9 कारण जिनके वजह से आपके बच्चे को अभी खेलना शुरू कर देना चाहिए 

क्या आप जानते हैं की लडकियां जो ज्यादा खेलों में रुचि रखती और खेलती हैं उनके शरीर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और साथ ही उनके आत्म सम्मान में बाकिओं के मुकाबले काफी ज्यादा वृद्धि होती है । उनके वजन में भी बढ़ोत्तरी नहीं होती है ।  जी हाँ विशेषज्ञों के मुताबिक़ खेल ना सिर्फ शरीर को तंदरूस्त रखता है वल्कि ये आपके आत्म-सम्मान को भी बहुत ज्यादा बढाने में मदद करता है ।

दिल्ली की स्पर्श फॉर चिल्ड्रेन की डायरेक्टर सुरभि वर्मा कहती हैं “एक स्वस्थ लाइफस्टाइल के लिए खेलना बहुत ही जरुरी है यह बच्चे की पर्सनालिटी में भी इजाफा करता है और साथ ही आत्म- सम्मान में भी बढ़ोत्तरी करता है”

खेलने से शरीर में रक्त-प्रवाह सही होती है और साथ ही शारीरिक स्वास्थ भी बना रहता है । खेलने से बच्चों को हार और जीत दोनों ही समय अपने आप को सँभालने के तरीके सिखने का मौक़ा देता है ।इसके अलावा उन्हें मेहनत और अपने लक्ष्य की ओर केन्द्रित रहने की प्रेरणा भी देता है ।

दिल्ली में फोर्टिस हेल्थ्केयर में खेल और परामर्श मनोवैज्ञानिक दिव्या जैन बताती हैं की ” खेल बच्चों में आत्म-विश्वास बढाने के साथ साथ बच्चों में आत्म-सम्मान को पहचानने में भी मदद करता है ।इसके अलावा खेलने से बच्चों में लीडरशिप की भावना जागती है जो उनके भविष्य के लिए बहुत ही जरूरी है

स्टडी नेटवर्क के सीनियर करियर कंसलटेंट शिरीन अर्देशिर बताते हैं की ” अगर बच्चे किसी खेल को खेलने में असहमति जताते हैं या कोई खेल उन्हें पसंद नहीं है तो उन्हें इसके लिए जबरदस्ती नहीं करनी चाहिये। एक माता पिता के हैसियत से आपको बच्चों के उन गुणों और पसंद को प्रमोट करना चाहिए जो उनके अन्दर प्राकिर्तिक रूप से है ।

खेलना आपको स्वास्थ और आत्म-सम्मान देने के साथ साथ आपकी एक अलग पहचान भी बनाता है । इससे आपके अकादमिक और सामाजिक मौजूदगी में काफी प्रभाव पड़ता है जो की बच्चे के लिए सकारात्मक होते हैं ।

हमारे विशेषज्ञों ने बच्चों के खलेने के 9 फाएदे बताये हैं

  • खेलना थकान और डिप्रेशन को दूर करता है ।
  • खेलने से बच्चों मेंव्यवस्थित रूप से काम करने की क्षमता को बढ़ावा मिलता है । वो अपना लक्ष्य तय करना सीखने के साथ साथ उसे पूरा करना भी सीखते हैं । कड़ी म्हणत के साथ अपने लक्ष्य को पाना भी उन्हें खेल से ही सीखने को मिलता है
  • खेल उन्हें हार और जीत की स्तिथि में खुद पर नियंत्रण रखना सिखाता है ।
  • टीम वर्क और प्रबंधन के गुण भी खेलने से सीखे जा सकते हैं । बच्चे बहुत आसानी से आपस में मिलके काम करना और जीतने के लिए खेलना सीख जाते हैं । ऐसा करने से उनमे स्ट्रेटेजी बनाने की कश्मता भी विकसित होती है जो उनके काम आती है ।
  • रणनीति बनाना, गणित के गुण सीखना आदि खेल खेल में सीखे और सिखाये जा सकते हैं । बच्चों में अपने लास्ख्य को पाने के लिए अलग अलग रणनीति खुद बनाने की कश्मता आने लगती है ।
  • रोजाना व्यायाम करने से जीवन की कीमत का पता लगता है , शरीर स्वस्थ रहता है और शक्ति बनती है ।
  • एक अच्छे खिलाड़ी बनने के लिए आपको अपना ख्याल रखना बहुत ही ज्यादा जरूरी होता है । ये गुण आपमें तभी आते हैं जब आप अपने रहने, खाने, पहनने आदि पर विचार करने लगते हैं ।
खेलना केवल एक पाठ्येत्तर गतिविधि नहीं होनी चाहिए , यह आपके बच्चे के आत्म-विश्वास को बढ़ाती है । हमारे विशेषज्ञ बता रहे हैं कैसे ?

