Exclusive :पेरेंटिंग बोले तो टार्चर का दूसरा फॉर्म- फनी मैन Cyrus Broacha

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फनी मैन साइरस ब्रोअका के कई रूप हैं . वो एक टेलीविज़न एंकर हैं, विडियो जॉकी हैं, थिएटर पर्सनालिटी हैं, कॉमेडियन हैं, पोलिटिकल सटायरिस्ट हैं, कोलुम्निस्ट हैं, पॉडकास्टर हैं, ऑथर है . लेकिन अगर आपक्पो लगा की वो सिर्फ गिगल्स के ग्रांडमास्टर हैं तो दोबारा सोच लीजिये . वो आपके दिमाग को काफी अच्छे से चार्म भी कर सकते हैं .

इन्दुस्परेंट के साथ एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में "फॅमिली मैन" ब्रोअका जिन्होंने एक फोटोग्राफर एषा ब्रोअका से शादी की 2001 में हमें परेंतिंग स्टाइल में मल्टीटास्किंग स्किल्स लाने का तरीका बताते हैं .

(एडवाइस यही है की थोड़ा चटकारा लेकर पढें 

पेरेंटिंग के लिए : ये तो भाई टॉर्चर का दूसरा नाम है ख़ास कर के तब जब मुझे अकेले सब हैंडल करना पड़े . मैंने 44 साल तक रेस्पोंसिबिलिटी शेयर की है . मै तो उनमे से हूँ जिसे क्लास का मॉनिटर भी बनाया जा रहा हो तो खुद भाग के पोस्ट छोड़ देगा. अच्छा इससे पहले की मै एगोइस्टिक लगने लगूं बता दूँ की मै लॉन्ग पैन्ट्स नहीं पहनता, मेरे पास कभी भी अपिसे नहीं होते हैं. कुछ साल पहले बच्चों के पिक एंड ड्राप के दौरान मैंने फ़ोन से ही कुछ कुछ करना शुरू कर दिया . इमानदारी से कहूँ तो मई आदिवासिओं की तरह गुफा में रहना अपसंद करता हूँ . यहाँ तक की मुझे तो मेरे मम्मी पापा आज भी पैसे देते हैं , मेरे पास कोई एटीएम नहीं है और न ये पता है की मेरे अकाउंट में कितने पैसे हैं . मुझे ये भी नहीं पता की मै महीने में कमाता कितना हूँ . मेरी पूरी लाइफस्टाइल गैरजिम्मेदार रूप से गुजर रही है जिस वजह से मै बड़ा स्ट्रेस फ्री रहता हूँ और खूब एन्जॉय करता हूँ . लेकिन ये भी अपने आप में स्टायलिश बात है आपको पता होना चाहिए की कुछ बहुत बड़े जो पॉलिटिशियन होते हैं वही मेरे जैसी ज़िन्दगी जी पाते हैं .लेकिन मेरे हिसाब से पेरेंटिंग बहुत ही स्ट्रेस भरा काम है . लेकिन जब घर में नन्हे बच्चे आ जाते हैं जो बड़े हो रहे हैं तो ये और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है . लेकिन मैंने बड़ा आसान रास्ता अपनाया है ,मै बच्चों को लीड लेने देता हूँ.कल मेरी बीवी अलीबाग में थी . मैंने उनसे पूछा की सोना है या नहीं , जवान्ब आया टीवी देखना है और मै मान गया . टीवी देखते देखते मै सो गया और सुबह उठ के हमेशा की तरह बहुत अच्छा लगा और मै अपने पॉडकास्ट के लिए आगे निकल लिया . हालाँकि बच्चे किस हाल में थे मुझे नहीं पता . मैंने कहा था न मै रेस्पोंसिबिलिटी अच्छे से उठा लेता हूँ .

