5 बातें जो आप natural child birth के बारे में नहीं जानते !

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नेचुरल चाइल्ड बर्थ का मतलब होता है बिना किसी मदद के बच्चे को जन्म देना, मतलब बिना एनीमा, बिना सेलाइन के, बिना किसी दर्द भगाने वाले इंजेक्शन या दवाई के।

31 5 बातें जो आप natural child birth के बारे में नहीं जानते !

 

मेरी कॉलेज की फ्रेंड एफ्फी डीकुन्हा ने नेचुरल चाइल्ड बर्थ का आप्शन चुना था, और जब उसने इसके बारे में मुझे बताया तो मुझे लगा की हो सकता है ये डिलीवरी का कोई नया एडवांस कांसेप्ट हो । यक़ीनन मैं खुश थी क्योंकि ये बच्ची नार्मल डिलीवरी से हुई थी, लेकिन फिर मुझे पता चला की इसमें नार्मल जैसी कोई बात ही नहीं थी ।

 

इसीलिए जब मैंने कहा की मैंने भी नेचुरल चाइल्ड बर्थ ही ऑप्ट किया है तो उसने तुरंत जवाब दिया की नेचुरल चाइल्ड बर्थ का मतलब वेजाइनल चाइल्ड बर्थ नहीं होता है । उसने बताया की नेचुरल चाइल्ड बर्थ का मतलब होता है बिना किसी मदद के बच्चे को जन्म देना, मतलब बिना एनीमा, बिना सेलाइन के, बिना किसी दर्द भगाने वाले इंजेक्शन या दवाई के ।

नेचुरल चाइल्ड बर्थ क्या है ?

नेचुरल चाइल्ड बर्थ का मतलब वेजाइनल बर्थ नहीं होता है । इन फैक्ट इसका मतलब वेजाइनल चाइल्ड बर्थ के अलावा कम से कम मेडिकल और टेक्नोलॉजी सहायता लेना होता है जिसमे ख़ास तरह से सांस लेने और खुद को रिलैक्स करने की प्रक्रिया भी शामिल होती है । साइंटिफिक मिडवायफरी मॉडल ऑफ़ केयर पर आधारित मैटरनल एंड न्यूबोर्न केयर प्रोवाइडर हेल्थी मदर के को-फाउंडर और डायरेक्टर डॉ. विजय कृष्णन बताती हैं की " चाइल्ड बर्थ एक बायोलॉजिकल प्रोसेस है, फिर चाहे वो किसी मेडिकल सपोर्ट से हो या बिना मेडिकल सपोर्ट से।"

 

ये आपको तभी सूट करेगा अगर आप खुद को अपनी बॉडी के कण्ट्रोल में रखना चाहती हैं, और बिना की बाहरी मदद के उस लेबर पैन को उठाने के लिए तैयार हैं। और इसका मतलब ये है की आप किसी दर्द भगाने वाली इंजेक्शन या दवाई के भरोसे भी नहीं रह सकती हैं ।

 

अगर आप नेचुरल चाइल्ड बर्थ ऑप्ट करने की सोच रही हैं तो इन बातों का ख्याल रखें :

  • ये पूरी तरह से नॉन-इनवेसिव होता है इसीलिए आपको या आपके होने वाले बच्चे को इससे कोई नुकसान होने या साइड इफ़ेक्ट होने की पॉसिबिलिटी बहुत कम होती है ।

 

  • क्योंकि यहाँ सिर्फ आप अपने आप को कण्ट्रोल करती हैं जिससे ज्यादातर महिलाएं लेबर पैन को आसानी से झेल लेती हैं । ऐसा इसीलिए हो पाटा है क्योंकि जब आप खुद को अपने बॉडी का इंचार्ज मान लेते हैं तो उस दर्द का परसेप्शन कम हो जाता है ।

 

