जब मेरे 5 साल के बच्चे ने कामसूत्र की किताब उठाई ! Sex Education

अगर आपके 10 साल से निचे के बच्चे के हाथ कोई सेक्स एजुकेशन की किताब लग जाए तो आप क्या करेंगे ? जानिए कैसे एक पिता ने मामले को सम्भाला अपनी बातों से

बच्चों से सेक्स के बारे में बात करने से पहले उनके सही उम्र का इंतज़ार करना चाहिए , कम से कम 15 साल . इसके बाद भी ये बातें अच्छे तरीके से करनी चाहिए .

एयरपोर्ट की दूकान पर जब बच्चा उछल कूद कर रहा हो तभी बैठ कर उसे समझाने लगना सही नहीं है . लेकिन जीवन आप जानते ही हैं , इसमें कुछ भी आसान नहीं है . ये आपको ऐसे हालात में डाल सकती है जो आओ कभी सोच भी नहीं सकते . और मेरे साथ ऐसा ही कुछ हुआ .कुछ हफ्ते पहले सिंगापुर जाते समय फ्लाइट का इंतजार करते हुए लगा की पास ही किताबों की दूकान पर जाया जाए .

पत्नी वहीँ बैठ कर इंतज़ार करने लगी जबकि दोनों बच्चे मेरे साथ ही चल पड़ें . मैंने भी सोचा की ठीक है घूमेंगे तो फ्लाइट में थक के सो जाएंगे . मैंने उनसे कहा की वो कुछ छुएं नहीं . लेकिन बच्चे कभी सुनते हैं ? नहीं .

मेरे बच्चे 5 मिनट भी शोर मचाये बिना नहीं रह सकते , लेकिन जैसे जैसे मैंने किताबों को देखना शुरू किया आस पास शांति का माहौल था जो मेरे लिए काफी अच्छा था . तो क्या बच्चे ठीक थे ? बच्चे थे कहाँ ?

मैं उन्हें ढूंढने लगा और मुझे घबराहट होने लगी . मैंने उन्हें हेल्थ एंड लाइफस्टाइल वाली शेल्फ के निचे खड़े पाया . जैसे ही मैं पास आया मैंने देखा की बड़े बच्चे के हाथों में एक किताब थी और दोनों उस किताब को घुर रहे थे .

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मैंने पूछा : तुम दोनों क्या कर रहे हो ?

बेटा : कुछ नहीं (किताब छुपाते हुए )

मैंने पूछा : अप कौन सी किताब पढ़ रहे हो ?

इससे पहले की कोई जवाब आता छोटे वाले ने मुंह खोल दिया “ ये बड़ी मजाकिया किस्म की किताब है , इसमें सारी नंगी तस्वीरें हैं “ मैंने पूछा : सच में ? मुझे दिखाओ

किताब के कवर ने और उसके कंटेंट से मुझे एक शॉक सा लगा . किताब का नाम था “ सेंसेशनल सेक्स” जिसमे महिलाओं और पुरुषों के बहुत अतरंग नग्न तस्वीरें थीं . शरीर के सामने का पूरा भाग नग्न अवस्था में दिखाया गया था .

मैंने उसे वापस रख दिया और तुरंत छोटे वाले ने पूछा

“ डैडी उस नंगू लड़की ने लड़के की पी-पी को क्यों पकड़ा हुआ है ?”

मैं ये बातें शांत वातावरण में करना चाहता था. लेकिन मैं एयरपोर्ट पर था और मेरे हाथ में एक किताब थी और मेरे दो बच्चे मुझे देखकर उत्तर का इंतज़ार कर रहे थे, वहीँ बाकी लोग हमें शक भरी निगाहों से देख रहे थे .

मैंने उससे कहा “ मैं बाद में बताता हूँ “

“लेकिन पापा उन्होंने कपडे क्यों नहीं पहनें हैं ? और वो नंगू पंगु होकर क्यों एक दुसरे से गले मिल रहे हैं ? क्या वो कपडे पहन कर गले नहीं लग सकते थे ? क्या कपडे पहन कर गले लगने से कपडे गंदे हो जाते हैं ?”

मैं उसे क्या बताता ? की वो सेक्स करने के लिए तैयार हो रहे हैं ? और वो महिला उस पुरुष के लिंग को इसीलिए पकडे हुए थी क्योंकि वो उसपर कंडोम चढ़ा रही थी ? की वो दोनों एक दुसरे की चुम्बन ले रहे थे ? 5 साल के बच्चे इनमे से कितनी बातें समझेंगे ?

“चलो यहाँ से चलते हैं , तुम्हारे सारे सवालों के जवाब मैं बाद में दूंगा “ मैंने उससे ऐसा इसीलिए कहा ताकि ये टॉपिक थोड़ी देर के लिए शांत हो और वो भूल जाए . मैंने किताब वापस उसकी जगह पर रख दी .

तभी एक जेंटलमैन ने पूछा की सब ठीक है ? मैंने कहा हाँ सब ठीक है .

जैसे ही वो आदमी आगे गया मैंने उससे कहा की मुझे लगता है की ऐसी किताबें बच्चों की पहुँच से दूर रखनी चाहिए और वैसे भी कोइ फ्लाइट में जा रहा व्यक्ति ऐसी किताबें क्यों पढ़ेगा ?

उसने कहा “ सेक्स पर आधारित किताबें यहाँ सबसे ज्यादा बिकती हैं “

मैं अपना सर हिलाते हुए उससे दूर जाने लगा तभी मेरी नज़र मेरे बच्चों पर पड़ी जो उसी शेल्फ से एक और किताब उठा रहे थे और जानते हैं ये किताब कौन सी थी ? कामसूत्र . मैंने  झट से किताब उससे लेकर वापस शेल्फ पर रख दी . और लगभग बच्चों को लेकर भागता हुआ स्टोर से बाहर आ गया .

लेकिन बच्चों की पहुँच में सेक्स की किताबें रखना गलती थी . दिल्ली एन.सी.आर में भी किताबें बेचने के लिए सेक्स से जुडी किताबों को वो सबसे सामने रख कर बेचते हैं . और कई बार तो कवर की तस्वीर ऐसी होती है की आपको शर्म आ जाती है .

पुरे भारत के किताब की दुकानें क्या माता पिता पर एक रहम कर सकती हैं की ऐसी सेक्स से जुडी किताबों को वो बच्चों की पहुँच से दूर रखें . ताकि अगली बार ऐसे असहज स्थिति का सामना न करना पड़े .

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