भारत में Cesarean section की संख्या बहुत बढ़ी है .जानिये क्यों ?

27 साल की कीर्ति गुनेजा दिल्ली की रहनेवाली हैं जिन्होंने हाल ही सिजेरियन सेक्शन के जरिये अपने बच्चे की डिलीवरी करवाई है. गुनेजा को श्रम कक्ष में बताया गया की गर्भ के अन्दर बच्चा घूम गया है जिसका मतलब था की बच्चे का पैर आदि पहले बाहर आते . इसी आपात स्थिति में डॉक्टर ने सर्जरी के द्वारा एक स्वस्थ बच्चे की डिलीवरी की .

QZ द्वारा दी गयी 2014 के रिपोर्ट से पता चलता है 2010 के बाद से सिजेरियन सेक्शन के द्वारा डिलीवरी करवाने की संख्या में साधे आठ फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है और आज ये 41 फीसदी होने वाला है .

वेल वीमेन क्लिनिक गुद्गोँ की डायरेक्टर और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ नुपुर गुप्ता बताती हैं हर साल भारत में सिजेरियन सेक्शन के द्वारा डिलीवरी की दर 15 -20 फीसदी है जो डब्लू.एच.ओ के मानक से कहीं ज्यादा है . तो ये प्रक्रिया है क्या और कैसे काम करती है ?

परिभाषा

सिजेरियन सेक्शन एक सर्जिकल प्रक्रिया है जिसमे पेट और गर्भाशय में चीरा लगा कर बच्चे को बाहर निकाला जाता है . ऐसा तब किया जाता है जब साधारण प्रसव के दौरान कोई नयी समस्या आ जाए .

इस विडियो में उन कारणों के बारे म बताया गया जिनके कारण  सिजेरियन सेक्शन कराने की जरूरत पड़ती हैं . इस विडियो में सिजेरियन सेक्शन सर्जरी के पहेल और बाद में ध्यान रखने वाली बातों का जिक्र किया गया है .

 

सिजेरियन सेक्शन के प्रकार

सिजेरियन सेक्शन दो तरह के होते हैं :

  • तयशुदा सिजेरियन सेक्शन: जब सिजेरियन सेक्शन की प्लानिंग बहुत पहले से की जाती है . इसकी तैयारी गर्भ के 37 या 40वें हफ्ते से की जाती है .
  • आपातकालीन सिजेरियन सेक्शन: किसी आपातकालीन स्थिति में सिजेरियन सेक्शन  का होना इस केटेगरी में आता है . ऐसा अक्सर तब किया जाता है जब बच्चे की हालत खतरे में हो या माँ को कोई गंभीर समस्या होने वाली हो .ऐसी ज्यादातर सर्जरी प्रसव के दौरान ही की जाती है

भारत में सिजेरियन सेक्शन की कीमत

सिजेरियन सेक्शन  की कीमत अस्पताल दर अस्पताल बदलती रहती है . सरकारी अस्पतालों में जहाँ इसकी कीमत 2500 से 10000 तक होती है वही प्राइवेट अस्पतालों में इसकी कीमत 40000 से एक लाख से भी ज्यादा हो सकती है .

सिजेरियन सेक्शन को कब चुनना चाहिए ?

इसकी शुरुवात तभी करवानी चाहिए जब साधारण डिलीवरी आसान न हो या कोई समस्या हो . गर्भावस्था के दौरान इस तरह की कठिनाइयां हो सकती हैं :

  • माँ दो से ज्यादा बच्चे के साथ गर्भवती हो
  • माँ के जेनाईटल हेर्प्स अगर बच्चे में पास हिने कजी सम्भावना हो
  • बच्चे का निचला हिस्सा पहले बाहर आ रहा हो
  • बच्चे के भ्रूण में ही कुछ समस्या हो गयी हो
  • माँ ने अगर पहले भी सिजेरियन सेक्शन करवाया हो

याद रखें की अगर आपको ऊपर बताई गयी समस्याएं नहीं भी हैं त्यों भी आप सिजेरियन सेक्शन  की मदद ले सकती हैं अगर आप चाहें तो . भारत में तो इसकी जरूरत इसीलिए भी पड़ सकती है अगर किसी ख़ास दिन ही बच्चे की डिलीवरी करवानी हो तो .

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मुझे आपात सिजेरियन सेक्शन की जरुरत क्यों पड़ सकती है ?

