क्या मेरे बच्चे को चेचक है ?

 

परिभाषा

चिकन पॉक्स एक बहुत तेजी से फैलने वाली एक संकर्मित बिमारी है जिसमे शरीर पर रशेस हो जाते हैं जो धब्बों की तरह दीखते हैं . ये करीब 5 से 10 दिनों तक रहता है .

चिकन पॉक्स के लक्षण 

कुछ दिनों तक रहने वाले चिकन पॉक्स की शुरुवाती लक्षण इस प्रकार हैं .

  • 38.3 से 38.8 डिग्री सेल्सियम तक बुखार
  • सर दर्द
  • गले में खरास
  • पेट में ऐंठन
  • स्वाद न ले पाना
  • बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस करना

इसके बाद चेहरे, पेट और पीठ पर लाल धब्बे और रेषेस बनने शुरू हो जाते हैं जिनमे भुत खुजली होती है .इसके बाद ये शरीर के दुसरे हिस्सों में फैलना शुरू हो जाता है जैसे की मुह, सर,हाथ पैर आदि .

चिकन पॉक्स में होने वाले रेशेस के तीन स्तर होते हैं

  • ये रेशेस किसी फुंसी या कीड़े के काटने जैसे दीखते हैं . ये त्वचा से ऊपर उठे हुए होते हैं और ज्यादातर गुलाबी या लाल रंग के होते हैं
  • अगले 2 से 4 दिनों में ये एक समूह में दीखने शुरू हो जाते हैं . अब ये किसी बड़े ब्लिस्टर की तरह दिखने लगते हैं जिसकी दीवार बहुत पतली होती है और उनके अंदर तरल पदार्थ भरा होता है .
  • जब ये दीवार टूटती है तब ये एक क्रस्ट जैसे बन जाते हैं और सूखने के बाद दाग रह जाता है

चिकन पॉक्स के सभी लक्षणों में रेशेस का होना सबसे ज्यादा समस्या देता है क्योंकि इनमे खुजली होती रहती है . ये तीनो स्तर ( बम्प, ब्लिस्टर, और सूखना ) शरीर में बारी बारी से होते हैं .

 

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कारण

चिकन पॉक्स वरिसल्ला जोस्टर नाम के वायरस के कारण फैलता है .

फैलना

चिकन पॉक्स बहुत ज्यादा तेज़ी से फैलता है . ये व्यक्ति के छींकने तक से हवा के माध्यम से फ़ैल जाती है .ये थूक या ब्लिस्टर के अन्दर भरे तरल पदार्थ से संपर्क में आने से भी फैलता है .बच्चे को चिकन पॉक्स कितने दिन तक रहेगा ये उसके लक्षणों पर निर्भर करता है  .

बच्चा वापस स्कूल कब जा सकता है ?

दुसरे बच्चों के स्वास्थ्य और देहात का ख्याल रखते हुए संक्रमित बच्चे को घर में ही रखें . उसे स्कूल तभी भेजें जब उसके सभी ब्लिस्टर सूख गए हों .

रिस्क फैक्टर

  • वो जो पहले कभी इस वायरस के संपर्क में नहीं आये हैं
  • वो जिन्होंने चिकन पॉक्स से बचाव का टीका नहीं लगवाया
  • गर्भवती महिलाओं को इससे खतरा हो सकता है
  • ये प्रतिरोधक क्षमता को खत्म कर देता है जिससे किसी बिमारी का इलाज़ करवा रहे व्यक्ति को बहुत समस्या हो सकती है
  • वो जो किसी कारण स्टेरॉयड ले रहे हैं

जटिलताएं

  • एक्जिमा : चिकन पॉक्स के कारण त्य्वाचा में आये बदलाव के कारण प्रतिरोधक क्षमता कम होने से बच्चे को रेशेस होने ल्ह्गते हैं .
  • बच्चे ले हड्डियों,जोड़ों, और त्वचा में में बैक्टीरियल संक्रमण हो सकता है
  • एक गर्भवती महिला को अगर चिकन पॉक्स हो जाए तो उसके बच्चे पर ख़तरा मंडराना शुरू हो जाता है . बच्चा विरूपित या कई तरह के जटिलताओं के साथ पैदा हो सकता है
  • चिकन पॉक्स वाले बच्चे में शिंगल हिने की समभावना बढ़ जाती है जो ज्यादातर उम्रदराज लोगों में ही होती है . हो सकता है की चिकन पॉक्स का वायरस बच्चे के नर्वस सिस्टम में हमेशा के लिए रह जाए चाहे आपका बच्चा ठीक हो जाए तब भी .
  • निमोनिया
  • इन्सेफेलाइटिस जिसमे दिमाग में बैक्टीरियल इन्फेक्शन के कारण सुजन हो जाती है .
  • टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम
  • Reye’s syndrome

