5 आसान तरीके..बच्चे की पिटाई करने से कैसे खुद को रोकें

5 आसान तरीके..बच्चे की पिटाई करने से कैसे खुद को रोकें

यहां मैं कुछ आसान तरीके बता रही हूं जो मैं तब अपनाती हूं जब मुझे अपनी बेटी पर गुस्सा आता है । इसके पहले कि हाथ उठाकर पूरे दिन अपराधबोध से ग्रसित रहूं मैं इन शस्त्रों का प्रयोग करती हूं, आप भी पढ़ें।

ईमानदारी से कहें तो हम सभी माएं कभी कभी अपने बच्चों की तंग करने वाली आदतों से परेशान हो जाते हैं। एक..दो नहीं कई ऐसे पल आते हैं जब हम आपा खो देते हैं और उन पर हाथ उठा देते हैं। जी हां ये सच है कि बेस्ट पैरेंट्स भी ये क्राइम जरूर करते हैं और वापसी में पछतावा के अलावा और कुछ नहीं मिलता।

सच्चाई ये है कि आप कितने भी कूल पैरेंट्स हो लेकिन कई बार ऐसे भी पल आते हैं जब लगता है आसमान आपके ऊपर गिर गया हो। इसका श्रेय जाहिर है बच्चों के एक से बढ़कर नखरों को जाता है जो कभी उनकी उदासी तो कभी उनके भोलेपन के कारण होती है। आप इस परिस्थिती में कुछ कर भी नहीं सकते खासकर छड़ी निकाल कर उन्हें पीटने का तो सवाल ही नहीं उठता है।

एक समय के बाद हम अलग अलग रास्ते और रणनीति बना लेते हैं कि कैसे गुस्से को काबू करना है। ये कहने की जरूरत नहीं है कि एक 6 साल की बच्ची की मां होने के नाते मेरे भी कुछ शस्त्र हैं जो मैं खुद को इस परिस्थिति से बचाने के लिए करती हूं।

यहां मैं कुछ आसान तरीके बता रही हूं जो मैं तब अपनाती हूं जब मुझे अपनी बेटी पर गुस्सा आता है । इसके पहले कि हाथ उठाकर पूरे दिन अपराधबोध से ग्रसित रहूं मैं इन शस्त्रों का प्रयोग करती हूं, आप भी पढ़ें।

1. 10 तक गिनती 


ये हम सभी ने स्कूल में सीखा है। गुस्सा आने पर 10 तक गिनना छात्र जीवन में पहला विकल्प हुआ करता था जो आज भी ज्यादातर समय मुझे बचा लेता है।

2. एक ग्लास पानी 

हमें एक और पुश्तैनी आइडिया सालों से मिला हुआ है कि पानी पीने से गुस्सा शांत हो जाता है। पानी कूलेंट का काम करता है और आपका गुस्सा कम हो जाता है। विश्वास कीजिए और आप भी इसे अपनाएंगे तो फायदा होगा।

3. मैं अपना ध्यान भटकाती हूं 


अगर ऊपर के बाकी दो विकल्प नहीं काम करते हैं तो मैं इसे अपनाती हूं। जैसे ही मुझे गुस्सा आता है मैं अपना ध्यान किसी अच्छी चीज पर देने लगती हूं जैसे अकेले बैठकर एक कप कॉफी पीना (बच्चों  के बिना) और पसंदीदा संगीत सुनना।

4. क्यूट बच्चों की तस्वीरें देखना 


ये आइडिया मुझे मेरी दोस्त ने दिया था। उसे जब भी गुस्सा आता था वो अपने बेटे की बचपन की क्यूट तस्वीरें देखती है और इसे देखने के बाद बस सारा गुस्सा काफूर हो जाता है।

कुछ सेकेंड के अंदर आपका मातृत्व हार्मोन जाग जाता है और मूड भी तुरंत बदल जाता है जैसे कुछ हुआ ही नहीं।

5. आखिर में मैं सुनती हूं! 


कभी अगर ऐसा हो कि सारे नुस्खे फेल कर जाते हैं तो मैं पूरी ईमानदारी के साथ अपनी 6 साल की बेटी की बात सुनती हूं। मैं समझने की कोशिश करती हूं कि उसने ऐसा क्यों किया। शायद वो मेरा अटेंशन पाना चाह रही थी और इस वजह से झल्ला उठी।

ज्यादातर समय हम समस्या तुरंत ही समझ जाते हैं कि आखिर उन्होंने ऐसा क्यों किया।

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