  • “ वेजाइनल बर्थ में शरीर में किसी तरह के कोई भी अंदरूनी या बाहरी निशान या स्कार्स नहीं पड़ते हैं” । – सर्टिफाइड प्रेगनेंसी लैक्टेशन एंड चाइल्ड न्यूट्रीशन काउंसलर सोनाली शिवलानी ।

 

  • सीजेरियन सेक्शन के मुकाबले इसमें रिकवरी बहुत तेज़ी से होती है । वेजाइनल बर्थ में महिलाएं माँ बन्ने के एक महीने बाद से ही अपने नार्मल कम को शुरू कर सकती हैं ।

 

डीकुन्हा की ही तरह आज अनगिनत महिलाएं नेचुरल चाइल्ड बर्थ का आप्शन अडॉप्ट कर रही हैं । सीधी बात है , अगर हमारी दादी के समय ऐसा हो सकता था तो आज क्यों नहीं ?

लेकिन ये जो हम इतने सारे इमोशन नेचुरल चाइल्ड बर्थ के साथ जोड़ देते हैं , यही वो कारण है की हम इसे और ज्यादा एक्स्प्लोर नहीं कर पाते हैं और सेफ डिलीवरी जैसे सीजेरियन सेक्शन की तरफ बढ़ जाते हैं । हमारी ये सोच ही नेचुरल चाइल्ड बर्थ के तरीके को अनसेफ बना देती है ।

 

नेचुरल चाइल्ड बर्थ से जुड़े मिथक

 

  • सुपर-हाई दर्द सहने की क्षमता होनी चाहिए : हाँ, ये जरूर है की इसमें दर्द तो होता ही है , किसी ने कभी नहीं कहा की इस प्रक्रिया में दर्द नहीं होता है, लेकिन क्या आपको पता है की लेबर के दौरान शरीर में एंडोर्फिन की मात्र बहुत ज्यादा बढ़ जाती है ? इसका मतलब ये है की जैसे-जैसे कॉन्ट्रैकशन की इंटेंसिटी बढती है वैसे-वैसे उसे सहने की क्षमता भी बढती है । कॉन्ट्रैकशन ज्यादातर 30 सेकंड तक रहता है । इसका मतलब ये की अगर आपका कॉन्ट्रैकशन 1 मिनट तक चले तो उसे सहने की क्षमता कॉन्ट्रैकशन की इंटेंसिटी से ज्यादा हो जाती है ।

 

  • आपको घर पर ही बच्चे को जन्म देना होगा : अगर आपको लगता है की आप हॉस्पिटल में नेचुरल चाइल्ड बीत नहीं अपना सकते तो आप गलत हैं । ज्यादातर नेचुरल चाइल्ड बर्थ बिना दवाई के घर पर किया जरुर जाता है लेकिन किसी भी हॉस्पिटल भी इस प्रोसेस का इस्तेमाल बच्चे को जन्म देने के लिए किया जा सकता है । ये बात है की डॉक्टर अपनी जाना बचाने के नाम पर आपको दर्द में देख दवाई देने की कोशिश कर सकते हैं , लेकिन ये सच में इम्पॉसिबल बिलकुल नहीं है ।आप अपने डॉक्टर से पहले ही बात करके सब कुछ तय कर लें ।

 

  • बिना दाई के ये नहीं हो सकता : दाई वो महिला होती है जो प्रेगनेंसी और डिलीवरी के दौरान आपकी देख-भाल करती है । सही है की एक दाई के होने से चीजें आसान हो जाती हैं लेकिन क्या आप अपने शरीर को खुद नहीं समझ सकते ? क्या आपको इसके लिए दाई की जरूरत है ? लेकिन अगर दाई के आस-पास रहने से सेफ लगता है तो ठीक है लेकिन ये भी जान लें की नेचुरल चाइल्ड बर्थ के लिए ये कोई जरुरी कंडीशन नहीं है ।

 

