Pregnancy की जांच के 5 tips जो आपको पता होना चाहिए

ये सभी जांच बहुत जरुरी होते हैं जिससे गर्भ के दौरान छोटी से छोटी समस्याओं पर भी नज़र रखी जाती है ।

एक नए माँ के तौर पर आप कई तरह के गर्भ के जांच से होकर गुजरती हैं .ये सभी जांच बहुत जरुरी होते हैं जिससे गर्भ के दौरान छोटी से छोटी समस्याओं पर भी नज़र रखी जाती है ।

अगर आप बहुत ही स्वस्य्थ महिला हैं हैं फिर भी ये जांच आपके लिए बहुत ही फाएदेमंद साबित हो सकते हैं। गर्भ की जांच अल्ट्रासाउंड मशीन के द्वारा की जाती है। इन सभी जांचों में अल्ट्रासाउंड मशीन एक हाई फ्रीक्वेंसी की तरंगे पेट से होते हुए गर्भाशय तक पहुंचाती हैं। इनसे मिलने वाली रीडिंग का अध्यन किया जाता है और भ्रूण में होने होने वाली किसी भी संभावित समस्या का पता लगाया जाता है।

गर्भ जांच के प्रकार

अपने गर्भावस्था के शुरुवात में  आपको आपके OB-GYN के द्वारा एक चार्ट दिया गया होगा। इस चार्ट में 5 प्रमुख जांच की लिस्ट होती है जो आपको करवाने होते हैं . आप अपने गर्भावस्था के कई चरणों में अलग अलग जांच करवाने होने हैं। ये जांच इस प्रकार हैं।

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डेटिंग एवं वायबिलिटी जांच

  • ये जांच छठे और नौवें हफ्ते में किया जाता है . इस जांच में प्लेसेंटा और बच्चे की स्थिति का पता किया जाता है।
  • इस जांच के जरिये आप अपने बछे की धडकन सुन सकते हैं। और यह इस बात का भी सबूत होता है की आपने सफलतापूर्वक गर्भ धारण कर लिया है।
  • इस जांच से आपके अगले मासिक धर्म का सटीक रूप से पता चल जाता है।
  • किसी भी तरह के खून निकलने या जैम जाने की स्थिति की जांच भी हो जाती है और इस बात का भी पता किया जाता है की आपके गर्भ में कितने बच्चे पल रहे हैं ?
  • गर्भ में रक्त के प्रवाह की जांच भी इसी दौरान की जाती है।

नुचल ट्रांस्लुसेंसि टेस्ट(NT स्कैन )

  • यह जांच गर्भ के 11वें या 13वें हफ्ते में किया जाता है और इसे “अर्ली मोर्फोलोजी स्कैन” भी कहा जाता है।
  • इस जांच में बच्चे के गले के पास के तरल पदार्थ की जांच की जाती है . अगर इस तरल पदार्थ की पार्ट मोटी है तो किसी डाउन सिंड्रोम की समस्या हो सकती है ।
  • इसीलिए इस जांच को खासकर के बच्चों में किसी भी तरह की शारीरिक विसंगतियों का पता लगाने के लिए किया जाता है ।

अनोमली स्कैन

  • यह जांच गर्भ के 18वें और 20वें हफ्ते में की जाती है . इस जांच में भ्रूण की गतिविधिओं और विकास की जांच की जाती है ।
  • इस जांच में भ्रूण के अंदरूनी अंगों के विकास की भी जांच की जाती है ।
  • इस जांच में उम्बिलिकल कार्ड की भी निगरानी र्काही जाती है साथ में प्लेसेंटा की स्थिति पर भी नज़र रखी जाती है ।
  • अनोमली जांच में गर्भ में अमिनिओटिक तरल पदार्थों की भी जांच होती है . इसमें गर्भ और सर्विक्स के बीच की दूरी नापी जाती है ।

ग्रोथ स्कैन

  • यह जांच गर्भ के 28वें और 32वें हफ्ते में की जाती है . इस दौरान गर्भ में बाचे के विकास पर नज़र रखी जाती है ।
  • आपके OB-GYN आपके बच्चे के सर और पेट के आकार को नापेंगे ।
  • इस जनच में आपके बच्चे की जाँघों की हद्दिओन की लम्बाई की भी जांच की जाती है  जिससे किसी भी प्रकार के विसंगति का पता लगाया जा सके ।
  • इसमें गर्भ में अमिनिओटिक तरल पदार्थ के मौजूदगी का भी पता लगाया जाता है ।

