गर्भ के दौरान पायरिया समय से पहले बच्चे के जन्म का कारण बन सकता है .

अगर गर्भ के दौरान पायरिया का सही इलाज़ न हो तो बच्चा समय से पूर्व ही जन्म ले सकता है .शोधकर्ता बताते हैं की गर्भवती माँ को पायरिया होना बच्चे के लिए कई तरह के रिस्क लेके आता है . और ये समस्या और भी गंभीर हो जाती है अगर माँ को डायबिटीज भी हो .

परिभाषा

पायरिया  से मसूड़ों में संक्रमण फ़ैल जाता है जो आखिरकार दांतों पर असर करता है . इससे दिल का दौरा पड़ने की संभावना भी बढ़ जाती है .

मुंबई की ओरल फिजिशियन और मक्सिलोफेसिअल रेडियोलाजिस्ट डॉ अम्बिका तिवारी बताती हैं “ पायरिया  की शुरुवात ज्यादातर गम में होने वाले संक्रमण से होती है जो हड्डियों के बीच के मसूड़ों को नुकसान करते हैं  . अगर इनका इलाज़ न किया जाए तो ये शरीर में जलन की शुरवात करवा देते हैं जिससे दांत और gm के बीच की दूरी बढ़ जाती है और जबड़े में भी संक्रमण फ़ैल जाता है “ वो कहती है की इसका सही इलाज़ न करने से दांत ढीले हो जाते हैं  और आखिरकार दांत गिर जाते हैं .

डॉ तिवारी बताती हैं की गर्भ के दौरान अगर पायरिया  हो जाए तो ये बच्चे के लिए बहुत ही ज्यादा खतरनाक स्थिति हो जाती है . इससे होने वाली माँ के गम में जलन होना शुरू हो सकता है . वो कुछ स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं की लिस्ट बताती है जो पायरिया से सम्बंधित हैं :

  • प्रीक्लाम्प्सिया
  • बच्चे का वजन कम होना (ढाई किलो से कम )
  • समय से पहले बच्चे का जन्म होना
  • समय से पहले ही प्रसव पीड़ा का शुरू हो जाना
  • प्रसव के बाद ही कठिनाइयाँ

पायरिया के लक्षण

समय से पायरिया का पता लग जाना बह्बुत मदद कर सकता है अगर आप एक गर्भवती माँ हैं तो . इसके अलावा भी पायरिया के लास्ख्नों को जानकार उसे जल्दी से जल्दी ठीक करना आपके लिए अच्छा ही है :

  • मसूड़ों में सुजन
  • मसूड़ों में दर्द
  • मसूड़ों के रंग का गुलाबी से बैगनी या लाल रंग में बदल जाना
  • मसूड़ों का सिकुड़ना या दान्तं का लम्बा दिखना
  • साँसों में दुर्गन्ध
  • मुह के स्वाद का बिगड़ जाना
  • दांतों के बीच के जगह का बढ़ जाना
  • दांतों का टूट जाना
  • दांतों के बीच में पस जम जाना
  • कुछ खाते समय दांतों का हिलना

गर्भवस्था के दौरान पायरिया के कारण होने वाले रिस्क फैक्टर

डॉ तिवारी गर्भावस्था के दौरान होने वाले पायरिया के रिस्क के बार में ब्नाताती हैं :

  • पायरिया  शरीर में सी-रिएक्टिव प्रोटीन की मात्रा बढ़ा देता है जिससे जलन का एहसास होता है . पायरिया का बैक्टीरिया खून में शामिल हो सकता है जिससे लीवर CRP बनाना शुरू कर सकता है जिससे खून के जमने जैसी स्थिति बन सकती है . जिससे हार्ट अटैक आने की संभावना भी बढ़ जाती है .
  • पायरिया प्रोस्टाग्लैंडीन की मात्रा को भी बढ़ा देता है जिससे समय से पूर्व ही प्रसव हो जाने से कम वजन के बच्चे जन्म लेते हैं
  • गर्भवती महिलाओं में पायरिया होने से शोध बताते हैं की उनके इन्तेंरल मम्मरी ग्लैंड आदि में भी संक्रमण के फैलने का खतरा बना रहता है .

इन सबके अलावा पायरिया  कई और कार्डियोवैस्कुलर, बैक्टीरियल निमोनिया और डायबिटीज जैसी बिमारिओं को जन्म दे सकता है .

