Frozen Embryo Transfer समय से पहले डिलीवरी का रिस्क 20% तक घटा देता है

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पिछले 2 से फ्रोजेन एम्ब्र्यो ट्रान्सफर टेक्नोलॉजी के आ जाने से भारतीय फर्टिलिटी सेक्टर ने अच्छी खासी सफलता हासिल की है . ये प्रोसेस माता पिता न बन पाने वाले कपल्स के लिए बहुत अच्छा साबित हुआ है ख़ास करके उन लोगों के लिए जो इसके बाद आइवीएफ़ अपनाते हैं या उनके लिए जो अधिक उम्र में प्रेग्नेंट होता चाहते हैं .स्कॉटलैंड के एबरडीन यूनिवर्सिटी के डॉ आभा महेश्वरी बताती हैं की 2012 में 37000 महिलाओं पर किये गये एक शोध के मुताबिक फ्रोजेन एम्ब्र्यो ट्रान्सफर से ब्लीडिंग का रिस्क 30% तक कम पाया गया .

इस तरह की प्रेगनेंसी कम वजन वाले बच्चों के जन्म के मामले में भी 30 से 40 प्रतिशत की कमी ला देती है . इसके अलावा समय से पूर्ण डिलीवरी के मामलों में भी 20 प्रतिशत की कमी आती है .

परिभाषा

आइवीएफ़ का प्राइमरी प्रोसेस होता है एम्ब्र्यो ट्रान्सफर जिसमे करीब 10 – 15 दिन लगते हैं एम्ब्र्योस को महिला के गर्भ में इंजेक्ट करने के लिए . फ्रोज़ेन एम्ब्र्यो ट्रान्सफर में एम्ब्र्यो को फ्रीज़ कर दिया जाता है और फिर उसे बाद में आइवीएफ़ साइकिल में इस्तेमाल किया जाता है .बचे हुए एम्ब्र्यो अपनी क्वालिटी के आधार पर बाद में भी आइवीएफ़ ट्रीटमेंट के लिए इस्तेमाल किये जा सकते हैं . एम्ब्र्योस को 10 साल तक स्टोर करके रखा जा सकता है .

फ्रोज़ेन एम्ब्र्यो ट्रान्सफर से किसे फ़ाएदा होता है ?

ये फर्टिलिटी तकनीक सिंगल पेरेंट्स में या 35 साल के बाद माँ बनने में या जिन कपल्स को बच्चे ना हो रहे हों उनके लिए फाएदा होता है .दिल्ली के मदर्स लैप आइवीएफ़ सेंटर में मेडिकल डायरेक्टर और आइवीएफ़ स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता अधिक उम्र के लोगों में इसके फाएदे के बारे में बताती हैं बताती हैं ' मान लीजिये एक कपल को आई.वी.एफ़ के जरिये एक बच्चा होता है  को भविष्य में इस्तेमाल होने के लिए फ्रीज़ करना चाहते हैं।  जब वो अगली बार फ्रोज़न एम्ब्र्यो ट्रांसफर के लिये आएंगी तबतक उनके ओवरी और अण्डों की उम्र हो चुकी होगी और उनकी फर्टिलिटी पहले से बहुत काम हो गयी होगी।  लेकिन उनका फ्रोज़न एम्ब्र्यो पहले की ही तरह स्वस्थ रहता है। '

src=http://hindi admin.theindusparent.com/wp content/uploads/sites/10/2016/03/dreamstime s 5002417.jpg Frozen Embryo Transfer समय से पहले डिलीवरी का रिस्क 20% तक घटा देता है

फ्रोज़ेन एम्ब्र्यो ट्रान्सफर की कीमत भारत में क्या है ?

एम्ब्र्यो को आइवीएफ़ या इंट्रा सैटोप्लास्मिक स्पर्म इंजेक्शन (आइसिएसाइ) साइकिल के द्वारा किया जाता है .इसीलिए आइवीएफ़ और आइसिएसाइ दोनों की ही कीमत अप्लाई होती है . इसके अलावा एम्ब्र्यो को स्टोर करके रखने की कीमत अलग से होती है .जहां तक कीमत की बात है एक एम्ब्रोय को फ्रीज करने के लिए 10000 से लेकर 15000 तक की लागत आती है। इसके अलावा फ्रोजेन एम्ब्रोय ट्रांसफर की कीमत करीब 15000 से 20000 के बीच में होती है।

फ्रोज़ेन एम्ब्र्यो ट्रान्सफर के समय क्या उम्मीद की जानी चाहिए ?

फ्रीजिंग एक काम्प्लेक्स प्रक्रिया है इसीलिए आपको इसके लिए पेशेंस रखना पडेगा .

एग्स को फ्रीज़ करने का प्रोसेस :

अल्ट्रासाउंड गाइडेड एम्बरयो ट्रान्सफर तकनीक में कैथेटर ले द्वारा एम्बरयो को यूटरस में डाला जाता है । कैथेटर अल्ट्रासाउंड में साफ़ तौर पर देखा जा सकता है इसीलिए एम्बरयो को यूटेरस में डालने की एक्यूरेसी बढ़ जाती है । सबसे पहले पेशेंट अपने पैर ऊपर करके टेबल पर लेट जाती हैं उसके बाद वैजाइनल स्पेक्युलुम से सर्विक्स को एक्सपोज़ किया जाता है । इसके बाद एम्बरयो को कैथेटर के द्वारा ट्रान्सफर किया जाता है और अंत में  बाद डॉक्टर कैथेटर के टिप को ध्यान से यूटरस में अंदर डालते हैं और फाइनली उटेरीन कैविटी में यूटरस को रख दिया जाता है ।

