बच्चों में Autism होने के 5 Signs

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हम एक सकारात्मक जीवन जीते हैं और सोचते हैं की हमारे बच्चे को कभी कुछ नहीं हो सकता लेकिन इससे बेहतर है की थोड़ी बुद्धिमानी दिखायें और बुरे वक़्त के लिए पहले से तैयार रहें .

बच्चों में आटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर का हो सकता है शुरू-शुरू में पता न लगे क्योंकि इसके संकेतों की पहचान कर पाना बहुत कठिन होता है . रिपोर्ट बताते हैं की भारत में करीब 1 करोड़ बच्चे आटिज्म का शिकार हैं . लेकिन सबसे पहले आइये जान लेते हैं की आटिज्म आखिर है क्या ?

आटिज्म एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है जो ज्यादातर बच्चों में शुरू के ही तीन साल में दिखने लगता है .आटिज्म से ग्रसित बच्चों में तीन तरह के विकास बहुत धीमी गति से होते हैं जिन्हें ट्रायड ऑफ़ इम्पैरमेंट कहते हैं. ये इस प्रकार के हो सकते हैं :

  • वर्बल या नॉन वर्बल कम्युनिकेशन
  • सोशल इंटरेक्शन
  • इमेजिनेशन

हालांकि हर बच्चा अपनी गति से विकास करता है लेकिन अगर 6 महीने का बच्चा पलट न रहा हो या 2 साल की उम्र तक न चल पा रहा हो तो बच्चे को आटिज्म या अन्य कोई और समस्या भी हो सकती है . इसी तरह से कुछ बच्चों में रोजाना की आवाज़ या नए लोगों के छूने से समस्या हो सकती है . हम जानते हैं की इसे हैंडल करना मुश्किल है लेकिन शुरू में ही ध्यान देने से इलाज सही दिशा में जा सकती है और बच्चा एक साधारण जीवन जी सकता है .

ये हैं बच्चों में आटिज्म के शुरुवाती लक्षण :

1. डिलेड माइलस्टोन

आटिज्म के सबसे बड़े संकेत हैं डिलेड माइलस्टोन . 6 महीने के बच्चे को मुस्कराना आना चाहिए , उँगलियाँ पकड़ना आना चाहिए यहाँ तक की आवाज़ पर प्रतिक्रिया भी देना आना चाहिए .जिन बच्चों को आटिज्म की परेशानी होती है वो ऐसा करने में कठिनाई महसूस करते हैं .

2.अपना नाम न पहचानना

जिन बच्चों में आटिज्म की समस्या होती है वो अपना नाम पुकारे जाने पर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं देते हैं .

3.आई कांटेक्ट न बना पाना

आटिज्म से ग्रसित बच्चे आँख नहीं मिला पाते हैं जो उनमे आत्मविश्वास की कमी को दर्शाता है .

4.बुदबुदाने में भी समय लगना

आटिज्म से ग्रसित बच्चे बच्चों जैसी आवाजें भी निकाल पाने में असमर्थ होते हैं.

5.एक दिनचर्या को फॉलो करने की आदत

जिन बच्चों में आटिज्म की समस्या होती है वो एक ख़ास पैटर्न या दिनचर्या का पालन करते हैं . और अगर ये पैटर्न टूट जाए तो उन्हें बहुत ज्यादा दुःख होता है . जैसे हो सकता है की वो एक ही समय खाना, नहाना या सोना चाहते हों लेकिन अगर ऐसा न हो तो वो गुस्सा हो जाएँ या रोने लगें

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