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ये हैं वो कुछ फैक्टर जिनके वजह से गर्भ के दौरान पायरिया  होने की संभावना बनी रहती है :

  • गर्भ के दौरान हॉर्मोन में बदलाव
  • मुह की सफाई न रखना
  • गिन्गिविटीस
  • डायबिटीज
  • उम्र ज्यादा होना
  • धुम्रपान करना
  • पौष्टिक भोजन न लेना
  • प्रतिरोधक क्षमता कम होना

पता लगाना और इसका इलाज़

गर्भ के दौरान पायरिया का पता लगाना बहुत आसान है डॉ तिवारी बताती हैं “ शुरू में डॉक्टर मसूड़ों और गम की जांच कर के बता देते हैं की पायरिया है या नहीं “ वो कुछ सावधानियों की लिस्ट बताती हैं जिससे पायरिया से बचा जा सकता है :

  • पायरिया के इलाज़ के साथ साथ मुह की सही सफाई और उनका ध्यान रखना जरुरी है
  • पायरिया के कारण होने वाले जलन का इलाज़ करवाना आपके बच्चे के समय से पूर्व जन्म लेने से बचा सकता है . इसलिए गर्भवती महिला कोप अपने दांतों की और मुह की अच्छी सफाई रखनी चाहिए और ध्यान रखना चाहिए .
  • किसी भी तरह की समस्या से बचने के लिए पायरिया का पता लगते ही किसी डॉक्टर को तुरंत दिखाना चाहिए और इसका इलाज़ करवाना चाहिए

जहाँ तक इलाज़ की बात है , दो तरह के इलाज़ संभव हैं एक सर्जिकल और दूसरा नॉन सर्जिकल .

नॉन सर्जिकल इलाज़

गर्भवती महिला के लिए कई तरह के नॉन सर्जिकल इलाज़ मौजूद हैं . डॉ तिवारी बताती है की पायरिया को बढ़ने से रोकना एक स्वस्थ बच्चे के जन्म के लिए अतिअवाश्यक है . ये नॉन सर्जिकल इलाज़ कुछ इस तरह के होते हैं :

  • स्केलिंग :ये एक साधारण प्रक्रिया है जिसमे दांतों के जड़ के पास से बैक्टीरियल टोक्सिन को निकाल लिया जाता है .
  • रूट प्लानिंग : रूट प्लानिंग में जरूरत से ज्यादा टारटार को निकाल दिया जाता है जिससे दांतों की सतह पर बैक्टीरिया जम नहीं पाते
  • एंटीबायोटिक्स :  एंटीबायोटिक्स से मुह को धोना बैक्टीरिया को खत्म करने का काम करता है . ऐसे कई जेल मार्किट में उपलब्ध हैं .

सर्जिकल इलाज़

सर्जिकल प्रक्रिया कुछ इस प्रकार की होती है :

  • सॉफ्ट टिश्यू ग्राफ्ट : मुह के अन्दर किसी जगह से स्वस्थ कोशिका को लेकर मसूड़े के उस जगह प्रत्यारोपित कर दिया जाता है जहाँ पायरिया के वजह से नुकसान हुआ है .
  • फ्लाप सर्जरी : मसूड़ों में छोटा सा चिड़ा लगाया जाता है ताकि स्केलिंग और रूट प्लानिंग आसानी से हो सके .
  • बोन ग्राफ्टिंग : आपके शरीर से ही छोटे से हड्डी के एंड को दांत के पास उस जगह लगाया जा सकता है जहाँ पायरिया के वजहसे नुकसान हुआ है .
  • गाइडेड टिश्यू रेजेनेरेशन : एक स्पेशल बायोकम्पेटिबल फैब्रिक को दांत और मसूड़े के बीच में लगा दिया जाता है जहाँ पायरियाके वजह से हड्डियों का नुकसान हुआ हो
  • इनेमल एप्लीकेशन : एक स्पेशल जेल जिसे दांतों पर लगाया जाता है .

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बचाव

पायरिया से होने वाले रिस्क को 50 फीसदी तक आसानी से घटाया जा सकता है . डॉ तिवारी के मुताबिक “ इन इलाजों से कई हानिकारक असर से बचा जा सकता है “ इसके अलावा वो कहती हैं की की एक डेंटिस्ट की सलाह लेती रहनी चाहिए जिससे गर्भ के दौरान किसी भी तरह की समस्या का पता पहले से लगाया जा सके . निम्नलिखित उपाय भी पायरिया से बचने में मददगार साबित हो सकती हैं :

  • ठीक से देखभाल करें
  • मुलायम ब्रश का इस्तेमाल करें
  • दिन में दो बार मुह धोएं
  • खाने के बाद कुल्ला करें
  • धुम्रपान न करें
  • अपने कहाने पिने की आदतों पर संयम रखें
  • विटामिन लेते रहें

एक होने वाली माँ के तौर पर आप न सिर्फ अपने लिए वल्कि अपने अपने बच्चे के लिए भी आहार लेती हैं लेकिन दांतों और मिउह का स्वास्थ्य बनाए रखना एक बहुत जरुरी कदम है . अच्छा खाएं और अच्छे से सफाई रखें .

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