जब आप बीमार हों तब breastfeeding कराने के 5 tips

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अगर आप किसी भी समस्या के वजह से बच्चे को स्तनपान करा पाने में असमर्थ हैं तो एक्सपर्टस द्वारा दिए गये इन चेकलिस्ट को जरुर जांचें

इस साल जनवरी में 29 साल की मधु नय्यर ने साउथ दिल्ली के एक अस्पताल में जुड़वे बच्चों को जन्म दिया 

इसके एक महीने बाद उन्हें अपने बायें स्तन से स्तनपान कराना बंद करना पड़ा। उन्होंने बताया “ मेरे बाएं स्तन के ऊपर फोड़े हो गये थे जिस वजह से मुझे बहुत से ब्रैस्टफीडिंग टिप्स की जानकारी लेनी पड़ी और करीब एक महीने लगे दोबारा स्तनपान शुरू करने में।"

नय्यर उन बहुत सी महिलाओं में से एक हैं जिन्हें ब्रैस्टफीडिंग से जुड़ी समस्याएं हो जाती हैं। या हेक्टिक जॉब , अलग लाइफस्टाइल के कारण कुछ ऐसी समस्याएं हो जाती हैं जिस वजह से ब्रैस्टफीड नहीं कर पाते हैं।

मोहाली के फोर्टिस हॉस्पिटल के स्त्री रोग विशेषज्ञ और सीनियर कंसलटेंट डॉ. स्वप्ना मिश्रा के मुताबिक, “अगर माँ एच.आई.वी पॉजिटिव है या उन्हें ट्यूबरक्लोसिस हो या बच्चा समय से पहले जन्मा हो तो ऐसे मामलों में स्तन पर फोड़े आदि होने की संभावना बढ़ जाती है।”

बीमार माँओं के लिए ब्रैस्टफीड कराने के टिप्स

अगर आप किसी भी समस्या के वजह से बच्चे को स्तनपान करा पाने में असमर्थ हैं तो एक्सपर्टस द्वारा दिए गये इन चेकलिस्ट को जरुर जांचें :

अपनी मेडिकल प्रॉब्लम की जांच करवाएं:  अगर आपका बच्चा आपसे दूध नहीं पी रहा है या आप खुद को इसमें असहज महसूस कर रही हैं तो आपको तुरंत किसी डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। ये कई कारणों से हो सकता है जिसमें से आपका खान पान, आपकी लाइफस्टाइल बड़ी मेडिकल प्रॉब्लम जैसे एच.आई.वी आदि भी शामिल है . इन मामलों में दूध के साथ माँ के शरीर से वायरस बच्चे के शरीर में भी जा सकता है।

इसके अलावा अगर माँ एच.आई.वी. के लिए दवाई ले रही है तो उसे स्तनपान कराने से बचना चाहिए। इसके अलावा दूसरी बात हो सकती है जब बच्चा समय से पहले ही जन्म ले ले। ऐसे बच्चों की ज्यादातर वजन 2 किलो से भी कम होती है, ऐसे में बच्चे माँ का दूध नहीं पी पाते हैं। कम से कम 30 हफ़्तों के बाद ही बच्चा दूध पी पाता है . इसके अलावा ट्यूबरक्लोसिस की जांच करवानी भी जरुरी हो जाता है। ऐसे मामलों में बच्चे को माँ से दूर रखना ही बेहतर होता है।

सामान्य ब्रैस्टफीडिंग की चुनौतियों का पता लगायें : कई माँएं खट्टे निप्पल, कम दूध का आना, या ज्यादा दूध का आना, एन्गोर्गेमेंट, निप्पल का फ्लैट हो जाना या बड़े हो जाना जैसी समस्यायों का शिकार हो जाती हैं। फोर्टिस माम्मामिया दिल्ली के लैकटेशन काउंसलर और चाइल्ड बर्थ एजुकेटर डॉ अनीता शर्मा बताती हैं “कीमोथेरेपी , साइकोथेरेपी आदि के समय भी स्तनपान कराने की मनाही हो सकती है इसीलिए सलाह जरुर लें "

पता लगायें की नर्सिंग स्ट्राइक क्यों है ?:   आपका बच्चा चार महीने से स्तनपान कर रहा था और अचानक फिर उसने स्तनपान करना छोड़ दिया। इसका मतलब ये है की बच्चा आपको बताने की कोशिश कर रहा है की कुछ तो गड़बड़ है। हो सकता है की आप किसी मेडिकल प्रॉब्लम की शिकार हों या बच्चे के दांतों में दर्द हो , कोई फंगल इन्फेक्शन हो, बच्चे को ठंड लग गयी हो, स्तनपान कराते समय दर्द होता हो, जुकाम हो,या दूध कम बन रहा हो ऐसे मामलों में आप पहले की ही तरह स्तनपान जारी रख सकती हैं। हर बार नए पोजीशन में स्तनपान कराने की कोशिश करें।

जांच करें की क्या आपके बच्चे ने आपकी मेडिकल से जुड़ी समस्या को कॉन्ट्रैक्ट किया है ? : कई मेडिकल कंडीशन बच्चों के लिए अच्छी नहीं होती हैं खासकर के जब बच्चा समय से पूर्व जन्मा हो। इन मेडिकल प्रॉब्लम में जौंडिस, रिफ्लक्स की बीमारियाँ, कम वजन का होना आदि हो सकते हैं। कई बार माँ के शरीर का संक्रमण दूध के द्वारा बच्चे में भी फैल सकता है जिस कारण समस्या और भी गंभीर हो सकती है।

स्वस्थ खाना खाएं और नियमित एक्सरसाइज करें : ये कई बार बताया जाता है लेकिन जरुरी है की एक बार फिर से बताया जाए। स्तनपान कराने वाली माँ का स्वस्थ होना न सिर्फ उसके लिए बल्कि बच्चे के लिए भी अतिआवश्यक है। डॉ. मिश्रा के मुताबिक़ ये एक जाँची और परखी बात है की आप जितना स्वस्थ खाना खाएंगी आपके बच्चे की सेहत भी उतनी ही तंदरूस्त होगी।

तो अगर आपको नर्सिंग से दूर रहने को कहा गया है तो इन टिप्स का ध्यान जरुर रखें। हालांकि ये भी न भूलें की स्तनपान आपके बच्चे के विकास में सबसे अहम भूमिका निभाता है इसीलिए अगर आपका स्तनपान करा पाना मुश्किल हो तो इसका कोई न कोई उपाय जरुर करें।

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