EXCLUSIVE: कैसे मम्मी बनने के बाद बेटी रिद्धिमा की ताकत बनीं नीतू कपूर

अपने नई दिल्ली के घर में रिद्धिमा कपूर साहनी ने खास Indusparent से अपने मातृत्व, पांच साल की बेटी सामरा और मां नीतू कपूर की अपनी जिंदगी में प्रभाव पर बात की।

ऋषि कपूर और नीतू कपूर आज भी लोगों की फेवरिट ऑनस्क्रीन और ऑफस्क्रीन जोड़ी हैं और उनकी बेटी ऋद्धिमा कपूर भी पिछले कुछ समय से अपनी RKS ज्वेलरी के कारण काफी चर्चा में हैं जिसमे वो खुद डिजाइन और स्टाइलिंग करती हैं और साथ ही पूरी दुनिया में इसकी शिपिंग की जाती है।

अपने नई दिल्ली के घर में रिद्धिमा कपूर साहनी ने खास Indusparent से अपने मातृत्व, पांच साल की बेटी सामरा और मां नीतू कपूर की अपनी जिंदगी में प्रभाव पर बात की।

एक स्टार किड होना

उस तरह के माहौल में बड़ा होना हमारे लिए नॉर्मल था क्योंकि हमें कुछ पता नहीं था (कि हम क्या थे) लेकिन हमारे आस पास के लोग जैसे हम प्लेडेट पर स्कूल से जाते थे तो हमें ध्यान से देखते थे और अलग ट्रीटमेंट मिलता था जबकि घर में हम काफी नॉर्मल तरीके से बड़े हो रहे थे।

उस समय जब तक हमें कोई एहसास नहीं दिलाता था हमें नहीं पता चलता था कि हम क्या हैं। हमें बहुत बाद में पता चला कि हमारे पैरेंट्स काफी पॉपुलर हैं जब हमने उन्हें टीवी पर या किसी अवार्ड शो में जाते देखा।

मेरे डैड हमे अपने शो के लिए विदेशों में ले जाते थे और लोग उन्हें देखकर चिल्लाते थे, बिल्कुल क्रेजी हो जाते थे तो हमें एहसास होता था कि वो पॉपुलर हैं।

एक बड़ा एक दूसरे से जुड़ा परिवार

जब हम स्कूल में थे तो डैड शूटिंग में ज्यादा व्यस्त रहते थे। मेरी मां अपना करियर बहुत कम उम्र में छोड़ चुकी थीं महज 22-23 साल में ताकि वो हमारे साथ रह सकें और हमें समय दे सकें।

उनका सारा समय हमारे लिए और हमारे साथ ही गुजरता था।डैड ज्यादातर शूट पर होते थे लेकिन हर रविवार को वो हमें अपने साथ बाहर लंच या खेलने के लिए ले जाते थे। वो वीकेंड पर हमारे साथ सारा समय बिताते थे।

मुझे याद है गर्मी की छुट्टियों में वो हमें जहां जाते थे ले जाते थे। चाहे उनका कही परफॉर्मेंस हो वो अपनी फैमिली को ले जाते थे। सोमवार से शुक्रवार के बीच भी वो 6 बजे शाम तक घर पहुंच जाते थे ताकि सोने से पहले हमारे साथ समय बिता पाएं।

मम्मी के त्याग और प्रभाव पर

मां हमेशा घर पर होती थीं। मां का घर पर होना काफी नॉर्मल है। अगर मेरी मां वर्किंग होती तो अलग होता लेकिन उन्होंने हमारे लिए सब छोड़ दिया। करियर के टॉप पर होकर उसे छोड़ देना आसान नहीं होता। उन्होंने उस उम्र में करियर को छोड़ दिया जब आजकल एक्ट्रेसेस अपना करियर शुरू करती हैं। हम उनकी जज्बे की आज भी तारीफ करते हैं।