कुलिंग ऑफ पीरियड:

एम्ब्र्यो ट्रान्सफर के बाद महिला को करीब एक से दो हफ्ती तक प्रेगनेंसी के कन्फर्म होने का इंतज़ार करना पड़ता है . दिल्ली के मदर्स लैप आइवीएफ़ सेंटर की डॉ गुप्ता बताती हैं “आइवीएफ़ से कम तनावपूर्ण होने के बाद भी पेशेंट्स ट्रान्सफर के दौरान बहुत इमोशनल हो जाते हैं. ये इमोशनल रोलरकोस्टर आज भी जारी है . ये दो हफ्ते का समय भी कुछ ऐसा ही बीतता है"

फ्रोज़ेन एम्ब्र्यो ट्रान्सफर के बाद एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन लेना शुरू कर देना चाहिए . डॉ. गुप्ता के मुताबिक “ आपको 10-15 दिन में प्रेगनेंसी ब्लड टेस्ट  करवाना पड़ेगा . इसकी सफलता की दर 40 प्रतिशत है लेकिन ये क्लिनिक टू क्लिनिक बदलता रहता है"

फ्रेश और फ्रोज़ेन एम्ब्र्यो ट्रान्सफर में क्या फर्क है ?

  • कम दवाइयों का इस्तेमाल : एक फ्रेश आइवीएफ़ साइकिल के दौरान पेशेंट को इंजेक्शन के द्वारा सुपरओवुलेट किया जाता है ताकि वो और भी एग्स बना सकें . लेकिन फ्रोजेन एम्ब्र्यो ट्रान्सफर में पेशेंट को एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन दिया जाता है ताकि उटेरस की लाइनिंग को पतला किया जा सके . ये उटेरस को इम्प्लांटेशन के लिए तैयार कर देता है . और क्योंकि एग्ग्सा पिच्च्ले प्रोसेस में ही तैयार हो चुकी होती हैं इसीलिए बेहोश कर्ण एकी जरूरत नहीं पड़ती हैं .
  • तनाव का कम होना : ये तकनीक अपने आप में कम तनावपूर्ण है . ऐसा इसीलिए है क्योंकि स्टिमुलेशन रिस्पांस, एग्स रिट्रीवल और डेवलपमेंट, यहाँ तक की एम्ब्र्यो का ग्रोथ भी फ्रेश साइकिल में पूरा कर लिया जाता है .

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भारत में फ्रोजेन एम्ब्र्यो ट्रान्सफर का भविष्य

करियर के प्रति बढती चाह और आसानी से न आने वाले इनकम के इस दौर में अधिकतर महिलाएं एग फ्रीज़िंग का तरीका अपना रही हैं .2008 में Motherchildnutrition.org द्वारा किये गये एक शोध में ये बात साबित भी हुई की एग फ्रीजिंग अपनाने वालों की संख्या बहुत तेज़ी से बढ़ रही है .

2014 में यूनाइटेड किंगडम में द गार्डियनमें छपे एक खबर के मुताबिक एप्पल, फेसबुक जैसी बड़ी कंपनियों ने भी अपने महिला एम्प्लोयी के लिए एग फ्रीजिंग का खर्च उठाने की बात कही . इस फैसले को लेने के पीछे उद्देश्य था ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को जॉब की तरफ खींचना और उन्हें अपने करियर में ज्यादा देर तक ध्यान देने के लिए प्रोत्साहित करना .

डॉ. गुप्ता के मुताबिक़ ये वो कुछ कारण हैं जिस वजह से भारतीय कपल भी फ्रोजेन एम्ब्र्यो ट्रान्सफर तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं :

  1. कई कपल जो आईटी फर्म में या बीपीओ आदि में काम करते हैं वो अपने करियर को बनाने के चक्कर में बच्चों के बारे में सोचना भूल जाते हैं या उसपर उतना ध्यान नहीं देते हैं . इसीलिए वो इस तकनीक की सहायता लेते हैं .
  2. एक अच्छे करियर के अलावा शादी की अस्थिरता और इनफर्टिलिटी का डर वो कर्ण हैं जिस वजह से लोग आजकल फ्रोजेन एम्ब्र्यो ट्रान्सफर के ओर रुख कर रहे हैं .

डॉ. गुप्ता के मुताबिक “एग्स की संख्या और क्वालिटी उम्र बढ़ने के साथ-साथ घटती चली जाती है इसीलिए 20 से 30 या ज्यादा से ज्यादा 35 साल से पहले ही एग्स को फ्रीज़ करवा देना चाहिए . कम उम्र के एग्स में प्रेगनेंसी के चांस ज्यादा होते हैं लेकिन जागरूकता कम होने के कारण ज्यादातर महिलाएं उम्र निकल जाने के बाद एग फ्रीज करवाती हैं"

अगर कोई महिला 40 की उम्र में माँ बनना चाहती हैं तो उन्हें कई आइवीएफ़ साइकिल से होकर गुजरना पड़ता है जिससे खर्च भी बढ़ जाता है . इसके अलावा डॉ. गुप्ता बताती हैं की “ इस उम्र में आइवीएफ़ के द्वारा भी गर्भवती होने की संभावना बहुत कम होती है क्योंकि इस उम्र के एग्स की क्वालिटी बहुत खराब होती है . इसके उलट अलग 30 वर्ष की उम्र में एग्स को फ्रीज़ करा देने से 10 साल बाद गर्भवती होने की संभावना 3 से 5 गुना तक बढ़ जाती है"

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