असामयिक puberty, चिंता का विषय होना चाहिए?

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पांच वर्षीय बच्चे के साथ प्यूबर्टी को समबद्ध नहीं कर सकते? ठीक है, लगता है की आपने असामयिक प्यूबर्टी के बारे में सुना नहीं है। यहाँ हम आपके लिए उस पी शब्द को खुले पन्ने की तरह रख रहे हैं ।

5 साल की आरिया नाथ के लिए वो दिन अच्छा नहीं था । उसे सुबह से बेचैनी हो रही थी और जी मचल रहा था और जबतक वो अपने घर अस्ति तबतक उसके पेट में जबरदस्त अकड़न होने लगी थी । वो फटाफट से अपने बाथरूम में गयी और लगभग चिल्लाते हुए बाहर आई । उनकी माँ अनन्या नाथ बताती है की वो लगभग सदमे में थी उसने कहा की माँ मुझे चोट लग गयी है बाथरूम में सब जगह खून फ़ैल गया है । ये दरसल असामयिक प्यूबर्टी का मामला था ।

प्यूबर्टी अपने आप में अजीब समय होता है । और जब ये कम उम्र में होने लगता है तो ये और भी अजीब हो जाता है । आपको अपने 5-6 साल के बच्चे को उसके शरीर में हो रहे इन बदलावों के बारे में समझाना मुश्किल हो जाता है । ऐसे समय में शरीर तो  इन बदलावों को झेलने के लायक हो जाती है पर दिमाग नहीं । इस मुद्दे को बहुत ही संवेदनशीलता के साथ हैंडल करना चाहिए ।

दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल में प्रसूति और स्त्री रोग विभाग के निदेशक और प्रमुख डॉ संजीवनी खन्ना बताते हैं की "यौवन ज़िन्दगी का वो भाग है जहाँ एक यौन रूप से अपरिपक्व बच्चा एक संभावित प्रजनन के लायक किशोर और उसके बाद, एक वयस्क के रूप में विकसित हो जाता है। युवावस्था में नसों और हार्मोन से जुड़े एक तंत्र का पूर्ण रूप से विकास शुरू हो जाता है ।"

FMRI दिल्ली में मानिसक स्वास्थ और आचरण विज्ञान के प्रमुख कामना छिबर बताती हैं की "आप अपने बच्चे के शरीर में हो रहे बदलाव और प्यूबर्टी के बारे में उससे बात करें । और सबसे महत्त्वपूर्ण है की अगर आपका बच्चा कोई सवाल करे रो उसे रोके नहीं ।आपको बच्चे के सवालों को ध्यान से सुनकर तथ्यों के साथ उसे समझाना चाहिए ।

असामयिक प्यूबर्टी क्या है ?
साधारण प्यूबर्टी की उम्र लड़कियों में 8 से 13 साल और लड़कों में 9 से 14 साल होती है । असामयिक प्यूबर्टी तब माना जाता है जब यह लड़कियों में 8 वर्ष की उम्र से पहले हो जाए और लड़कों में 9 वर्ष की उम्र से पहले ।

समयपूर्व प्यूबर्टी के लक्षण 
प्यूबर्टी के दौरान पुनरुत्पादन अंग काम करना शुरू कर  देता है । दिल्ली के एस. सी.आई इंटरनेशनल हॉस्पिटल के स्त्री रोग विशेषज्ञ आरती साहनी के मुताबिक़ प्यूबर्टी के दौरान ये निम्नलिखित लक्षण सामान्य रूप से दिखाई देते हैं ।

लड़कियों में लक्षण

  • स्तन का विकास
  • शरीर के निजी अंगों और काँखों में बालों का निकलना
  • जब बच्चा हर साल 7 से 8 सेंटीमीटर बड़ी होने लगे
  • चेहरे और पीठ पर मुँहासे आना

लड़कों में लक्षण

  • निजी अंगों के आकार में वृद्धि
  • आवाज में भारीपन
  • मांसपेशियों के बनना
  • चेहरे पर बालों का आना
  • सजृर की लंबाई का तेज़ी से बढ़ना

