एक विश्वासपात्र बेटी का पालन पोषण कैसे करें ?

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आज से पहले लड़किओं को पढने और मनचाहा काम करने की आजादी उतनी कभी नहीं मिली जितनी आज है . लेकिन इस आज़ादी के साथ कई चुनौतियां भी हैं . महिला सशक्तिकरण आखिरकार सफल हो रहा है और लड़कियां हर वो काम कर सकती हैं जो वो चाहती हैं . इस नयी जिम्मेदारी के साथ बड़ी होती आपकी बेटी के प्रति माँ बाप की जिम्मेदारियां भी बढ़ जाती हैं . यहाँ माता पिता की भूमिका शुरू होती है ओने बेटी के आत्म-विश्वास को बढाने की जिससे वो हर काम पूरी लगन के साथ कर सके .

आपकी छोटी बच्ची हो सकता है की बहुत समझदार, विद्वान हो लेकिन उसे एटीएम-विश्वास से भर देना उसके भविष्य को उज्जवल करने जैसा है  . अपने बेटी को मजबूत बनाने के लिए इन बिन्दुओं पर ध्यान दें ताकि आपनी बेटी किसी भी तरह के चुनौतिओं का सामना कर सके .

उसे उसके दिलचस्पी के हिसाब से आगे बढने दें

उसकी पसंद का ख्याल रखें और उसे अपनी पसंद पर कायम रहने दें ताकि वो अपने पसंद को लेकर पैशनेट हो सके . उसे उसकी दिलचस्पी के हिसाब से आगे बढ़ने देने से वो अपने जीवमं में बहुत अच्छा करेगी और मन से करेगी . उसे नयी चुनौतियाँ दें और उसे आत्म-विश्वास को बढाने में मदद करें .

फैसले लेने में उसे शामिल करें

वो एक बच्ची है और एक माता पिता के हैसियत से अओका कर्तव्य है की आप उसे सही दिशा में सोचना और काम करना सीखाएं . लेकिन उसे विश्वास दिलाने के लिए जरुरी है की आप उसके जीवन से जुड़े फैसले लेने में उसकी मदद करें और उसे भी इन फैसलों में शामिल करें .

इसकी शुरुवात बहुत छोटे स्तर से की जा सकती है जैसे की उसे उसके मनपसंद के कपडे चुनने देना, उसे उन कामों में शामिल होने देना जो उसे पसंद है .

उसे स्वीकारात्मक होना सीखाएं

छोटी उम्र में अपने लिए कदम उठाना और अपने पैरों पे खड़े होने से उसे जीवन भर का भरोसा और विश्वास हासिल होता है .वो अपने फैसलों पर टिकी रह सकेगी, अपने फैसले खुद कर सकेगी यहाँ तक की आपसे गुस्सा या नाराज़ होने पर वो आपको बता भी सकेगी .

src=http://hindi admin.theindusparent.com/wp content/uploads/sites/10/2016/03/dreamstime m 5407866.jpg एक  विश्वासपात्र बेटी का पालन पोषण कैसे करें ?

उसे बताएं की वो कुछ भी हासिल कर सकती है

अपनी बेटी को बार बार बताएं की आप उसमे विश्वास रखते हैं और वो हर चीज़ हासिल कर सकती है जो वो सोचती है . आपका उसमे ये विश्वास उसके अपने अन्दर के विश्वास को जगायेगा .

एक सकारात्मक आइना बनें

आपकी बेटी आप क्या कर रहे हैं उससे बहुत कुछ सीखती है . बचपन में उसके अपने प्रति विचार इस बात पर निर्भर करेंगे की अप उसके बारे में क्या सोच रखेते हैं या आप उसे कितने अच्छे से समझते हैं .

उसे अपनी समस्याएं खुद सुलझाने दें

बेटी के समस्याओं को उसे खुद सुलझाने दें और अप उसमे मदद न करें . इससे आपकी बेटी उन गुणों को या तरीकों को अपनाना शुरू कर देगी जिससे वो समस्याओं को खुद सुलझा सके और ये उसके आत्म-विश्वास के लिए और भविष्य में उसके जीवन के लिए बहुत ही अच्छा साबित होगा .

उसे खेलने दें, गिरने दें

बाहर खेलने से , पेड़ पर चढने से, बाहर कैम्पिंग करने से चोट लगने और सँभालने से आपकी बेटी को उसके शरीर की शक्ति का पता चलता है और उसे अपने बारे में और बेहतर जानने ला मौका मिलेगा .इससे उसका न सिर्फ शारीरिक वल्कि मानसिक विकास भी होगा .