  • सभी ड्रगफ्री नेचुरल बर्थ पानी में ही होते हैं : पानी नेचुरल चाइल्ड बर्थ के समय लेबर पैन के दौरान काफी आराम पहुंचाते हैं लेकिन ये नेचुरल चाइल्ड बर्थ की कोई नेसेसिटी नहीं है ।

 

  • इतना दर्द झेलने की कोई वजह या जरूरत नहीं है : ये एक मिथक है क्योंकि इससे लगता है, इस प्रोसेस में हद से ज्यादा दर्द होता है । डीकुन्हा बताती है की उनका ड्रग-फ्री बर्थ बिना दर्द के तो नहीं हुआ था लेकिन दर्द इतना भी नहीं था की सहा न जा सके । ये बॉलीवुड में डिलीवरी के दौरान लेबर पैन से चिल्ला रही महिलाओं की तरह बिलकुल नहीं होता है ।

 

अपने बच्चे को नेचुरल तरीके से इस दुनिया में लाना सबसे बेहतरीन तरीका है । इसका क्रेज धीरे-धीरे बढ़ रहा है और लोग इसकी गहराइयों को जानना शुरू कर चुके हैं । “ एक माँ बच्चे को जन्म देना जानती है और बच्चा भी इस दुनिया में आने के लिए तैयार ही होता है “ – डॉ. कृष्णन

 

नेचुरल चाइल्ड बर्थ के डिफरेंट आप्शन के बारे में जानने के लिए आगे पढ़ें 

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नेचुरल चाइल्ड बर्थ के डिफरेंट आप्शन

नेचुरल चाइल्ड बर्थ के भी कई तरीके हैं ।आप अपने बच्चे के लिए इनमे से कोई भी आप्शन ले सकती हैं ।

 

नेचुरल चाइल्ड बर्थ कहाँ दे सकती हूँ ?

 

  • घर पर : गाँव में घर पर बच्चे को जन्म देने के लिए ट्रेडिशनल महिलाएं रहती हैं जिन्हें दाई भी कहा जाता है । उनकी मदद से घर पर भी नेचुरल चाइल्ड बर्थ प्रोसेस से बच्चे को जन्म दिया जा सकता है । इसके अलावा क्वालिफाइड मिड-वाइफ की भी मदद ली जा सकती है ।

 

  • हॉस्पिटल या बर्थ सेंटर में : डॉक्टरों की जांच करें, सलाह लें और तय करें की आप अपनी डिलीवरी कहाँ करना चाहेंगी ? यहाँ आप डॉक्टर से बात कर लें की आपको दवाइयों की जरूरत है या नहीं या आपको लेबर पैन के दौरान दवाई आदि दी जाए या नहीं ।

 

 नेचुरल चाइल्ड बर्थ के तरीके 

 

  • वाटर बर्थ या हाइड्रोबर्थ :इसमें प्रेग्नेंट महिला गुनगुने पानी से भरे टब में बैठ जाती हैं । ये एक स्पेशल टब होता है जिसमे डिस्पोजेबल लाइनिंग होती हैं । डॉक्टर या मिड-वाइफ बच्चे पर नज़र रखते हैं । बच्चा भी पानी के भीतर ही जन्म लेता है और पानी से बाहर आने के बाद ही वो पहली बार सांस लेता है ।

 

  • हिप्नो-बर्थ : “ये होने वाले माता-पिता दोनों को ही सिखाई जाती है । ये दरअसल लेबर पैन के दौरान बोले जाने वाले कुछ मन्त्र या यूँ कहें की कुछ लिखी हुई बातें होतीं हैं जो लेबर पैन से ध्यान दूर करने में मदद करता है । इससे माँ रिलैक्स महसूस करती है , उसकी मांसपेशियां नए ढंग से काम करना शुरू कर देती हैं जिससे दर्द को सहने की शक्ति बढ़ जाती है ।" – शिवलानी

 

  • लामज़े :इस तरीके में कॉन्ट्रैकशन के दौरान महिला का ध्यान भटकाया जाता है जिससे व=उसका ध्यान दर्द की तरफ न जाए । इसमें लेबर पैन, चाइल्ड बर्थ से जुडी सारी बातें समझाई जाती हैं जिससे उनमे कॉन्फिडेंस बढ़ता है ।

 

नेचुरल बर्थ प्रोसेस को कब ऑप्ट करें ?