मेरी भी एक बेटी है। मैं हमेशा मम्मी से टच में रहती हैं। अगर मेरा मेरी बेटी के साथ कोई बात हो मैं मम्मी को व्हाट्सएप करती हूं। वो मुझसे सिर्फ एक मैसेज की दूरी पर होती हैं।

शादी पर

शादी एक Two Way रोड है। आप सिर्फ अपने पार्टनर से उम्मीद नहीं रख सकते और ना आपका पार्टनर आपसे उम्मीद रखेगा। इसमें बहुत कुछ खोना और पाना होता है लेकिन जरुरी ये है कि हम दोस्त बनकर रहें।

मेरी और मेरे पति के रिश्ते की शुरूआत दोस्ती से हुई थी जो एक पति पत्नि के रिश्ते में । हम भले शादी शुदा हैं लेकिन हम बहुत अच्छे दोस्त हैं।

प्रेग्नेंसी पर

मुझे प्रेग्नेंसी में कोई भी प्रॉब्लम नहीं हुई। भगवान का शुक्र था और ये मेरे लिए काफी नॉर्मल था। मैंने प्रेग्नेंसी को कोई बीमारी नहीं समझा था। जाहिर है कुछ बातों का ख्याल रखती थी लेकिन कई चीजें थी जो मैं पहली बार लाइफ में खा रही थी।

मैं वो सबकुछ खाती थी जो मैं खाना चाहती थी। अब हमें वजन को लेकर सजग रहते हैं लेकिन तब मैं सबकुछ खा रही थी। मैं ग्लो करती थी। वो खूबसूरत 9 महीने थे।

मां बनने पर

मैं अपने मां से खुद एक मां बन जाने के बाद ज्यादा जुड़ा हुआ महसूस करती हूं। अब मुझे लगता है कि मेरी मां हमेशा सही थी। एक समय आती है जब लगता है कि वो गलत हैं लेकिन अब हमें समझ आता है कि वो उस समय सही थी।

अब हम काफी अच्छे दोस्त हैं। दोनों मिलकर सामरा को संभालते हैं कि वो थोड़ी नटखट है। सामरा के जन्म के बाद मेरी जिंदगी बदल हई। ये एक खूबसूरत सफर है और उसका साथ मैं बहुत इंज्वॉय करती हूं। वो बहुत जल्दी बड़ी हो रही है लेकिन अपने बच्चे को अपने सामने बड़े होते देखना खूबसूरत एहसाह है।

हर मां सुपर मॉम है

हमारे देश में मम्मियों पर किसी तरह का सुपरमॉम होने का प्रेशर नहीं होता क्योंकि हम वो सबकुछ करते हैं जो हमारे बस का है। आपकी फैमिली है, पैरेंट्स हैं। कुछ ज्वाइंट फैमिली में रहते हैं तो कुछ ज्वाइंट फैमिली में नहीं भी रहते लेकिन हमारे पैरेंट्स हमेशा हमारी मदद के लिए खड़े रहते हैं।

आपके आसपास लोग मदद के लिए रहते हैं। लेकिन अगर आप अकेले सब संभाल लेती हैं और भी अच्छी बात है लेकिन सुपरमॉम जैसा कुछ नहीं होता। हर मां सुपरमॉम होती है क्योंकि जब मां बनती है आप सोती भी एक आंख खोलकर हैं।सामरा के होने के बाद मैं चैन से सो नहीं पाती थी क्योंकि मेरा ध्यान उसी पर होता था।

कामकाजी मम्मियों के लिए फिटनेस आइडल होने पर

हमेशा इस बात का ध्यान रखिए कि आप क्या खा रहीं है। अगर आपको कुछ अच्छा लगता है तो बेशक खाइए। भूखे रहने या मन मसोसकर रह जाने की जरूरत नहीं है क्योंकि ऐसे में बाद में उन चीजों पर टूट पड़ेंगी।चॉकलेट खाना है खाइए लेकिन संयम के साथ।

