अनंत अम्बानी में इतने बड़े बदलाव के पीछे हैं उनकी माँ नीता अम्बानी

 

अनंत अम्बानी हाल ही में मोटापे और बढ़ते वजन से एक जंग जीतकर आये हैं ।और ये सब हो पाया उनकी मेहनत लगातार एक्सरसाइज और उनके प्रेरणा श्रोत नीता अम्बानी के कारण । जानिये आप भी कैसे अपने बच्चे को उसके मंजिल तक पहुंचाने में मदद कर सकते हैं ।

नीता अम्बानी के सबसे छोटे बेटे अनंत अम्बानी के शारीरिक बदलाव ने इंटरनेट पर धूम सी मचा दी है । उन्होंने 18 महीने में ना सिर्फ 108 किलो वजन कम किया बल्कि ये भी साबित कर दिया की चाहे आपके पास कितनी भी दौलत या शोहरत हो आप अगर कुछ ठान लें तो है नामुमकिन काम मुमकिन हो सकता है।
भारत के सबसे अमीर सख्सियत के बेटे अनंत अम्बानी को क्रोनिक अस्थमा हो गया था जिसका कारण था उनका बढ़ता वजन । बताया जाता है की अनंत ने प्राकृतिक रूप से कड़े डाइटिंग प्लान और रोज 5-6 घण्टे एक्सरसाइज करके ये मुकाम हासिल किया । वो रोज 21 किलोमीटर की वॉक पर भी जाते थे जिसके3 बाद योगा, कार्डियो और वेट ट्रेनिग भी करते थे। इसके अलावा उन्होंने जीरो शुगर, कम कार्बोहायड्रेट डाइट, सही प्रोटीन और सही मात्रा में फैट खाना शुरू किया ।
सही मायनों में प्रेरणा श्रोत - नीता अम्बानी

टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपे एक इंटरव्यू में उनसे उनके वजन कम करने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने बताया " अनंत के अलावा मेरी प्रेरणा कोई और नहीं था । वो मोटापे का शिकार है, उसे अस्थमा है जिस वजह से हमें उसे बहुत सारे स्टेरॉयड पर रखना पड़ता था । अपने आप को स्वस्थ करने में लिए उसे ओन वजन घटाना ही था।  एक बच्चा वही करता है जो उसकी माँ करती है इसीलिए खुद खाना खाते हुए मैं उसे डाइटिंग पर कैसे रख सकती थी । इसीलिए अनंत के साथ मैंने भी डाइटिंग शुरू की । उसने जो भी खाया मैंने भी वही खाया ।

वो जब भी एक्सरसाइज करता, मैं भी उसके साथ एक्सरसाइज करती। अगर वो वॉक पर जाता था तो मैं भी उसके साथ हो लेती थी । इसी कारण मेरा वजन भी घाट गया । वो मेरा प्रेरणा श्रोत रहा और हमेशा रहेगा क्योंकि हम आज भी मोटापे के खिलाफ एक लड़ाई लड़ ही रहे हैं ।देश में कई बच्चे हैं जिन्हें ये प्रॉब्लम है लेकिन माएँ इसे स्वीकारने में शर्माती हैं। लेकिन मुझे लगता है की आपको अपने बच्चे को वजन कम करने के लिए प्रेरित करना चाहिए । हम कुछ दिन के लिए लॉस एंजेल्स में चिल्ड्रन ओबेसिटी हॉस्पिटल गए जहाँ से रूटीन बनवाया गया । मुझे लगता है की यही वो कारण है की मैं पहले जो थी वहां से आज ये बन पायी हूँ । "

यंगेस्ट अम्बानी ने आओनी घटे हुए वजन के साथ साथ अपना 21 वां जनदिन भी मनाया । कई हस्रियों ने उसमे आये इस बदलाव को सराहा और तारीफ भी की । अनंत से मिलने के बाद सलमान ने ट्वीट किया "अनंत से मिलकर बहुत अच्छा लगा, मैं उसके लिए बहुत खुश हूँ, 18 महीने में 108 किलो वजन कम करने के लिए बहुत बड़ा जिगरा चाहिए।"

पॉलिटिशियन राजीव शुक्ला ने ट्वीट किया " अनंत अम्बानी के साथ उनके 21वें जन्मदिन पर । बिना किसी सर्जरी के उन्होंने 18 महीने में 108 किलो वजन कम किया है सिर्फ अपनी हिम्मत के दम पर।"

धोनी ने भी अनंत के साथ अपनी फ़ोटो ट्वीट करते हुए लिखा " जन्मदिन मुबारक अनंत। तुम्बे अपने आप को एक बहुत सुन्दर तोहफा दिया है 100 से ज्यादा किलो वजन घटा कर। अनुशासन और हिम्मत।"

अनंत अम्बानी ने ये साबित कर दिया है की हौसला और हिम्मत हो तो कुछ भी किया जा सकता है ।

तो आप अपने बच्चों को उसकी मंजिल तक पहुंचाने में कैसे मदद करते हैं ? क्या सच में कली मैजिक फार्मूला है ?पेरेंट्स होने के नाते हम सिर्फ बच्चों को प्रेरित कर सकते हैं उनकी मंजिल की तरफ बढ़ने के लिए । लेकिन कई तरीके हैं जिससे वो सफल हो सकते हैं ।
  • रीयलिस्टिक लक्ष्य निर्धारित करें : सबसे अच्छे लक्ष्य वो होते हैं जो उम्मीद से ऊपर तो हों लेकिन फिक्स हों और हासिल किये जाने लायक हों । उनके साथ उनके लाइफ में उनके लक्ष्यों के बारे में बात करें । जैसे " मैं डॉक्टर बनना चाहता हूँ", "मैं बिजनेसमैन बनना चाहता हूँ" आदि । उनकी मदद करें उन्हें इस लक्ष्य को हासिल करने में ।
  • checkpoints सेट करें : एक बार आपने लक्ष्य तय कर लिया तो उनके लिए चेकपोइंट्स बना लें । जैसे मान लीJइये की उन्हीने कोई टेस्ट पास किया तो आप उसे बाहर कहीं डिनर पर ले जा सकते हैं । इससे उन्हें औने अचीवमेंट को पाने की प्रेरणा मिलती रहेगी।
  • family plan तैयार करें : आप अपने बच्चे को बता सकते हैं की अगर उन्होंने कोई एक लक्ष्य पूरा कर लिया , जैसे अगर वो डॉक्टर बन गए तो पुरे परिवार पर कितना असर पड़ेगा, उससे बात करें की आप उनके लक्ष्य को याने में उनकी क्या मदद कर सकते हैं । इससे एक टीमवर्क की तरह काम करने का मज़ा आएगा ।
  • unrealistic लक्ष्यों से मुँह न मोडें : अगर कोई लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता तो बच्चे को एक नया गोल बना कर दें जिसे वो हासिल कर पाये । इससे उन्हें पता चलेगा की वो क्या कर सकते हैं और क्या नहीं।  इससे उन्हें पता लगेगा की जिस काम को वो पहले नहीं कर पा रहे थे उसे अब कैसे कर पा रहे हैं ।

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