5 गलतियां जो आपके बच्चों को और भी चिड़चिड़ा बनाती है

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एक शब्द को जो सुनकर किसी भी छोटे बच्चे की मां डर जाती है वो है-झल्लाहट और जिद।

एक शब्द को जो सुनकर किसी भी छोटे बच्चे की मां डर जाती है वो है-झल्लाहट और जिद। हर मां को इसे हैंडल करना ही पड़ता है जब आपका बच्चा बिल्कुल कंट्रोल के बाहर हो जाता है।

इसे आसान बनाने के लिए यहां हम आपको कुछ बातें बता रहे हैं जो जितनी जल्दी हो सके करना छोड़ दें।

1. जब आपका बच्चा उदास हो तो तर्क-वितर्क ना करें

आपने कभी नोटिस किया है कि आप अपने रो रहे या दुखी बच्चे से तर्क वितर्क या डांट रहे हों तो वो और भी ज्यादा चिल्लाने लगते हैं? बच्चे इन सबके बीच लॉजिक नहीं समझ पाते हैं। बाल मनोचिकित्सक डॉ स्टिवन डिकस्टिन का कहना है कि विस्तार में समझाने से बच्चे ओवरलोड हो जाते हैं और आप भी जो कहते हैं वो इस समय उन्हें कुछ समझ नहीं आता।

आपने ये भी नोटिस किया होगा कि आप बोलती हैं लेकिन वो सुनते नहीं है। आपका शांत आवाज जो गुस्सा में बदल जाता है वो इसे पसंद नहीं करते हैं। इससे बच्चे ये समझ लेते हैं कि जब चीजें सही नहीं होती है तो चिल्लाना आखिरी विकल्प रह जाता है- क्या आप भी ऐसा करते हैं।

जरूर किया होगा लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि आपको उनसे तर्क वितर्क नहीं करना चाहिए लेकिन इसका सबसे बेहतरीन तरीका है जब आप और बच्चा दोनों शांत हो।

 
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2. अपने बच्चे के गुस्सा होने के पैटर्न की अनदेखी

जी हां हम जानते हैं कि कभी कभी ऐसा लगता है कि आपका बेबी कोई चिल्लाने वाला बॉल बन जाता है और चिल्लाने का कोई कारण नहीं होता। लेकिन उनकी झल्लाहट निरंतर होती है।

कुछ गुस्सा और झल्लाहट अटेंशन पाने के लिए होते हैं जब बच्चों को लगता है उनकी उपेक्षा  की जा रही है। आप कभी फोन पे बात कर रहे होते हैं और मुझे चाहिए वाली झल्लाहट भी देखने को मिलती है। इसके कई बार आप उन्हें कुछ करने बोलते हैं और उनका मुझे नहीं करनावाला गुस्सा शुरू हो जाता है।

इन सब चीजों की अनदेखी करते हुए कई अलग अलग तरह के भी तरीके होते हैं। आपने गौर किया होगा कि उनकी झल्लाहट का एक तरीका होता है जैसे बच्चों की अनदेखी करने मुझे ये चाहिए..मुझे वो चाहिए वाला रवैया शुरू हो जाना। एक बार अगर आप ये समझ लेंगे कि वो किन किन बातों में झल्लाते हैं तो चीजें काफी आसान हो जाती है।

3. काउंटडाउन

शायद ही कोई पैरेंट्स होंगे जिन्हों ये ना किया हो - तुम्हारे खेलने का समय खत्म हो गया है। अच्छा ठीक है बस दो मिनट और फिर तुम्हें बंद करना होगा उन्हें कुछ मिनट मस्ती करने के लिए देकर आपको लगता है कि आपने उनका मूड खराब होने से बचा लिया।

लेकिन असल में अधिकतर समय आपके बच्चे के लिए हानिकारक होता है । यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन के अनुसार जब बच्चे 1 से पांच के होते हैं और 2 मिनट काउंटडाउन दिया जाता है तो वो असल में दुखी हो जाते हैं। इस तरह की स्थिति में बच्चों को कुछ समय ज्यादा देने के बदले स्थिति को बदल दें। जैसे उन्हें किसी और एक्टिविटी में व्यस्त कर दें। बच्चों का ध्यान भटकाना आसान होता है।

4. चाहिए तो बस चाहिए

कई बार बच्चे आपके साथ बाहर जाते हैं उन्हें कुछ अच्छा लगता है तो उसे पाने के लिए आसमान सर पर उठा लेते हैं। आप उन्हें शांत करने के लिए वो जो बोलते हैं आप उन्हें खरीद कर देते हैं। आपके बच्चे जानते हैं कि कैसे अपनी फेवरिट चीज को पाने के लिए अपनी बातें मनवानी है।

इस तरह की स्थिति में बातें मान लेना आसान होता है इसलिए इसके उल्टा प्लानिंग करें। हमेशा पहले ध्यान रखें कि कैसे आपको अपनी प्रतिक्रिया देनी है। जैसे पब्लिक प्लेस पर आपके बच्चे जिद करते हैं तो आपने प्लान में दादा/दादी, पापा या उनके शामिल कर लें जिनके आगे वो जिद नहीं करते ।

 
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5. तुंरत अस्वीकार करना

मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि झल्लाहट गुस्सा पर देने वाली नॉर्मल प्रतिक्रिया है खासकर दो साल-तीन साल के बीच । ये काफी नॉर्मल है जैसे थकावट में जम्हाई आना नॉर्मल है। लेकिन इन्हें तुरंत अस्वीकार कर देने पर घातक परिणाम भी देखने मिल सकते हैं।
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वाशिंगटन यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिसिन के अनुसार  बच्चे जो जिद करते हैं उन्हें ADHD होने का रिस्क होता है। स्टडी के अनुसार 75 प्रतिशत मामलों में बच्चे जिन्हें गुस्से की समस्या होती है वो ADHD के शिकार होते हैं। लेकिन इसमें टेंशन लेने या हड़बड़ाने की कोई बात नहीं है। कुछ भी गलत लगे तो डॉक्टर के पास जाने में ना हिचकिचाएं।  

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Source: theindusparent