ooops....ब्रेस्टफीडिंग मॉम घर से बाहर निकलें तो ज़रा सम्भल के...कहीं सरेआम किरकिरी ना हो जाए

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बड़ी मुश्किल से मैं अपने बालों की सहायता से तो कभी हैंडबैग से गीलापन छुपा रही थी और कोई साधन था भी तो नहीं । खैर...आनन-फानन में घर पहुंचने तक मैं पूरी भींग चुकी थी ।

स्तनपान एक ऐसी प्रक्रिया है जो मां बनने के अनूठे अनुभव को और भी सुखद बना देता है । मां और शिशु के भावनात्मक रिश्ते को ये एक अलग आयाम देता है । स्तनपान जितना शिशु के लिए फायदेमंद है उतना ही सेहदमंद नुस्खा ये मां के लिए भी है ।

कम से कम 6 माह तक तो शिशु के लिए यही सर्वोत्तम माना गया है हलांकि 1 से 1.5 वर्ष तक बच्चे को मां के दूध की आवश्यकता रहती है ।

ये अलग बात है कि कई बार शिशु को मां से पर्याप्त दूध नहीं मिलने पर उसे फार्मूला फीड देने की मजबूरी हो जाती है लेकिन पूरे न्युट्रिशन के लिए ब्रेस्ट मिल्क का सुझाव ही दिया जाता है । कहते हैं की स्तनपान के माध्यम से शिशु से मां का स्नेह भरा संबंध और भी गहरा हो जाता है ।  

मातृत्व के शुरुआती दिनों में...

src=https://hindi admin.theindusparent.com/wp content/uploads/sites/10/2017/06/breastfeeding.jpg ooops....ब्रेस्टफीडिंग मॉम घर से बाहर निकलें तो ज़रा सम्भल के...कहीं सरेआम किरकिरी ना हो जाए

अगर आप भी यंग मॉम हैं तो आपने भी ये ज़रुर अनुभव किया होगा कि दूध पिलाने की रुटीन में अगर एक आध घंटे की हेर-फेर हुई तो कितना असहज महसूस होता है । मतलब साफ है कि एक मां शारीरिक और मानसिक दोनों तौर पर अपने बच्चे से जुड़ी होती हैं ।

मातृत्व के शुरुआती दिनों में तो शिशु के हिसाब से ही आपकी भी बायोलोजिकल क्लॉक सेट हो जाती है । इसलिए इसमें कोई हैरानी कि बात नहीं है कि अगर आप बेबी को एक बार फीड करा कर उसे उसके डैड की देखरेख में छोड़ पार्लर जा रही हैं तो ध्यान रहे कि अधिक देरी होने पर हो सकता है कि ब्रेस्ट से खुद ब खुद दूध का रिसाव होने लगे ।

ऐसी परिस्थिति में अनकम्फर्टेबल होने से बचने के लिए अपनी ड्रेसिंग स्टाईल में लाऐं थोड़ा सा बदलाव...

  • पैडेड ब्रा का इस्तेमाल कुछ हद तक कारगर हो सकता है
  • मार्केट में ब्रेस्ट पैड भी उपलब्ध हैं जो काफी मददगार होंगे
  • जींस और कैज़ुवल टी के साथ कॉटन स्टोल जरुर कैरी करें
  • सलवार कमीज़ या लेगिंस-कुर्ते के साथ दुपट्टा लेना ना भूलें
  • घरेलू स्तर पर भी आप उपयोगी ब्रेस्ट पैड बना सकती हैं हलांकि बेहतर हाईजीन के लिए रेडिमेड पैड ही उचित रहेगा ।

हालांकि जैसै-जैसे आपका शिशु परिपक्व होता जाता है और अधिक मात्रा में दूध पीने लगता है और ये परेशानी खत्म हो जाती है ।

ब्रेस्टफीडिंग से जुड़े आक्वाड मोमेंट्स के मामले में मेरा अनुभव तो और भी शर्मसार करने वाला रहा है । मेरा बेटा 18 महीने का है । बांकि सारी शरारतों में तो वो मुझे बेहद ही क्यूट लगता है लेकिन फीडिंग को लेकर वो बिल्कुल भी कॉम्प्रोमाइज़ नहीं करता था ।

3 महीने का हुआ था “श्रद्धेय” जब मैंने फाइनली अपने मेकओवर का सोच लिया । ज्यादातर मॉम्स की तरह मैं भी कई महीनों से नर्सिंग नाईटी पहन कर बोर हो रही थी सो जींस और कुर्ता उस दिन के आउटिंग के लिए मुझे परफेक्ट लगा ।

मेरी कुर्ती गीली हो रही है...

मेरे घर से जिले का मार्केट 45 मिनट की दूरी पर है । मैं खुली जगह ऐन्जॉय ही कर रही थी कि घर से निकलने के तकरीबन डेढ़ घंटे के बाद ही मिल्क रिलीज होने लगा मेन मार्केट में जरुरी काम निबटाते हुए मैंने नोटिस किया कि मेरी कुर्ती गीली हो रही है ।

बड़ी मुश्किल से मैं अपने बालों की सहायता से तो कबी हैंडबैग से गीलापन छुपा रही थी और कोई साधन था भी तो नहीं । खैर...आनन-फानन में घर पहुंचने तक मैं पूरी भींग चुकी थी ।

इसलिए डियर मॉम्स, आप इस तरह बाहर निकलने से बचें और जब भी जाऐं तो पूरी तैयारी के साथ ताकि सरेआम आप की किरकिरी ना हो सके...।

मेरा बेटा जब 6 महीने का हुआ, मुझे अक्सर ही उसे डॉक्टर के पास ले जाना होता था ज़ाहिर सी बात है कि बाहर फीड की डिमांड भी पूरी करनी पड़ती थी । टॉवेल या दुपट्टे के अंदर शांति से दूध पीने की उसकी आदत ना होने के कारण मुझे पब्लिक प्लेस पर बड़ी मशक्कत करनी होती थी ।

ज़रा सोचिए ऐसे में जब आस-पास के लोगों की नज़रें यहां वहां की ठोकर खा कर आपके हालात़ पर ही अटक जाएं और आपके दुलारे को किसी भी तरह का पर्दा मंज़ूर ना हो, वो बिल्कुल ही खुली हवा का आदी हो तो कैसी आफ़त आऐगी...इसलिए नवज़ात शिशु को दूध पिलाते वक्त पतले पारदर्शी कपड़े से ढ़कने की आदत बनाएं ।

धीरे-धीरे जब बेबी बड़ा होने लगेगा तो वो इस प्रक्रिया में असहज महसूस नहीं करेगा और उसमें ढ़क कर फीड लेने की यही आदत बनी रहेगी ।