6 प्रकार के दूध और उनके असंख्य फायदे

lead image

अपने पेडिट्रिशयन से नई तरह का दूध या डेयरी प्रोडक्ट देने से पहले जरूर मिलें और उनकी सलाह लें।किस प्रकार का दूध अपने बच्चों को दें ये उनके विकास का क्या पैटर्न है इस पर निर्भर करता है।

दूध तंदरुस्ती से भरी प्राकृतिक पेय पदार्थ होता है। इतना शक्तिशाली की एक छोटे से बच्चे को संपूर्ण स्वस्थ्य इंसान बना दे। इसमें कार्बोहाइड्रेट और प्रोटिन होता है जो ये शरीर की मांसपेशियों को अच्छे से काम करने में मदद करता है। इसके साथ ही इसे पीने से हड्डियां और दांत मजबूत रहते हैं।

ब्रेस्ट मिल्क या फॉर्मुला मिल्क में कई पोषक तत्व होते हैं जैसे कैल्शियम, फोस्फोरस और विटामिन D जो बेबी के विकास के लिए बहुत ही आवश्यक है।लेकिन जब बच्चे तय समय तक स्तनपान करनी की उम्र पार कर जाते हैं उसके बाद क्या।

बाजार में कई तरह के दूध उपलब्ध हैं जैसे गाय का दूध, भैंस, सोया दूघ, राइस मिल्क और बकरी का दूध जिनके कई फायदे हैं । विशेषज्ञों को अनुसार किसी भी दूसरे स्त्रोत से उपलब्ध दूध बेबी के डाइट में 12 महीने के बाद ही शामिल करें। क्योंकि अमूमन इस उम्र तक उनका पेट बाहर के दूध को पचाने के लायक हो जाता है।

पारस हॉस्पिटल गुड़गांव के कंस्लटेंट, को-ऑर्डिनेटर, पेडिएट्रिक्स डॉ मनीष मनन का कहना है कि एक साल के बाद बच्चों को मां के दूध को छुड़ाने के दौरान (हालांकि WHO के अनुसार दो साल तक बच्चों को मां का दूध देना चाहिए) गाय या भैंस का दूध दिया जा सकता है। ये बच्चों की पाचन शक्ति पर निर्भर करता है। उन्होंने साथ में ये भी कहा कि कौन सा दूध ज्यादा अच्छा है ये मापने का कोई पैमाना नहीं होता है।

कोलकाता मेडिकल रिर्सच इंस्टिट्यूट की पेडिट्रिशियन डॉ रुचि गोलाश आपका बच्चा कौन सा दूध पीना पसंद करता है ये भी मायने रखता है और साथ बेबी की पाचन शक्ति पर भी निर्भर करता है। जैसे अगर वो लैक्टोज नहीं पचा पाता है तो लैक्टोज फ्री दूध जैसे सोया मिल्क दें।

बच्चों को दूध देने की मात्रा हमेशा उनकी उम्र पर निर्भर करता है। डॉ गोलाश के अनुसार एक साल के बच्चे को दिन भर में कम से कम 500एमएल दूध पीना चाहिए। 2 साल के बच्चे को एक दिन में कम से कम 700एमएल दूध पीना चाहिए।

हर तरह के दूध की अपनी अलग खासियत होती है। अपने पेडिट्रिशयन से नई तरह का दूध या डेयरी प्रोडक्ट देने से पहले जरूर मिलें और उनकी सलाह लें।किस प्रकार का दूध अपने बच्चों को दें ये उनके विकास का क्या पैटर्न है इस पर निर्भर करता है।

1. सोया मिल्क

सोया मिल्क उन बच्चों के लिए फायदेमंद होता है जो लैक्टोज नहीं पचा पाते या गाय के दूध से एलर्जी होती है। पेड़ से सोया निकालने के बाद उसे भिगोया जाता है, उबाला जाता है और सूखाया जाता है। इसके बाद उसे पानी और तेल के साथ पीसा जाता है और इसमें भी गाय के दूध के जितना ही पोषक तत्व पाए जाते हैं।

डॉ गोलाश के अनुसार इसमें प्रोटिन, फाइबर और फैटी एसिड पाया जाता है। ये पूरी तरह से पोषक तत्वों से भरपूर होता है। बच्चे जब एक साल के हो जाएं तभी उन्हें सोया मिल्क दें। सोया मिल्क बच्चों के मिश्रित आहार में शामिल किया जाना चाहिए क्योंकि इसमें कैल्शियम, मिनरल की कम मात्रा होती है।

