7 सवाल जो कॉर्ड ब्लड बैंकिंग के बारे में हर पैरेंट्स को जरूर पूछने चाहिए

अगर आप भी पैरेंट्स बनने वाले है और जानना चाहते हैं कि ये क्या है और ये कैसे आपके बेबी की मदद कर सकता है तो इसका जवाब हम आपको देते हैं।

पिछले कुछ सालों से कॉर्ड ब्लड बैकिंग एक ऐसा विषय बन गया है जिसके बारे में पैरेंट्स जानना चाहते हैं और ये कई शहरी पैरेंट्स को आकर्षित भी कर चुका है तो कुछ इसके फायदे के बारे में जानना चाहते हैं।

अगर आप भी पैरेंट्स बनने वाले है और जानना चाहते हैं कि ये क्या है और ये कैसे आपके बेबी की मदद कर सकता है तो इसका जवाब हम आपको देते हैं।

Indusparent ने डॉ राहुल नैथानी से बात की जो मैक्स सुपर स्पैशियलिटी हॉस्पिटल के हेमेटोलॉजी और बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन डिपार्टमेंट के हेड हैं।डॉ राहुल नैथानी से हमने कुछ बेसिक सवाल जानने की कोशिश की जो हर पैरेंट्स जानना चाहते होंगे जब वो कॉर्ड ब्लड बैंक जाते होंगे तो।

1. कॉर्ड ब्लड बैंक क्या है?

मां से बच्चे को जोड़ने वाली गर्भनाल में जमा रक्त को कॉर्ड ब्लड कहते हैं। डॉ नैथानी ने हमें बताया कि इसमें स्टेम सेल बहुत अधिक होता है। उन्होंने साथ ही ये भी कहा कि ये भी बिल्कुल नॉर्मल खून की तरह होता है लेकिन अंतर बस इतना होता है कि इसमें स्टेम सेल बहुत अधिक पाए जाते हैं। स्टेम सेल की खासियत होती है कि इनका विकास अलग अलग सेल्स और टिशू में हो सकता है।

2. नवजात शिशु के गर्भनाल का रक्त कैसे जमा किया जाता है?

ये एक प्राकृतिक तरीका होता है जिसमें खू न को सीरिंज द्वारा निकाला जाता है लेकिन कोशिकाओं के खून को नहीं लिया जाता है। इसे बेबी गर्भनाल (Umbical Chord) से जमा किया जाता है और कॉर्ड ब्लड बैंक में जमा किया जाता है। इससे haematological or immunological डिसऑर्डर ठीक किया जाता है।

गर्भनाल में लगभग 75 एमएल रक्त रहता है लेकिन स्टेम सेल की संख्या कम होती है ये इसका एक अवगुण है लेकिन ये टिशू या ऑर्गेन बनाने में काफी सहायक होते हैं।

3. कॉर्ड रक्त को जमा करने का फायदा?

 डॉ नैथानी के अनुसार “ये निर्भर करता है कि इसे क्यों जमा किया जा रहा है। अगर आप इसे प्राइवेट बैंक में जमा कर रहे हैं (कई बैंक हैं) ताकि अगर कोई बीमारी हो तो काम आया। तो आपके किसी काम नहीं आने वाला है क्योंकि कॉर्ड ब्लड का भी वो जेनेटिक ढांचा है जो लोगों के शरीर में होता है। इसलिए ये कोई बीमारी नहीं ठीक करेगा।“ डॉ नैथानी के अनुसार कॉर्ड ब्लड खून से जुड़े इम्यूनॉलॉजिकल डिसऑर्डर को ठीक करता है।

4. क्या प्राइवेट ब्लड बैंक को प्राथमिकता देनी चाहिए?

आपको पब्लिक और प्राइवेट बैंकिंग में अंतर समझा होगा। प्राइवेट बैंक में रक्त सिर्फ खुद के इस्तेमाल के लिए किया जा सकता है लेकिन पब्लिक बैंक में ये दूसरो के भी इस्तेमाल में आ सकता है। डॉ नैथानी ने हमें बताया कि “लोगों को पता होना चाहिए कि आज के समय में कॉर्ड ब्लड सिर्फ 80 मेडिकल कंडीशन में ही माना गया है जो खून से जुड़े डिसऑर्डर हैं। लेकिन बच्चे को अगर इनमें से कोई भी बीमारी होती है तो इसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है क्योंकि इसका भी वही ढांचा है जो आपके बच्चे के शरीर के अंदर खून का है।डॉ नैथानी के अनुसार हमेशा प्राइवेट नहीं बल्कि पब्लिक बैंक को चुने। पब्लिक बैंक में कॉर्ड ब्लड की काफी जरूरत है।

5. कॉर्ड ब्लड किसमें इस्तेमाल होता है?

“ये स्टेम सेल को बनाने के लिए होता है। बोन मैरो में इसका ट्रांसप्लांट में इसका इस्तेमाल किया दाता है। कॉर्ड ब्लड का इस्तेमाल खून को बनाने वाले स्टेम सेल को ट्रांसप्लांट करने में किया जाता है। ये ब्लड डिसऑर्डर और न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के लिए है।“
"अगर कोई ब्लड कैंसर या कोई और हेमोटॉलॉजिकल डिसऑर्डर से गुजर रहा हो तो hematopoietic स्टेम सेल ट्रांसप्लांट या बोन मैरो ट्रांसप्लांट की जाती है। अगर पेशेंट का कोई एक भाई या बहन हो तो
25 प्रतिशत चांस होता है। इस तरह के केस में कॉर्ड ब्लड हमेशा फायदेमंद होता है। ऐसा इसलिए होता है कि क्योंकि कॉर्ड ब्लड सेल अनुभवहीन कोशिकाएं होती है। वो नुकसान नहीं पहुंचा सकती। अगर
कॉर्ड ब्लड पूरी तरह से नहीं मिल रहा फिर भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।"

6. किस तरह की स्थिति में कॉर्ड ब्लड की मदद ली जा सकती है?

डॉ नैथरानी के अनुसार "भारत में थैलेसेमिया के मरीजों की बडी संख्या है। हर साल हम 10000 से 12000 थैलेसेमिया के नए मरीज आते हैं जो नवजात शिशु होते हैं और उन्हें ट्रांसप्लांट की जरूरत होती
है। ब्लड कैंसर, ल्युकिमिया, अप्लास्टिक एनिमिया  के भी कई मरीज आते हैं। इनका इलाज हेमोटॉपोएटिक स्टेम सेल ट्रांसप्लांट के जरिये संभव है।"
उन्होंने साथ ही हमें ये भी बताया कि लगभग 80000 केस मैलिगेंट ब्लड डिसऑर्डर के आते हैं जिनका उपचार किया जाता है।  सभी को ट्रांसप्लांट नहीं किया जाता लेकिन ज्यादातर केस में किया जाता
है। लगभग 30 प्रतिशत केस में भाई-बहन से मैच कर जाते हैं लेकिन 70 प्रतिशत केस में नहीं करते इसलिए हमें ट्रांसप्लांट करना पड़ता है।"

7. क्या इसकी डिमांड बढ़ी है..अगर हां..क्यों?

डॉ नैथानी ने हमें कहा आज के समय में कैंसर के मरीज बढ़ रहे हैं और ब्लड डिसऑर्डर के कारण इसकी डिमांड बढ़ रही है।

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Source: theindusparent