खेलना केवल एक पाठ्येत्तर गतिविधि नहीं होनी चाहिए , यह आपके बच्चे के आत्म-विश्वास को बढ़ाती है । हमारे विशेषज्ञ बता रहे हैं कैसे ?

दिल्ली की  संगीता विजयासिम्हा जो की ePsyClinic.com पर बच्चों के पेरेंटिंग के लिए मनोवैज्ञानिक विशेषज्ञ हैं बताती है ” अपने शरीर को गतिशील रखने के लिए और उन्हें स्वस्थ रखने के लिए खेलना एक स्वस्थ दृष्टिकोण है। वो इन 5 खेलों और इनसे होने वाले फायदे के बारे में बताती हैं :

  • फुटबॉल :

मैदान में खेलने के लिए अपने पैरों का उपयोग करने में समन्वय लाने की एक सीख मिलती है । यह आपके बच्चे के लिए एक महाकसरत है यह भी टीम वर्क को आधार बनाने का एक शानदार तरीका है ।

  • क्रिकेट :

टीम के सदस्यों के साथ संतुलन और एकाग्रता, लचीलापन, समन्वय में सुधार, सामाजिक कौशल, मांसपेशियों की शक्ति और टीम भावना में सुधार।

  • कबड्डी  :

कबड्डी शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाता है। लगातार कबड्डी कबड्डी बोलने से आपके फेफड़े अधिक मजबूत और स्वस्थ हो जाते हैं , अपने आंतरिक अंगों , अपने दिल में मदद करता है ।इन सबके आलावा इससे आपमें सहनशक्ति के साथ साथ मांसपेशियों को मजबूती मिलती है ।

  • टेनिस : आपमें समय और दिशा के साथ खुद को संतुलित रहना सिखाता है । इससे बच्चों में श्यान केन्द्रित करने की क्षमता भी बढती है । टेनिस से निर्णय लेने में आसानी होती है ।
  • बास्केटबॉल : आपमें उर्जा , सहनशीलता और गतिशीलता बढाता है और इसके साथ साथ आपके हाथों और आँखों के बीच समन्वय बनाने में भी मदद करता है ।
  • जिमनास्टिक : इससे आपके बच्चे की शारीरिक क्षमता का विकास होता है । इसके अलावा समन्वय बनाने और आत्म-विश्वास में भी बढोत्तरी होती है ।
  • तैराकी :तैराकी से बहुत सारी कैलोरी खत्म होती है करीब 500 से 600 कैलोरी । इससे आपके चाल और हाथ पैर की मांसपेशियां भी मजबूत होने के साथ साथ आपका शरीर अपने सही अकार में रहता है ।

बच्चों के लिए खेल एक भावना है, शारीरिक क्षमता, व्यायाम, नए दोस्त बनाने, कुछ अच्छा समय व्यतीत करने का तरीका है।

खेल में बच्चों को जो सीख मिलती है वो उनमे जीवन भर रहती है । विजयसिम्हा बताती हैं की ” माता-पिता को अपने बच्चों में  अच्छी खेल भावना विकसित करने में मदद करनी चाहिए। बच्चों के लिए खेल सिर्फ भौतिक लाभ ही नहीं वल्कि समग्र विकास में भी मदद करता है। अपने उम्मीदों की परवाह किये बगैर अपने बच्चों को खेलने दें और उनका उत्साहवर्धन करें”

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