Life से जुड़े 6 Skills जो आपके बच्चे को सिखने चाहिए

फॉर्मल पढ़ाई लिखाई तो बच्चों को उनके करियर के लिए तैयार करती हैं . इसमें जीवन जीने से जुड़ी बातें कम ही होती हैं . माता पिता को अपने बच्चों के अकादमिक पढ़ाई के अलावा भी जीवन से जुड़ी दिख देने की कोशिश करनी चाहिए . इसके लिए आप उन्हें उदाहरण पेश कर सकते हैं , उनसे बातें कर सकते हैं . तो आइये जानते हैं ऐसे ही कुछ स्किल के बारे में जो आपके बच्चों को सीखनी चाहिए .

क्रिटिकल थिंकिंग

दुनिया को नये रास्ते वही लोग दिखाते हैं जो भीड़ से अलग चलते हैं . हमें कम उम्र से ही ये सब सीखना शुरू करना चाहिए . कसी भी बात पर सवाल करना और मेनस्ट्रीम से अलग हटकर सोचना और अपनी काबिलियतों पर भरोसा करना ही एक अच्छे इंसान की पहचान होती है . बड़े, बच्चों से सवाल पूछकर उसमे क्रिटिकल थिंकिंग के गुण भर सकते हैं .

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सुनने की स्किल का होना एक बच्चे को बातचीत में बेहतर बनाता है .

सुनना किसी का आदर करने का एक सबसे ठोस तरीका है . इसमें आप आँखों से संपर्क बनाते हैं, जानकारी को समझते हैं , सहनशक्ति रखते हैं, भाषा के विकास के लिए सुनना बहुत ही आवश्यक है . बच्चों को सुनने के गुण बताने का एक तरीका है की आप उनकी कही हुई बात को एक बार पुनः दोहरायें ताकि बच्चे को लगे की आप उसकी बातों में दिलचस्पी ले रहे हैं . कोई कहानी कहते समय ब्रेक लें और बच्चे से उस कहानी को कहने के लिए कहें .कोई राइम गायें और कोई शब्द छोड़ दें और बच्चे से वो शब्द पहचानने को कहें .

आजादी भी वो स्किल है जो बच्चे को आत्मनिर्भर बनाती हैं

जो काम बच्चे कर सकते हैं अगर आप वो काम कर दें तो इससे बच्चों में सीखने की क्षमता कम हो जाती है . बच्चे को खुद ही उनका काम करने दें . आप केवल एक गाइड की भूमिका निभाएं . बच्चे को छोटी छोटी बातें सिखाएं , जैसे टेबल सेट करना, उनके कपडे उतरना, गिलास में पानी डालना आदि ताकि उनका आत्म-विश्वास बढे . बच्चों की समस्यायों को खुद सुलझाने की जगह बच्चे को ही नए नए आईडिया का इस्तेमाल करने दें . वो मैंने किया वाली फीलिंग बच्चे में आत्मविश्वास कूट-कूट कर भर सकती है .

बचत करना एक ऐसा गुण है जो हर बच्चे को सीखना चाहिए

फाइनेंसियल स्किल बेक नकारात्मक जीवन को सही कर सकता है . दुनियाभर के शोध बताते हैं की आज के युवाओं ने बचत करने की कला सीखी ही नहीं है . बचत करते रहना और सही समय पर सही सामान खरीदना एक कमाल का गुण है जो हर बच्चे को सीखना ही चाहिए . शोध बताते हैं की इसकी आदत 7 साल की उम्र से ही डालनी शुरू की जा सकती है .

हाज़िर दिमाग होना इमोशनल रेगुलेशन के लिए अच्छा है

माइंडफुलनेस का मतलब है सही समय पर खुद को तैयार रखना . इसका एक मतलब सभी तरह के विचारों, अभिव्यक्ति आदि के लिए तैयार रहना भी है . बच्चों को इम्पल्स कण्ट्रोल सिखाने में बहुत समय लगता है . जरुरी नहीं है की इसके लिए अलग से क्लास लेनी पड़े , आप खाते समय भी माइंडफुलनेस की सीख अपने बच्चे को दे सकते हैं , जैसे खाना कैसा दिखता है, उसका रंग, उसकी महक, उससे क्या महसूस होता है आदि से भी आप बच्चों को सिखा सकते हैं . इससे वो धीरे-धीरे और आराम से चबा कर खाना खाएंगे .

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सोशल स्किल बच्चों को दूसरों से जोड़ने के लिए जरूरी है

यही वो स्किल है जो बच्चों को दूसरों से घुलना मिलना सिखाती है, दोस्त बनाना सिखाती है लोगों को समझना सिखाती है . अगर बच्चे में सोशल स्किल अच्छे न हों तो हो सकता है की बच्चा आइसोलेटेड महसूस करे . बच्चों को दूसरों के साथ खिलौनों को बांटकर खेलने देना और अच्छे से खेल खेलना भी इसी स्किल के अंतर्गत आता है .

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