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कलर डोपलर टेस्ट

  • यह जांच गर्भ के 36वें और 40वें हफ्ते में की जाती है . इसकी जांच में बच्चे के स्वास्थ्य की जानकारी जुताई जाती है और 38वें हफ्ते अंत तक आप प्रसव के लिए तैयार हो जाते हैं ।
  • इस जांच में बच्चे के अलग अलग अंगों में रक्त प्रवाह की जांच की जाती है .इसमें उसका दिमाग, दिल आदि भी शामिल है ।
  • इस जांच से ये पता लगता है की बच्चे के शरीर में ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की मात्रा प्लेसेंटा के द्वारा सही पहुँच रही है या नही ।

गर्भ के जांच का इस्तेमाल

  • ये सभी अल्ट्रासाउंड टेस्ट गर्भावस्था के अलग अलग सप्ताहों में की जाती है जिससे बच्चे के सही विकास की जानकारी मिलती है . इसके अलावा गर्भ की जांच से ये बातें पता लगती हैं :
  • अण्डों की स्थिति का पता लगाना जहाँ प्लेसेंटा भी मौजूद होती है ।
  • बच्चे के दिल की धडकन का पता करना
  • गर्भ में कितने बच्घे हैं उसका पता करना
  • एक्टोपिक गर्भ का पता लगाना
  • प्रसव के सटीक तारीख का पता लगाना
  • गर्भ के दौरान खून बहने से रोकना और उसके जड़ का पता लगाना
  • बच्चे में डाउन सिंड्रोम है या नहीं इसका पता लगाना
  • बच्चे और प्लेसेंटा की अथिति का पता लगाना
  • बच्चे के शरीर के अंगों के विकास का पता लगाना
  • अमिनिओटिक तरल पदार्थ के सही मात्रा का पता लगाना
  • गर्भ में रक्त प्रवाह का पता लगाना

गर्भ के जांच की प्रक्रिया

क्यिंकि गर्भ की जांच अलग अलग सप्ताहों और अलग अलग समयों पर होती है इसीलिए आपसे कहा जाएगा की जांच वाले दिन आप या तो खाना न खाएं या केवल तरल पदार्थ का ही सेवन करें। जैसे हो सकता है की जांच से पहले आपको कई ग्लास पानी पीना पड़े ।

पानी पीने से फैदा ये होता है की आप बच्चे को साफ़ साफ़ देख पाते हैं। अगर OB-GYN बच्चे को नहीं धुंध पाते हैं तो आपको वजाइनल टेस्ट के लिए भी तैयार रहना पद सकता है . इस प्रक्रिया में एक ट्रांसड्यूसर को आपके योनी में डाला जाता है जिससे आप अपने बच्चे को साफ़ साफ़ देख सकती हैं ।

हालांकि ऐसे कई कारण है जिन न्वाझों से आपके OB-GYN बच्चे के विकास को नहीं देख पाएं। ऐसे ही कुछ कारण निम्नलिखित हैं :

  • अगर आपकी उम्र 35 वर्ष से ज्यादा है
  • अगर आपके गर्भ में जुडवा बच्चे हैं
  • अगर रक्त प्रवाह उम्बिलिकल कार्ड में सही ना हो
  • अगर आपको हाई ब्लड प्रेशर, या लीवर की कोई समस्या हो या डायबिटीज हो

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क्या करें अगर गर्भ के जांच के दौरान कोई समस्या का पता चले .

 अगर आप ऊपर के किसी भी बिंदु से मेल खाते हैं तो हो सकता है की डॉक्टर आपके होने वाले बच्चे में कोई न कोई समस्या ढूंढ निकालें। स्पिना बिफिदा जैसी समस्याओं का पता चल सकता है इस दौरान . दुसरे जांचों में जन्म के साथ शारीरिक विसंगतियों जैसे डाउन सिंड्रोम की जानकारी मिल सकती है।

अगर बच्चे में ऐसी किस समस्या की बात का पता लगे तो आपको किसी विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए और अपने अप को आने वाले समय के लिए तैयार करना चाहिए। लेकिन इस बात का ध्यान रखें की ये गर्भावस्था के जांच जानकारी देने के लिए होते हैं ताकि बच्चे का सही तरह से विकास हो सके ।

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