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डॉक्टर को कब बुलाएं

जब बच्चे को चिकन पॉक्स के ये लक्षण दिखने लगें :

  • 38.8 डिग्री सल्सिउस से ज्यादा का बुखार 4 दिन से ज्यादा से हो
  • सांस लेने में तकलीफ
  • खांसी और कफ़
  • शरीर में रेशेस का हो जाना या सूज जाना
  • चलने में परेशानी
  • सर में दर्द का होना
  • खुद को कई बार असमंजस में पाना
  • तेज़ रौशनी को न झेल पाना
  • जल्दी न उठाना या हमेशा नींद आते रहना
  • गर्दन में अकडन
  • उलटी होना

अगर आप डॉक्टर को बुलाएं तो उस एबता दिएँ की बच्चे को चिकन पॉक्स  है ताकि वो दूसरों को फैलने न दें .

जांच और इलाज़

डॉक्टर रेशेस से चिकन पॉक्स  का पता लगा सकते हैं . इससे ज्यादा किसी जांच की जरुरत हो तो लैब में टेस्ट करवाया जा सकता है .

इलाज़ और दवाइयां

एंटीबायोटिक इस वायरस का कुछ नहीं बिगाड़ सकता . इसकी जरूरत केवल तब पडती है जब बैक्टीरियल इन्फेक्शन हो . बैक्टीरिया तभी पनपते हैं जब खुजलाते हुए ब्लिस्टर को आप फोडें . एंटीवायरल दवाइयां उन लोगों को डी जानी चाहिए जिन्हें इससे बहुत ज्यादा परेशानी हो रही हो .

 

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घरेलु नुस्खे

ये बिमारी रेशेस और बुखार के कारण असहनीय हो जाता है . ये वो कुछ बातें हैं जिनका आप ध्यान रख सकते हैं :

  • गुनगुने पानी से स्पंज से नहायें .पानी को गरम करते समय उसमे अमरुद के पत्ते डाल दें .हर तीन चार घंटे में एक बार बच्चे को इसी तरह साफ़ करें .इससे खुजली कम होती है .
  • एक साफ़ तौलिये का इस्तेमाल करें और शरीर पर इसे रगड़े नहीं .
  • खुजली से बचने के लिए कैलामिन क्रीम का इस्तेमाल करें लेकिन चेहरे और आँखों के पास लगाने से परहेज रखें .
  • ठन्डे आहार खिलायें जैसे योगर्ट, आइस क्रीम, फल का जूस आदि
  • मुलायम खाना दें जैसे केला, अर्रोज़, कालदो, आदि जिससे बच्चे को चबाने में परेशानी न हो
    • बच्चे का मुह खट्टा हो जाए तो उसे ब्लांड आहार दें
    • बच्चे नमकीन या एसिडिक पदार्थ खाने को न दें
  • उसे  acetaminophen दें जो उसके मुह के भीतर होने वाले दर्द से आराम देगा . बछे को एस्पिरिन न दें

 

गुप्तांगों में लगाने के लिए कौन सी क्रीम का इस्तेमाल हो इसकी जानकारी डॉक्टर से ले लें . बच्चे को खुजलाने से बचने को कहें . बच्चे के नाखूनों को नियमित रूप से काटें ताकि किसी तरह की बैक्टीरियल इन्फेक्शन न हो .

बचाव

टीकाकरण से बच्चे में चिकन पॉक्स होने की संभावना बहुत कम हो जाती है . या अगर कभी हो भी जाए तो जल्दी ठीक हो जाती है .

  • इंजेक्शन की अवधि है : जब बच्चा 12 से 15 महीने का हो . इससे पहले 4 से 6 वर्ष की उम्र में बूस्टर शॉट भी लेने होते हैं
  • 13 साल से ऊपर के लोग जिन्होंने पहले टीकाकरण नहीं करवाया है उन्हें 28 दिन के अंतराल में 2 बार टीकाकरण करवाना चाहिए .

बिमारी को फैलने से रोकने के लिए :

  • नियमित रूप से हाइजीन यानी साफ़ सफाई का पूरा पूरा ख्याल रखें . हाथ अच्छे से धोएं
  • चिकन पॉक्स हुए बच्चे को दूसरों के संपर्क में न आने दें
  • बच्चे का ध्यान रखने वाले व्यक्ति से मास्क इस्तेमाल करने और कमरे से बार आने के बाद हाथ धोने को कहें

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