इन सबके अलावा व्यवहारिक और इमोशनल बदलाव भी आते हैं जिनका ध्यान रखना भी बहुत जरूरी है । ऐसे समस्या में बहुत जरूरी है की आप उससे बातचीत करें और भावनात्मक रूप से साथ दें ।

असामयिक प्यूबर्टी होने के कारण

  • दिमाग गोनाडोट्रोपिन नामक हॉर्मोन्स बनाना शुरू कर देता है । (Gn-RH)
  • पिट्यूटरी ग्रन्थियां ज्यादा हार्मोन्स बनाना शुरू कर देती हैं । (Gn-RH) के कारण पिट्यूटरी ग्रन्थियां 2 और हॉर्मोन्स छोड़ती हैं जिसे लुटेंइज़िंग हॉर्मोन (LH) और फॉलिकल स्टिमुलेशन हॉर्मोन (FSH) कहते हैं ।
  • सेक्स हॉर्मोन्स का बनना । LH और FSH ओवरी में हॉर्मोन्स बनाना शुरू कर देती हैं जिससे महिलाओं में सेक्सुअल प्रव्रित्ति जगाने वाली हॉर्मोन एस्ट्रोजन का बनना शुरू हो जाता है और पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का ।
  • शारीरिक बदलाव : एस्ट्रोजन और टेस्टोस्टेरोन के बनने से शारीरिक बदलाव आने शुरू हो जाते हैं जिससे प्यूबर्टी असामयिक हो सकता है ।

यह प्रक्रिया कई बच्चों में जल्दी शुरू ही जाती है । और यह कितनी जल्दी शुरू होगी ये इस बात पर निर्भर करती है की बच्चे में सेंट्रल असामयिक प्यूबर्टी (CPB) है या पेरीफेरल असामयिक प्यूबर्टी ( PPB).
ज्यादातर बच्चों में CPB होता है जिससे कोई स्वास्थ संबंधी हानि नहीं होती है और ना ही इसका कोई कारण होता है ।

बहुत ही कम केस में निम्नलिखित कारणों के वजह से समयपूर्व प्यूबर्टी हो सकती है ।

  • दिमाग या स्पाइनल कॉर्ड में ट्यूमर का होना
  • जन्म के समय दिमाग में किसी समस्या का होना जैसे हैड्रॉएफलुस या हमार्तोमा.
  • दिमाग या स्पाइनल कॉर्ड में रेडिएशन का होना
  • दिमाग या स्पाइनल कॉर्ड में किसी तरह से चोट लगना
  • हाइपोथायरायडिज्म

जहाँ तक PPB का सवाल है एस्ट्रोजन और टेस्टोस्टेरोन के कारण आपके बच्चे को असामयिक प्यूबर्टी होती है ।  लड़के और लड़की दोनों में PPB होने के ये कारण हो सकते हैं ।

  • एड्रेनल ग्रंथियों में ट्यूमर का होना या पिट्यूटरी ग्रंथियों में ट्यूमर का होना ।
  • बाहरी एस्टेओगें या टेस्रोस्टेरोने के श्रोतों के संपर्क में आना । जैसे क्रीम आदि ।

src=http://hindi admin.theindusparent.com/wp content/uploads/sites/10/2016/03/dreamstime s 43204633.jpg असामयिक puberty, चिंता का विषय होना चाहिए?

असामयिक प्यूबर्टी से उत्पन्न होने वाली संभावित जटिलताएं

बंगलोरे के फोर्टिस हॉस्पिटल नेवाटोलॉजि और बाल चिकित्सा विभाग के प्रमुख डॉ प्रकाश वेंगल के मुताबिक़ असामयिक पुणेर्टी के कारण कई शारीरिक और भावनात्मक जटिलताएं आ सकती हैं जिनमे से कुछ प्रमुख हैं :

धीमा विकास :