डॉ मनन के अनुसार बाजार में एक से बढ़कर एक सोया मिल्क उपलब्ध हैं लेकिन आप इसे चुनने में सावधानी बरतें।हमेशा ख्याल रखें कि सोया मिल्क हमेशा वही खरीदें जिसमें सभी तत्व मौजूद हो ना कि कम फैट या बिना फैट वाले क्योंकि फैट भी दिमाग के विकास के लिए काफी जरूरी होते हैं खासकर दो साल से कम उम्र के बच्चों के लिए। साथ में इस बात का भी ख्याल रखें कि सोया मिल्क विटामिन A, D और कैल्शियम से भरपूर हो।

2. बकरी का दूध

डॉ मनन के अनुसार बकरी का दूध भी गाय के दूध जितना ही पौष्टिक होता है इसलिए इसे आप अपने बच्चे की डाइट में उनके 12 महीने के होने के बाद शामिल कर सकती हैं। इसमें लैक्टोज की मात्रा गाय, भैंस के मुकाबले कम होती है और इसमें कैल्शियम, विटामिन B6,विटामिन A, निसिन और एंटीऑक्सिडेंट सिलेनियम की मात्रा होती है।

बकरी के दूध में फोलिक एसिड बहुत ही कम मात्रा में पाया जाता है इसलिए इसकी कमी पूरी करने के लिए ध्यान रखें कि बच्चे हर तरह का खाना खाएं खासकर सब्जी, फल और अनाज जिसमें फोलिक एसिड पाया जाता हो। साथ ही डॉ गोलाश ने ये भी बताया पॉश्चराइज्ड बकरी का दूध या फिर बहुत अधिक उबाला हुआ बकरी का दूध इस्तेमाल करें क्योंकि इसमें कीटाणु होते हैं जो आपके बच्चे को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

कई बार अगर बच्चों को गाय का दूध पचाने पाने समस्या होती है तो बकरी का दूध पिलाने की सलाह दी जाती है।

3. नारियल दूध

 

src=http://theindusparent.com/wp content/uploads/2015/08/shutterstock 160018937.jpg 6 प्रकार के दूध और उनके असंख्य फायदे

नारियल का दूध असल में दूध का कोई प्रकार नहीं होता और बाकि दूध के मुकाबले इसमें पोषक तत्व भी कम होते हैं। लेकिन डॉ गोलाश के अनुसार नारियल का दूध चूंकि डेयरी प्रोडक्ट नहीं होता इसलिए बच्चों को तब देने की सलाह दी जाती है जब उन्हें दूध से एलर्जी हो। इसमें दूध के मुकाबले काफी कम विटामिन और मिनरल होते हैं। इसलिए बच्चों को कभी कभी वैसे आहार दें जिसमें नारियल का दूध हो। ये छोटे बच्चों के लिए आइडल दूध नहीं है और ना तो ये बाकि दूध का विकल्प हो सकता है।

4. भैंस का दूध

डॉ मनन के अनुसार भैंस के दूध में सबसे ज्यादा फैट पाया जाता है और साथ ही कैल्शियम भी। साथ ही इसमें विटामिन A भी प्रचूर मात्रा में पाई जाती है और इसमें प्रोटिन के साथ आयरन, कैल्शियम और फोस्फोरस भी गाय के दूध के मुकाबले अधिक पाई जाती है। बच्चों का खाना जैसे कॉर्नफ्लैक्स, पोडिग्री, सूप, खीर आदि इससे बना सकती हैं।

5. गाय का दूध

गाय का दूध हर बच्चे को पीने की सलाह दी जाती है, अगर उन्हें पचाने में समस्या नहीं हो तो। अपने बेबी को गाय का दूध तभी दें जब वो एक साल के हो जाएं क्योंकि इसमें आयरन अधिक मात्रा में नहीं होती है।

6. राइस मिल्क

डॉ गोलाश के अनुसार राइस मिल्क मे कैलोरी बहुत कम होती है (100 एमएल में 52 कैलोरी)।इसके अलावा इसमें लैक्टोज भी बहुत कम पाया जाता है इसलिए जो बच्चे लैक्टोज नहीं पचा पाते उनके लिए ये बेस्ट है।

डॉ मनन के अनुसार नवजात शिशुओं के लिए ये ब्रेस्ट मिल्क का विकल्प नहीं है क्योंकि इसमें मिनरल, विटामिन, कैल्शियम और प्रोटिन कम मात्रा में पाया जाता है। हालांकि बाजार में कैल्शियम और इन सब पोषक तत्वों से भरपूर राइस मिल्क पाए जाते हैं।

डॉ मनन ने साथ ही हमें ये भी बताया कि राइस मिल्क में फैट कम होता है इसलिए ये नवजात शिशुओं के लिए नहीं है। बच्चे कभी कभी इसे पी सकते हैं लेकिन इसे बाकी दूध और दूध से बने आहार की जगह देना उचित नहीं है।

अगर आपके पास कोई सवाल या रेसिपी है तो कमेंट सेक्शन में जरूर शेयर करें।

Source: theindusparent