9 सवाल जो आपको मैटरनिटी लीव लेने से पहले पूछना चाहिए

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कानून बनाने वलों को नए जमाने के हिसाब से मैटरनिटी लीव यानी मातृत्व की छुट्टी पर फिर से विचार करना चाहिए । ये हैं वो कुछ बातें जो आपको अपने HR से पूछने चाहिए ।
2 हफ्ते पहले एक अजीब सी खबर फैली । शिलांग की एक महिला डॉक्टर को गर्भवती होने के कारन नौकरी से हाथ धोना पड़ा । चर्च द्वारा चलाये जा रहे एक अस्पताल में रचएल रापसंग एक दांत के डॉक्टर को कथित रूप से नौकरी से निकाल दिया गया जब उसने 9 महीने की छुट्टी की मांग की । हालांकि अस्पताल के अधिकारियों ने सफाई देते हुए कहा की कॉन्ट्रैक्ट में ऐसी किसी बात का जिक्र नहीं था ।
ऐसी कई गर्भवती महिलाएं हैं जिन्हें मातृत्व की छुट्टी का कानून देश में न होने के कारण नौकरी से हाथ धोना पड़ता है ।

 

श्रुति कक्कर (बदला हुआ नाम) की कहानी कुछ ऐसी ही है । 29 साल की श्रुति पिछले अप्रैल तक मुम्बई के एक टेलीकम्यूनिकेशन कंपनी में काम करती थी । उन्हें अपने 11 माह के बेटी की देखभाल करने के लिए नौकरी छोड़नी पड़ी । उनके मुताबिक ये एक जबरदस्ती लिया गया फैसला था । मुझे 3 महीने की छुट्टी दी जा रही थी लेकिन मुझे 2 महीने और आराम करने की सलाह दी गयी थी इसीलिए मुझे नौकरी छोड़नी पड़ी।

नई माँ बनी राम्या नैयर दिल्ली में मीडिया इंडस्ट्री में काम करती हैं । वो बताती है की गर्भवती होने पर उन्हें नौकरी छोड़नी पड़ी क्यूंकै वो जानती थी की कंपनी उनका इंतज़ार नहीं करेगी । औए उमहि प्रीक्लेम्पसिया की भी समस्या थी ।

 

मैटरनिटी लीव से जुड़े भारत के कानून
हालांकि ज्यादातर कंपनिया नयी माँ बनी महिलाओं को 6 महीने की छुट्टी देती हैं लेकिन भारतीय कानून 1961 का है जो काफी पुराना है ।मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट 1961 एयर 2008 का संशोधित मेटरनिटी एक्ट। दुःख की बात है की दोनों ही कानूनों में 12 हफ्ते छुट्टी की बात की गयी है ।

 

लेखिका और मुम्बई को वकील फ़ज़ा श्रॉफ गर्ग बताती हैं की भारत में कानून पर पुनर्विचार करने की जरूरत है । वो बताती हैं की आजकल लोग एकल परिवार में रहना पसंद करते हैं इसिलोए नए बच्चे की देखभाल करने का समय मिलना ही चाहिए ।

श्रॉफ गर्ग के मुताबिक ऐसे मामलों में छुट्टी हालात को देखकर मिलनी चाहिए । हालाँकि नयी कम्पनियाँ नयी माओं को होने वाली परेशानी को समझती हैं । उदाहरण के लिए फ्लिपकार्ट ने हाल ही मे मातृत्व से जुडी छुट्टी को 24 हफ्ते बना दिया है । इसके अलावा लचीले कार्यसमय को भी मंजूरी दी गयी है 4 महीने तक ।जरूरत पड़ने पर एक साल की छुट्टी ली जा सकती है बिना तनख्वाह के । कई एयर कंपनियां इसका अनुसरण कर रही हैं।असेंचर, वोडाफोन आदि कंपनियों ने मातृत्व से जुडी छुट्टियों को बढ़ाया है । एचसीएल, गोदरेज आदि जैसी कंपनियों ने भी 24 हफ्ते की छुट्टी देनी शुरू कर दी है ।

 

श्रॉफ के मुताबिक बड़ी समस्या ये है की संस्थाएं महिलाओं के गर्भावस्था के दौरान होने वाली समस्याओं को नज़रअंदाज़ कर देते हैं । इस मामले में एयरलाइन इंडस्ट्री काफी सही है जहाँ वो माँ बन्ने के बाद महिलाओं को वापस काम पर रख लेते हैं ।

 

इसलिए अगर आप माँ बनने की तैयारी  कर रही हैं तो ये सवाल अपने HR से ज़रूर पूछें ।

  • तनख्वाह के साथ मातृत्व की छुट्टी की अवधि क्या है ?
  • मातृत्व की छुट्टी के लिए कब आवेदन किया जा सकता है ?
  • वापस आने पर वही जॉब प्रोफाइल होगी ?
  • क्या मेरा बॉस मेरी छुट्टी रद्द कर सकता है ?
  • अगर छुट्टी रद्द हो जाए तो क्या मैं इसे कानूनी तौर पर लड़ सकती हूँ ?
  • मुझे क्या चिकित्सा सुविधा मुहैया होगी ?
  • जरूरत पड़ने पर छुट्टी बढाई जा सकती है ?
  • छुट्टी बढ़ाने पर क्या वो साधारण छुट्टियों के साथ मिल सकती हैं ?
  • अगर छुट्टी बढ़ानी हो तो क्या मैं घर से काम कर सकती हूँ?

 

बिज़ दिवस दिल्ली की उप-संस्थापक और डायरेक्टर सारीका भट्टाचार्य बताती हैं की जरूरत है की एक लचीला माहौल तैयार किया जाए जिसमे काम करने की जगह और स्वास्थ दोनों का ख्याल रखा जाए ।
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