गुडिया आदि जैसे खिलौनों से थोडा ब्रेक दें

गुलाबी सिर्फ लड़किओं के लिए नहीं है उसी तरह जैसे नीला रंग केवल पुरुषों के लिए नहीं है . परिओं की कहानियाँ, सपनों का राजकुमार , गुड़ियों का खेल आदि उसे एक अलग ही दुनिया में बाँध के रख सकते हैं इसलिए जरूरत से ज्यादा उसे इस माहौल में न रखें . वो खुबसुरत दिखने के अलावा भी बहुत कुछ कर सकती है .

उसकी भावनाओं की कद्र करें

जरुरी नहीं है आप हमेशा उससे सहमत हों लेकिन आपकी बेटी को आपपर इतना भरोसा जरुर होना चाहिए की जरूरत पड़ने पर वो आपको अपने मन की बात बेहिचक बता सके . आपको अपने मन की बात कहने से उसकी भावनाएं व्यर्थ नहीं होंगी और उसे अच्छा महसूस होगा .

वो जैसी भी है अच्छी है

दुनिया में महिलाओं के लिए सुन्दरता के अलावा भी बहुत से लक्ष्य हैं . इसलिए इससे पहले की वो सुन्दर दिखने में अपना समय गंवाएं उसे अपने आप से प्यार करना सीखाएं . उसे जो है उसमे संतुष्ट रहना और अपनी खुद की इज्ज़त करना सीखाएं . और आप भी उसे उसके असली रूप रंग और स्वभाव में ही पसंद करें जिससे उसका आत्म-विश्वास बहुत ज्यादा बढेगा . उसे अच्छा दिखना और अच्छा खाना सीखाएं .

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ईमानदारी से उसकी तारीफ़ करें

जरुरी नहीं है की आप हमेशा उसकी तारीफ़ करें और वो जो करे उसे पसंद करें . लेकिन हाँ जब भी वो कोई अच्छा काम करे तो उसकी तारीफ जरुर करें और उसका हौसला बढायें

पढ़ाई जरुरी है

आपकी बेटी खेलने में या ड्रामा करने में या किसी और कला में माहिर हो सकती है लेकिन इसका ये मतलब कतई नहीं है की उसका ध्यान पढ़ाई से हटे, उसकी पढ़ाई में , स्कूल में, उसके असाइनमेंट में आप भी रुचि लें और उसका साथ दें .

कड़ी मेहनत का फल हमेशा मिलता है

कोई काम कठिन होने के वजह से उसे भागना न सीखायिएँ . उसके होमवर्क करने में उसकी मदद जरुर करें लेकिन उसे कभी उत्तर न बताएं . उसे खुद ही इनका हल निकालने को कहें . हो सकता है की वो काम को बभूत अच्छे से न करे लेकिन जो भी हगे उसे उसकी अपनी मेहनत से हासिल करने दें .

उसे जिम्मेदारी दें

उसे कोई ख़ास काम करने के लिए दें और उसे इसकी जिम्मेदारी का एहसास करायें . चाहे वो काम कितना ही आसान हो उसे इसकी महत्ता सम्झायेइओन और पुरे मन से काम करने के लिए कहें . उसे अपने घर में इधर उधर पड़े खिलौनों को ठीक करने के लिए कहें साथ में बैठा कर हफ्ते भर के सामान आदि की लिस्ट तैयार करने के लिए कहें .

उसे सेक्सिस्म के लिए तैयार करें

अपनी बेटी को मीडिया आदि से तब तक दूर रखें जब तक वो खुद के सोच और विचार से और अनुभवों से सीखना शुरू नहीं कर देती .उसे उसकी सुन्दरता पर खुद की तारीफ़ करना सीखाएं ओनी इज्ज़त करना सीखाएं ताकि बाहर की दुनिया के सेक्सिस्म के लिए वो तैयार हो सके .

सकारात्मक महिला रोल मॉडल

छोटी उम्र से ही उसे मजबूत और सशक्त महिलाओं को अपना रोल मॉडल बनाने दें . ये रोल मॉडल कोई खिलाड़ी, कोई बिज़नसवीमेन, डॉक्टर या कोई एक्ट्रेस भी हो सकती है .उसे सशक्त महिलाओं के बारे में पढने दें , उनकी फिल्में देखने दें .

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