 

जिन महिलाओं को कोई गंभीर मेडिकल प्रॉब्लम न हो वो इस तरीके को आजमा सकती हैं । हालांकि इसमें भी कंट्राडिक्शन हैं लेकिन बहुत कम । ये हैं वो कुछ बातें जब आपको नेचुरल चाइल्ड बर्थ का आप्शन नहीं चुनना चाहिए ।

 

  • जब प्लेसेंटा यूटरस के मुहाने से जुड़ा हो : ऐसे मामलों में जब कॉन्ट्रैकशन शुरू होता है तो सर्विक्स खुलना शुरू कर देता है जिससे खून बहते की स्पीड बढ़ जाती है और इसे रोकने के लिए आपको मेडिकल असिस्टेंस की जरूरत तो पड़ेगी ।

 

  • जब बच्चा माँ के पेट में हॉरिजॉन्टल स्थिति में हो : इस मामलों में भी माँ और बच्चे दोनों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नेचुरल चाइल्ड बर्थ का आप्शन नहीं चुनना चाहिए ।

 

  • जब बच्चे को पहले से ही कोई जन्मजात बिमारी हो : इस मामलों में डॉक्टर की देख-रेख में ही डिलीवरी करवानी चाहिए ।

 

डॉ. कृष्णन के मुताबिक़ “ जब बच्चे का कार्ड उसे गर्दन के चारों ओर लिपटा हो या माँ को डायबिटीज हो या हाइपरटेंशन हो, ऐसे मामलों में भी नेचुरल चाइल्ड बर्थ से बचना बेहतर है क्योंकि ऐसे में माँ बिना किसी मदद के बच्चे को जन्म नहीं दे सकती है “ । इन मामलों में डिलीवरी क्वालिफाइड , डॉक्टर, मिड-वाइफ या दाई के मौजूदगी में ही करवानी चाहिए ।

 

वो बताती हैं की इस प्रोसेस के पीछे आईडिया खुद को चोट पहुंचाना या दर्द सहने देना बिलकुल नहीं है , इसीलिए जरुरी नहीं है की अगर आपको बहुत तेज़ दर्द हो रहा हो तो आप कोई मदद न लें । नेचुरल चाइल्ड बर्थ के पीछे आईडिया यही है की बच्चे का जन्म जितने नेचुरल वातावरण में हो सके , बिना दवाई के वो हो।

 

ये सही है की इस तरीके में कई कंट्राडिक्शन है लेकिन “ आपको पता होना चाहिए की सिर्फ 10% माँ को ही सीजेरियन सेक्शन की जरूरत पड़ती है । लेकिन इसे दिखाया ऐसे जाता है जैसे 80% महिलाएं हाई रिस्क में बच्चे को जन्म देती हैं।"

 

इसके अलावा और थोड़ा घुमाकर नेचुरल चाइल्ड बर्थ को समझने की कोशिश करें तो सोच के देखिये की डिलीवरी के दौरान अगर एक पूरी टीम आप पर और आपकी पत्नी पर नज़र गड़ाए देखता रहे तो आपके लिए ये कितना नेचुरल होगा ? है न ? उतना ही अननेचुरल है एक साधारण लेबर और डिलीवरी के प्रोसेस को मेडिकल मेथड से और कॉम्प्लीकेट बना देना ।

 

नेचुरल चाइल्ड बर्थ के बारे में अपने सवाल और विचार हमारे साथ कमेंट बॉक्स में ज़रूर शेयर करें ।

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