहमत नही भी होते हैं तो हम बच्चों के सामने बहस नहीं करते हैं।"
 
"एक कपल के तौर पर हमें जो भी प्रोब्लम है उसे हम उसी एक दिन में ठीक कर लेते हैं ताकि अगली सुबह जब उठाएं तो पिछले दिन का बोझ सर पर न हो । हम दोनों जब मिले तो हमारी उम्र 30 में थी और शादी उसे बाद ही हुई इसीलिए तबतक हम इतने समझदार हो गए थे की रिश्तों को समझ सकें। ये लव मैरिज थी जो एक पुरानी शराब की तरह ही होती है । शादी जितनी लंबी जाएगी वो उतनी अच्छी होती जाती है।"
 
मैं religious से ज्यादा spiritual हूँ ।
"मेरे पति धार्मिक हैं क्योंकि उनकी परवरिश वैसे ही माहौल में हुई है और मैं ऐसे फॅमिली से हूँ जो धार्मिक नहीं है। मुझे धर्म को मानना नहीं सिखाया गया है। मुझे बीएस सिखाया गया है की लोगों के अलग अलग रहन सहन का सम्मान करना चाहिए । मेरी परवरिश इसी तरह से हुई है । मेरे दोनों पेरेंट्स शान्ति पसंद थे उर घर में बहुत ही सहिष्णुता का माहौल था।"
 
"मैं spiritual हूँ और इसमें धर्म की बात नहीं होती । मेरे बड़े बेटे ने एक बार बताया की "क्या होगा अगर मेरे बड़े होने के बाद मुझे किसी धर्म से खिंचाव महसूस न हो तो? अगर ये आपके साथ हो तो आप क्या करोगे? मैंने कहा की मैं इसके लिए तैयार रहूंगी।"
"मैं उन्हें जहाँ भी सम्भव हो सिखाने की कोशिश करती हूँ जैसे अगर मैं भगवद् गीता पढ़ रही हु। और मुझे लगता है कक कुछ उन्हें बताना चाहिए तो मैं बताती हूँ। लेकिन अब ये उनपर है की वो इसे फॉलो करेंगे या नही।वो अच्छे इंसान बने इसी में मेरी सबसे बड़ी ख़ुशी है।
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भारतीय माएँ breastfeeding को लेकर बहुत प्रेशर में रहती हैं ।

"मैं तो यही कहूँगी की हर बच्चा अपने एक अलग गन के साथ पैदा होता है और कोई फिक्स नियम नहीं है जिसे फॉलो करना ही करना है। बच्चे को जब भूख लगेगी तो वो रोएगा। अगर भूख मिटने के बाद भी वो रो रहा है तो हो सकता है कोई चीज़ उसे परेशान कर रही हो , शायद बंद नाक आदि। बच्चे के नेचर को समझना आसान है । नयी माओं को on demand feeding पर ही ध्यान देना चाहिए। इससे milk supply भी बेहतर होती है । "

"हाँ स्तनपान कराना बहुत ही ज्यादा जरूरी है लेकिन फिर भी मुझे लगता है की यंग मॉम आजकल breastfeeding को लेकर बहुत ज्यादा प्रेशर में हैं । अगर कभी milk supply ठीक न हो तो फार्मूला मिल्क देना कोई बुरी बात नहीं है।"

"मेरे बड़े बेटे के मामले में मुझे ब्रैस्ट मिल्क और फार्मूला मिल्क दोनों ही इस्तेमाल करना पड़ा था । मुझे डर लगता था की मैं अपने बच्चे को फार्मूला मिल्क कहीं बहुत ज्यादा तो नहीं दे रही, कुछ गालटी तो नहीं कर रही। लेकिन ऐसा कुछ था नहीं वो बहुत अच्छे से स्वस्थ बड़ा हुआ । छोटे वाले को तो मैंने 2 साल तक ब्रैस्ट फीड किया । मुझे उन माओं के लोए बुरा लगता है जो इन कारणों से दबाव में रहती हैं ।"

"हर बच्चा अपने आप में अलग होता है इसीलिए कोई फिक्स नियम नहीं बनाया जा सकता है । एक माँ को बच्चे की जरूरत पूरी करनी चाहिए लेकिन इसमें बहुत से फैक्टर सामने आते हैं । इसी तरह से जब आप अपने बच्चे को अनुशासित करते हैं तब यही बात आती है । घर में स्वास्थ्य और खेलकूद को लेकर नियम बनाएं लेकिन सख्ती कम बरतें।  आपको अपने बच्चे का नेचर, आदत वगेरा समझने के लिए फ्लेक्सिबल होना पड़ेगा। हम टेक्नोलॉजी की दुनिया में जी रहे हैं और घरों में ऐसी बहुत सी चीजें आ गयी हैं जो हमारे समय में नहीं थीं । "

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