बच्चे को Culture से जोड़े रखना क्यों है जरुरी ?

जिस कल्चर में हमलोग रहते हैं वो हमारी समझ बनाता है .इसका असर बड़ों के साथ साथ बच्चों पर भी पड़ता है . यूनाइटेड स्टेट्स के इलेनॉइस में नोर्थवेस्ट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने यूनाइटेड स्टेट्स और चीन के बच्चों पर कुछ शोध किये और जानने की कोशिश की कि उनपर किसी चीज़ का क्या प्रभाव पड़ता है .

शोध में क्या पाया गया ?

एक्सपेरिमेंट के दौरान बच्चों को कई सीन बार बार दिखाए गये जैसे किसी लड़की का डौगी को प्यार करना, लड़की का दोगी को किस करना आदि . उन्होंने ये बातें पायीं :

  • चीन के शिशुओं को नए एक्शन पसंद आये क्योंकि उनके देश में बड़े लोग ज्यादातर किसी इवेंट या एक्शन पर ध्यान देते हैं
  • यूनाइटेड स्टेट्स के शिशुओं को नयी चीजें पसंद आयीं क्योंकि उनके देश के लोगों को चीजों में ज्यादा दिलचस्पी होती है .

स्टडी के लीड ऑथर और साइकोलॉजी इन द वेंबेर्ग कॉलेज ऑफ़ आर्ट्स एंड साइंस , नोर्थवेस्टर्न के सांद्रा वाक्स्मन बताते हैं की “ बच्चों का अटेंशन उन चीजों की तरफ ज्यादा होता है जिन चीजों को उन आस-पास के लोग सोसाइटी या देश के लोग फॉलो करते हैं .हम ये तो अच्छे से जानते ही हैं की बच्चे पेरेंट्स को कितने ध्यान से देखते और सीखते हैं .”

डॉ. वैक्समैंन आगे बताते हैं की अभी की स्टडी के मुताबिक अमेरिका और चीन के शिशु में आसपास की चीजों को पहचानने की अद्भुत क्षमता थी .

कल्चर के प्रति बच्चों को सजग रखने के टिप्स

ये रिसर्च हमें बताता है की किस तरह से हमारे आस-पास की चीजें , हमारा कल्चर बच्चों को प्रभावित करता है .ऐसे में बच्चों को हमारे कल्चर से जोड़े रखना जरुरी हो जाता है . इन टिप्स से ये काम और भी आसान हो जाता है :

  • उन्हें दूसरे बच्चों के साथ रहने का मौक़ा दें : शिशु निडर होते हैं और इसी कारण वो किसी भी बच्चे से आसानी से घुल-मिल जाते हैं . इससे उन्हें पता चलता है की वो उन लोगों से भी मिलता है जो उससे अलग दिखते हैं , उससे अलग कपडे पहनते हैं, उनसे अलग भाषा बोलते हैं .
  • सभी संस्कृतियों के पर्वों को मनाएं : क्रिसमस हो या ईद या हो दीवाली हर पर्व को उल्लास के साथ मनाएं . हर पर्व से जुडी कहानियां बच्चे को सुनाएं . आपको उनके समझने की शक्ति पर आश्चर्य होगा .
  • उन्हें सवाल पूछने के लिए प्रेरित करें : जब भी आप उन्हें कोई कहानी सुनाएं या नए त्योहार मनाएं तो उसे उसके बारे में सवाल करने के लिए प्रेरित जरुर करें .

संस्कृति को पहचानने वाला और उससे जुड़े हुए बच्चे न सिर्फ समाज को अच्छे से समझते हैं बल्कि उसके बारे में सकारात्मक रवैया भी रखते हैं जो उनके भविष्य के लिए बेहतर है .

इस आर्टिकल के बारे में अपने सुझाव और विचार कॉमेंट बॉक्स में ज़रूर शेयर करें  

HindiIndusaparent.com   द्वारा ऐसी ही और जानकारी और अपडेट्स  के लिए  हमें Facebook पर  Like करें