कभी कभी आप सिजेरियन सेक्शन  नहीं करवाना चाहती हो फिर भी किस न किसी कारण से आपक्लो इस सर्जरी से होकर गुजरना पड़ सकता है . ऐसे कुछ कारण निम्नलिखित हैं :

  • बच्चे को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल रहा हो
  • बच्चे सही अवस्था में न हों
  • लेबर न हो रहा हो
  • अगर माँ 2 से ज्यादा बच्चे को जन्म दे रही हो
  • उम्ब्लिकल कार्ड के साथ कोई समस्या हो
  • जन्म देने के रस्ते में कोई रुकावट हो
  • अगर माँ के शरीर में प्लेसेंटा की कमी हो
  • बच्चा बड़ा हो और उसके निओकलने की जगह बहुत छोटी हो
  • गर्भ के दौरान माँ और बच्चे में कोई परेशानी हो गयी हो
  • बच्चे की धड़कन अगर सामान्य न हो

सिजेरियन सेक्शन से होने वाले रिस्क :

अगर आपने सिजेरियन सेक्शन  की प्लानिंग पहले से कर रखी हगे तो आपको कुछ सावधानियां बरतनी होगी जिससे ये प्रक्रिया बिना किसी परेशानी के आसानी से पूरी हो जाए .हालांकि किसी भी दुसरे सर्जरी की तरह सिजेरियन सेक्शन के भी ओपने रिस्क हैं . जानिये क्यों ? :

बच्चे में समस्या

  • नवजात को सांस लेने की समस्या का होना: कई अध्ययन बताते हैं की सिजेरियन सेक्शन के द्वारा होने वाले बच्चों में सांस लेने की स्सम्या हो सकती है खासकर के अगर ये 37 वें या 39 वें हफ्ते में करवाई जाए
  • सर्जिकल इंजरी : हालांकि ये बहुत की विरल स्थिति है जो ज्यादातर नहीं होती है फिर भी हो सकता है की सर्जरी के दौरान बच्चे को कोई चोट लग जाए

माँ के लिए समस्या

  • युटेरिन लाइनिंग में संक्रमण और जलन : इस स्थिति को इंडोमेटरिटिस कहते हैं जहाँ युटेरिन लाइनिंग में संक्रमण हो जाने से दुर्गन्ध आने की समस्या हो जाती है
  • बेहोशी की दवा का रिएक्शन : सर्जरी के दौरान बेहोशी के लिए दिए जानी वाली दवाई से माँ को एलर्जी हो सकती है
  • खून के धत्ते बन जाना : सर्जरी के बाद माँ को खून के धत्ते या खून के जमने की शिकायत हो सकती है . ऐसा जयादातर पैरों में होता है
  • सर्जिकल इंजरी : माँ के गर्भाशय में या ब्लैडर में सर्जरी से चोट लग जाने की समस्या हो सकती है .खास तौर पे तब जब कई सिजेरियन सेक्शन  करवाए गए हों .
  • घाव से संक्रमण : सर्जरी के बाद योनी में घाव हो सकता है जिससे संक्रमण होने की आशंका बढ़ जाती है अगर माँ साफ़ सफाई का ध्यान न रखें तो .ये संक्रमण योनी से होते हुए गर्भाशय तक जा सकती है .

सर्जरी के बाद की सावधानियां

गुडगाँव के वेल वीमेन क्लिनिक की डॉ गुप्ता सर्जरी के बाद के कुछ सावधानियों के बारे में बताती हैं जो की इस प्रकार हैं .

  • धीरे धीरे चलें और सर्जरी के 24 घंटे के भीतर की बाथरूम जाएँ
  • कैथिटर के हटाये जाने के बाद पेशाब करें
  • सर्जरी के बाद के दर्द से निपटने के लिए अपने डॉक्टर से बात करें
  • खून के बहाव पर ध्यान रखें
  • योनी के घाव का ध्यान रखें और उसे सुखा रहने दें
  • भारी वजन आदि उठाने से बचें
  • खूब पानी पियें और पौष्टिक आहार लेकिन जिससे कब्ज की शिकायत न हो
  • साफ़ सफाई का ध्यान रखें
  • डॉक्टर के बताने तक सेक्सुअल एक्टिविटी शुरू न करें

सिजेरियन सेक्शन  के बाडी इस बात का ध्यान रखें की आप अपने शरीर को ज्यादा तकलीफ न दें और आराम करें तथा पौष्टिक आहार लेती रहे .

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