अब दिल्ली में आया ह्यूमन मिल्क बैंक

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जो माएँ बच्चों को स्तनपान नहीं करवा पाती हैं उनके लिए एक खुशखबरी है । दिल्ली के फोर्टिस ला फेमे ने ब्रैस्ट मिल्क फाउंडेशन के साथ मिलकर दिल्ली एनसीआर का पहला pasteutised ह्यूमन मिल्क बैंक "अमारा" की शुरुवात की । ये पहल डब्लूएचओ के मिलेनियम डेवलपमेंट गोल के तहत किया गया है जिसमे शिशुओं के म्रत्यु दर को कम करने की बात की गयी है। डब्लूएचओ और यूनाइटेड नेशन चिल्ड्रन फण्ड ने ये तय किया था की जिन बच्चों को माँ का दूध नहीं मिल पाता है उनके लिए बेस्ट फीड माँ का दूध ही है जो किसी दूसरी स्वस्थ माँ से भी हो सकता है ।
भारत में कम वजन के बच्चों के जन्म लेने और नियो-नेटल मोर्टेलिटी दर सबसे ज्यादा है । 2013 के मुताबिक ये हर 1000 में से 28 की दर पर है । भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी की गयी वार्षिक रिपोर्टीटी के मुताबिक भारत में शिशु की मोर्टेलिटी रेट श्रीलंका, चीन और नेपाल से भी ज्यादा है । (चीन में 1000 पर 31, नेपाल में 1000 पर 31, श्री लंका में 1000 पर 12 और भारत में 1000 पर 40)
इन बच्चों को ह्यूमन ब्रैस्ट मिल्क देने से नियो मोर्टेलिटी रेट में जरूर कमी आएगी। "भारत में इसके अपने कुछ ख़ास स्वास्थ्य समस्याएं हैं और इनमे से समय से पहले प्रसव और कम वजन के बच्चों का जन्म लेना आम बात है । इन बच्चों को ब्रैस्ट मिल्क का मिलना इनमे होने वाले इन्फेक्शन से इन्हें बचा सकता है । माँ की फिजियोलॉजिकल मज़बूरी को देखते हुए ह्यूमन मिल्क बैंक्स की महत्ता और भी अधिक बढ़ जाती है।" - भवदीप सिंह, सीईओ, फोर्टिस हेल्थकेयर
फोर्टिस ला फेमे के सीओओ अनिका पराशर बताते हैं, "डोनर मिल्क के बायोएक्टिव तत्व किसी भी फार्मूला मिल्क के मुकाबले बहुत अच्छे क्वालिटी का है । फार्मूला मिल्क से माँ और बच्चे दोनों को कई तरह की गंभीर समस्याएं हो जाती है जिस कारण ह्यूमन मिल्क बैंक का होना और भी जरूरी हो जाता है ।”कई माएँ जो अस्पताल में होती हैं वो बच्चे को दूध पिलाने की स्थिति में नहीं होती हैं । इसके अलावा कई बार माओं का स्वास्थ्य इतना कमजोर हो जाता है की वो जरूरत के हिसाब से दूध बना नहीं पाती हैं । ऐसी सभी महिलाओं के लिए ये pasteurised डोनर मिल्क एक जरुरी पूरक की तरह काम करेगा ।
फोर्टिस ला फेमे के neonatology के डायरेक्टर डॉ. रघुराम मल्लईः बताते हैं "मिल्क बैंक एक परखा हुआ उपाय है जिससे कई बच्चों की ज़िंदगियाँ बचाई जा सकती है । इससे प्री टर्म बर्थ से जुडी विकारता, बीमारियों से जो जानलेवा भी हो सकती हैं, बचा जा सकता है "
ये मिल्क बैंक काम कैसे करेगा ?
फोर्टिस ला फेमे के अमारा मिल्क बैंक में एक बार दूध दान करने के बाद उसकी जांच की जाएगी, उसके बाद उसे pasteurise करके फ्रीज कर दिया जाता है (6 महीने के लिए) और फिर उसे जरूरतमंद नवजात बच्चों को मुहैया कराया जाता है ।ये एक सार्वजनिक मिल्क बैंक है इसीलिए ये हर उस माँ के लिए उपलब्ध है जिन्हें इसकी जरूरत है ।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ह्यूमन मिल्क बैंकिंग 
दुनियाभर में ह्यूमन मिल्क बैंकिंग एक साधारण बात है लेकिन भारत में इसकी पहुँच बहुत कम है और इंडियन अकादमी ऑफ़ पेडियाट्रिक्स के मुताबिक ऐसे केवल 14 बैंक हैं । इसका मुख्य कारण है लोगों में इसकी जागरूकता का न होना ।हालाँकि ऐसी शुरुवात  होने से ह्यूमन ब्रैस्ट मिल्क उन लोगिन तक पहुंच पाएगा जो इस देश के भविष्य हैं ।
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