असामयिक प्यूबर्टी वाले बच्चे शुरू में हो सकता है की आओनी उम्र के बच्चों के मुकाबले बहुत तेज़ी से बढ़ें लेकिन क्योंकि उनकी हड्डियां बकिओं के मुकाबले बहुत जल्दी बढ़ जाती हैं इसीलिए उनका बढ़ना भी बाकियों से पहले रुक सकता है । इससे वो अपने बाकी दोस्तों के मुकाबले कम लंबे हो सकते हैं ।

समाजिक और भावनात्मक समस्याएं :
जोनबछे अपने दोस्तों के मुकाबले जल्दी प्यूबर्टी लेवल को छुते हैं उन्हें बाकियों की अपेक्षाकृत ज्यादा संकोची होते हैं । वो अपने शरीर में हो रहे बदलावों को लेकर खुद ही संकोचित रहते हैं  ।इससे आत्म-विश्वास में कमी आने की आशंका होती है जिससे बच्चा कम उम्र में ही डिप्रेशन का शिकार हो सकता है । असामयिक प्यूबर्टी का समय रहते इलाज़ से उनकी उंचाई को सामान्य से बेहतर बनाया जा सकता है ।

  1. अगर प्यूबर्टी 12 साल के उम्र में भी शुरू हो तब भी यह अजीब हो सकता है . कम उम्र के बच्चों के लिए ये और दर्द भरा और तकलीफदेह हो सकता है . उन्हें खुद को अपने हमउम्र साथियों से अलग देख के अजीब लग सकता है .

असामयिक प्यूबर्टी के बारे में बच्चों को कैसे समझायें ?

5 साल के बच्चे को इसके बारे में बताना आसान बिलकुल भी नहीं है . लेकिन क्या सच में इसके बारे में उनसे बात न करना इसका उपाय है ? दिल्ली के फोर्टिस हॉस्पिटल में एंडोक्राइनोलॉजिस्ट एवं सीनियर कंसलटेंट डॉ पंकज अनेजा बताते हैं की बच्चे और माता पिता दोनों को ही असामयिक प्यूबर्टी से डरना नहीं चाहिए और ना ही इसे किसी बिमारी की तरह लेना चाहिए . समझने की जरूरत है की जिन बच्चों में असामयिक प्यूबर्टी होती है उनमे ज्यादातर स्वस्थ ही होते हैं फिर चाहे वो मानसिक रूप से हो या शारीरिक रूप से .

33 साल की मीडिया प्रोफेशनल नैना रावत (बदला हुआ नाम) याद करती हैं जब उन्हें पहला पीरियड शुरू हुआ था तब वो कक्षा 3 में पढ़ती थी . " ज्यादा खेल कूद करने के वजह से मुझे लगा की मैंने खुद को चोट पंहुचा ली है और मै अपनी माँ से इस बारे में बात करने से डर रही थी . हालाँकि मैंने बहुत ज्यादा हिम्मत जुटा कर आखिरकार माँ को बात ही दिया . " डॉक्टर से मिलने के बाद असामयिक प्यूबर्टी की बात साफ़ हो गयी और डॉक्टर ने कहा की डरने की कोई बात नहीं है . हालांकि रावत उस दिन को नहीं भूल पाती हैं और कहती हैं की उस दिन घर में ऐसा माहौल बन गया था जैसे मुझे कोई बिमारी हो गयी है . आज वो उस बात पर हंसती हैं और कहती हैं की अगर उनके बच्चे के साथ ऐसा होगा तो सबसे पहले वो उनकी चिन्गता को दूर करेंगी और उन्हें आराम अकरने को कहेंगी .

डॉ वेंगल कहती हैं "अपने बच्चे को विश्वास दिलाएं की उसके सभी दोस्त और उसके सभी साथिओं के साथ भी वही हो रहा है जो उसके साथ हो रहा है . उसे रोजाना के व्यायाम और काम काज में शामिल करने के लिए प्रोत्साहित करें .

एक माता पिता के तौर पर हमें अपने बच्चों की भावनाओं के प्रति संवेदनशील दिखाना जरुरी है खासकर के उम्र के उस पडाव में जहाँ वो इस जबरदस्त बदलाव से गुजरते हैं .ऐसे बच्चों को और प्यार और ध्यान से संभालने की जरूरत होती है .

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