गर्भावस्था के दौरान भूल कर भी ना करें ये गलतियां

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गर्भावस्था के दौरान इन्हीं सावधानियों का ध्यान रख कर आप सुरक्षित और खुशहाल प्रसव के अनुभव की ओर बढ़ सकती हैं ।

गर्भावस्था के दौरान सावधानियां, ध्यान देने योग्यबातें

एक मां ही समझ सकती है कि गर्भवती होना तथा अपने कोख में पल रहे शिशु को अपने खून से सींचना, जीवन का कितना संवेदनशील दौर होता है । बेबी प्लान्ड हो या ना हो, गर्भ ठहरने के बाद एक लड़की संपूर्ण स्त्री होने का सुख प्राप्त करने के साथ ही आने वाले शिशु के भविष्य एवं स्वास्थ्य को लेकर सचेत हो जाती है । जाने अनजाने में कई सारे नियमों का पालन भी गर्भावस्था के दौरान ऐक्सपेंटिंग मां को करना पड़ता है । साथ ही गर्भावस्था के दौरान सावधानियां बरतने की सलाह भी हमें घर के बड़े-बुज़ुर्ग देते रहते हैं । जिनमें से कई भले ही आपको मुश्किल लगे लेकिन शिशु के नाम पर आप वो सब करने को तैयार रहती हैं । उदाहरण के तौर पर, आप अपने पसंद और स्वाद को अनदेखा करते हुए शिशु के सेहत के वास्ते बाहर का कुछ खाने से परहेज़ करती हैं, अपने रहन-सहन के तौर-तरीके बदलती हैं इत्यादि ।

 

गर्भावस्था सुनिश्चित होने के साथ ही एक स्त्री हर दिन अलग सा अनुभव करती है और इस चुनौतिपूर्ण सफर में क्या करें क्या नहीं जैसे कई मुकाम आते हैं और आशंकाओं से घिरने की संभावनाएं तब कई गुना बढ़ जाती है जब आप पहली बार गर्भवती हुई हों । गर्भावस्था के दौरान सावधानियां बरतनी चाहिए ताकि शिशु की या आपकी सेहत पर कोई बुरा असर ना पड़े और मातृत्व का ये सफर आपके लिए खुशहाल एवं यादगार बना रहे । तो आइए इस लेख के माध्यम से, मैं अपने अनुभवों के आधार पर आपसे कुछ जरुरी बातें साझा करती हूं ।

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जानिए गर्भावस्था के दौरान क्या ना करें

पहली तिमाही में सहवास- मासिक धर्म मिस करते ही आपको सचेत हो जाना होगा और अगर टेस्ट द्वारा जांच का परिणाम सकारात्मक है तो डॉक्टर की परामर्श लेनी चाहिए । बेबी कंसीव करने के शुरुआती 3-4 माह तक संभोग ना करने की सलाह दी जाती है । दरअसल इस समय मिसकैरेज होने की संभावना बहुत अधिक होती है इसलिए जब तक गर्भाशय में भ्रूण सुरक्षित सेटल ना हो जाए तब तक शुरुआती गर्भावस्था के दौरान सावधानी बरतनी चाहिए । दूसरी-तीसरी तिमाही में भी सेक्स के पोजिशन का ध्यान रखा जाना चाहिए ।

भाग-दौड या खेल-कूद- कोई भी ऐसी क्रियाकलाप जो गर्भाशय पर दबाब बनाए या झटका दे, आपको नहीं करनी चाहिए । शुरुआती 3-4 महीना बहुत ही संवेदनशील होता है इसलिए डॉक्टर्स यात्रा ना करने, अधिक सीढ़ियां ना चढ़ने, छलांग ना लगाने या किसी भी शारीरिक गतिविधि वाले खेल में शामिल ना होने की सलाह देते हैं ।

अधिक व्यायाम या जिम- आप भले ही फिटनेस को तवज्जो देती हों पर गर्भावस्था के दौरान सावधानियां बरतने से प्रसव तक पहुंचने की यात्रा आरामदेह रहेगी । प्रेगनेंसी में अधिक पसीना बहाना आपके सेहत के लिए खतरनाक भी हो सकता है । बेहतर है आप गर्भावस्था के सप्ताहिक विकास और बदलाव को सूट करता हुआ कोई हल्का फुल्का वर्कआउट करें ।

दवाई का सेवन- जहां तक संभव हो घरेलू नुस्खे या हर्बल तरीकों से ही अपनी रोज़मर्रा की बीमारियों को ठीक करने का प्रयास करें । गर्भावस्था के दौरान अधिक या बार-बार दवाईयों का सेवन शिशु के लिए खतरनाक हो सकता है ।

गर्म तासीर की चीजों का अधिक सेवन- शुरुआती अवस्था में ड्राईफ्रुट्स या गरम मसाले का अधिक सेवन रक्तस्त्राव की संभावनाओं को बढ़ा देता है । इसलिए गर्भवती महिलाओं को आयरन व प्रोटीन युक्त संतुलित आहार लेने की सलाह दी जाती है । हालांकि जब गर्भ मैच्योर स्टेज में पहुंचने लगता है तब ड्राई फ्रुट्स इत्यादि चीजों का सेवन प्राकृतिक प्रसव के लिए मां के शरीर को तैयार करने में मदद करता है ।

भारी सामान कतई नहीं उठाना चाहिए- पेट पर दबाब पड़ना असमय प्रसव की संभावना बढ़ा देता है जो कि मां और शिशु दोनों के लिए हानिकारक है । इसलिए पानी से भरी बाल्टी या भारी बैग या फिर किसी बच्चे को उठाने का प्रयास ना करें ।

पेट या कमर की ज़ोर से मालिश- गर्भावस्था के दौरान जब शिशु का विकास होने लगता है तो आप कमर दर्द से परेशान हो सकती हैं लेकिन फिर भी हल्के हाथों से ही मालिश करवाएं या मरहम लगा कर छोड़ दें ।

इन सब के अलावा ध्यान रखें कि पीठ के बल या करवट लेकर सोना चाहिए । प्रसव के पहले कुछ दिनों में करवट लेने में भी परेशानी होती है इसलिए पेट को तकिये से सहारा देते हुए बांयी तरफ लेटने से राहत मिलती है । अत्यधिक पीठ दर्द हो तो आप दोनों घुटने के बीच तकिये को रख कर करवट लेकर लेंटे , काफी राहत मिलेगी ।  गर्भावस्था के दौरान इन्हीं सावधानियों का ध्यान रख कर आप सुरक्षित और खुशहाल प्रसव के अनुभव की ओर बढ़ सकती हैं ।

 

 

 

 

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