शादी एक बारे में : शादी के कांसेप्ट पर ध्यान मत दीजिये . ये पार्लियामेंट्री सिस्टम की तरह है जहाँ दोनों सदन मेरी पत्नी आयशा है और मै एंग्लो इंडियन हूँ जो संसद में चुपचाप बैठा है. लेकिन मै इस पार्लियामेंट्री सिस्टम से बहुत खुश हूँ जहाँ वो मुझे बताती है की मै क्या करूँ . लोगों को अपनी ताकत का अंदाजा शादी में ही लगता है . और हाँ शादी में डेमोक्रेटिक सिस्टम का होना भी जरूरी है . 4-5 साल बाद नयी सरकार बननी चाहिए और लोगों को ज्यादा टेंशन नहीं लेनी चाहिए . मै इस कांसेप्ट को लेके बहुत आश्वस्त हूँ .

बच्चों के पालन पोषण पर : मै अपने बच्चों से कहता हूँ की वो अपने लिए कोई और रोल मॉडल खोज ले . वैसे भी वो मुझे बहुत कम रेस्पेक्ट देते हैं और मेरे होने का पता भी उन्हें मुश्किल से चलता है .घर से बाहर तो बहुत अच्छा बिहेव करेंगे लेकिन घर में इनका कोई माई बाप नहीं होता . ये बिलकुल वैसा ही जैसे हम इंडियन हैं घर से बाहर कचरा फेंक देते हैं लेकिन अमेरिका जाओ तो अचानक तमीज आ जाती है . मेरे बच्चे बिलकुल वैसे ही हैं .बच्चों के साथ रहना बिलकुल वैसा है जैसे आर्मी में रहना लेकिन आर्मी में रिस्क कम है. मुझे बहुत बुरा लगता है जब लोग मुझे उनके अपने बच्चों का ख्याल रखने को कहते हैं , मेरे पास आलरेडी 2 हैं दूसरों के बच्चों का ख्याल क्यों रखूं मै . अगर मुझे बच्चे और पौधे में से किसी एक का ख्याल रखना होता तो मै पौधा चुनता क्योंकि वो बहुत जल्दी मर जाते हैं . आपको एक्साम्प्ल देके बताता हूँ, मेरे घर में 4 टीवी है ताकि बच्चे बिजी रहें .

डेली रूटीन के बारे में : मंडे से थर्सडे तक तो मै एक शो के राइटिंग, शूटिंग के बीच टाइम बांटता रहता हूँ जिसका नाम है " हफ्ता जो कभी था ही नहीं" बुधवार को मै पॉडकास्ट पर काम करता हूँ . वीकेंड पर मै अपने सोशल कमिटमेंट पुरे करता हूँ . शाम में मै अपने डॉग को घर के काम निपटाने के बाद ओवल गार्डन लेकर जाता हूँ और ये सब मेरी पत्नी के आदेश हैं . खाली टाइम मै वही करता हूँ जो देश के ज्यादातर मर्द करते हैं - मैनीक्योर, पेडीक्योर .

हॉबी के बारे में : लोगों को लगता है की मै पुराना हो गया हूँ, मोटा हूँ लेकिन उन्हें नहीं पता की मै वेट ट्रेनिंग में बिजी हूँ . मुझे ये पसंद है और मै ज्यादातर जिम में होता हूँ . दरअसल वहां का एसी अच्छा काम करता है और आप तो जानते ही हैं एसी में दोस्तों से गप्पे मारने का मज़ा ही अलग है .

पेरेंटिंग एडवाइस : हमारी आबादी 1.2 बिलियन है, अगर आपके पास ज्यादा बच्चे हैं तो प्लीज बांग्लादेश को दे दीजिये . अच्छा चलिए थोड़ी गंभीरता से बात कर लेते हैं . शहरों में रहने वाले लोगों को अपने बच्चे के साथ ज्यादा से ज्यादा वक़्त बिताना चाहिए .

अपनी बायोग्राफी के बारे में : शायद उसमे लिखा होगा " हमारे 5 दिन के वीकेंड क्यों नहीं होते". हमें एक ही लाइफ ही मिली है इसीलिए मेरे हिसाब से तो 2 दिन का हार्ड वर्क भी काफी है .इसीलिए हर बार ओ मैंने चौथी शादी क्यों नहीं की , मैंने माउंटेन क्लाइम्बिंग क्यों नहीं की का रोना नहीं रो सकते ."

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