मैं डाइट पर नहीं जाती, ये बकवास है। आप जितना डाइट करेंगी उतना खाना चाहेंगी ये साइकोलॉजिकल है। सबकुछ लिमिट में खाइए और वर्कआउट कीजिए।

ये मेरा मंत्र है कि मै सबकुछ खाती हूं।मैं भूखे नहीं रहती लेकिन एक लिमिट तक खाती हूं।

riddhima kapoor sahni

वर्कआउट की जहां तक बात है मैं वो भी लिमिट से ज्यादा नहीं करती लेकिन करना भी कभी नहीं छोड़ती।दिन में आधे घंटे वर्कआउट या योगा भी बहुत है। सीढ़ियों से नीचे उतरना या चढ़ना भी वर्कआउट है। और सबसे जरूरी बात हमेशा खुश रहिए।

अपने स्टाइल पर

मेरी मां ही मेरी आइकन और रोल मॉडल हैं। मैं जैसे भी रहती हूं, पहनती हूं, मेरा स्टाइल सबकुछ उनकी वजह से है।वो मेरी स्टाइल गुरू हैं। मैं उनसे पूरी तरह से प्रेरित हूं।

अगर मुझे कहीं बाहर भी जाना होता है मैं अपनी तस्वीर उन्हें भेजती हूं ताकि वो मुझे बोल पाएं कि मैं ठीक लग रही हूं या मेरे लुक को बेहतरीन बनाने के लिए कोइ टिप्स दें ।

एक वर्किंग मां के तौर पर मुझे हमेशा कंफर्टेबल रहने की जरुरत होती है।इसलिए मैं ऐसे कपड़े पहनती हूं जिसमें मैं आराम से रहूं। अगर आप वर्किंग नहीं हैं तो भी आरामदायक कपड़े पहने। दूसरों को कॉपी ना करें क्योंकि जरुरी नहीं कि जो सामने वाले पर अच्छा लगे आप पर भी लगेगा।

आप अपना खुद का स्टाइल निकालें। वो कपड़े पहने जो सही फिट होते हो और पर्सनैलिटी पर अच्छए लगते हों। सबसे जरूरी बात चेहरे पर हमेशा स्माइल रखें।

काम के पीछे प्रेरणा

मैंने और मेरी मां ने मिलकर ज्वेलरी ब्रांड लॉन्च किया ।इसके बाद मैंने खुद की ज्वेलरी लाइन के बारे में सोची हालांकि सच बताऊं तो मेरी इसमें कभी दिलचस्पी नहीं थी खासकर जब मैं काफी यंग थी।

इंटरेस्ट तब आया जब हम महेश नोतांड ज्वैलर के ब्रांड एम्बेसडर बनें। तब मुझे दिलचस्पी आई। मैं अपने कुछ ज्वेलरी डिजाइन करने वाले दोस्तों को अपनी डिजाइन देती थी कि वो इसे बनाएं।फिर मैंने सोचा कि मैं खुद क्यों ना डिजाइन करुं और बिक्री करुं।

इस तरह से इसकी शुरूआत हुई। अब लगभग एक साल हो चुका है।हमारी यूएसपी रोज दिन पहनने वाली ज्वेलरी है जिसे आप दिन रात, डेट या लंच पर पहन सकती हैं। ये काफी किफायती भी है।

ऐसा इसलिए है क्योंकि आजकल मैं महिलाओं को ज्यादा सेट्स पहने नहीं देखती खासकर यग लड़कियों को। वो या तो कड़े या टेनिस ब्रेसलेट पहनती हैं। इसलिए रोज की जिंदगी में पहनने वाली ज्वेलरी पर फोकस करते हैं। हम इसे कुछ और देशों में खोलना चाहते हैं लेकिन अभी ये नहीं हो पाया है।

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Source: theindusparent