18 महीने के बच्चे का development

अपने बच्चे की तरफ देखिये जो आपकी परछाई है, वो हर उस जगह होता है जहाँ आप जाते हैं . लेकिन सावधानी भी बरतें और जानें बच्चों के विकास के लिए क्या जरुरी है ?

शारीरक विकास

बेबी के 18 महीन के होने पर उनका वज़न 9 से 12 किलोग्राम के बीच होता है, और उनके कद की लंबाई 76 से 84 सेंटीमीटर के बिच होती है। हालाँकि ये बात हर बच्चे पे लागु नहीं होती क्योंकि हर बच्चा अपना समय लेता है डेवेलोप होने में।

अगर आप अपने बेबी के फर्स्ट बर्थडे को याद करे तो आपको उनके डेवलपमेंट की अनुभूति होगी। अब आपका बेबी चल फिर सकता है, और कुछ हद तक भागता दौड़ता भी होगा, लेकिन फिर भी उसको कोआर्डिनेशन में थोड़ी प्रोब्लेम्स हो रही होगी। वो आपके साथ आपका हाथ पकड़ के सीढ़ियाँ चढ़ने की कोशिश करता होगा, और घुटनो के बाल वापस निचे उतरने की कोशिश भी करता होगा। और शायद थोड़ी बहुत उछल खुद भी करनी स्टार्ट कर दी होगी!

अगर आप गौर करें तो अपने नोटिस किया होगा की बच्चा इस समय तक अपना मास्टर हैण्ड चुन लेता है, यानि या तो वो राईट हैंडेड होगा या लेफ्ट । इसमें कोई भी परेशानी वाली बात नहीं है। ये बात आप पता लग सकते है अगर आप नोटिस करें कि बच्चा किस हाथ से चीज़े पकड़ना प्रेफर करता है।बच्चा इस समय तक बीलोवक्स के साथ खेलना शुरू कर देता है। और ब्लॉक्स को जोड़ जोड़ के एक या दो मंज़िल बनाने के खेल खेलना भी शुरू चूका होगा।

बच्चे के विकसित होने की एक और निशानी है जब वो कागज़ पे स्क्रिबल करना शुरू कर दे, स्पेशल्ली तब, जब वो आपको पेपर पर कुछ लिखता दिखे । उनकी स्क्रिबबलिंग मार्क्स और पैटर्न से ज़्यादा और कुछ नहीं होती और हमे उस से ज़्यादा की अपेक्षा रखनी भी नहीं चाहिए।

अगर आप उसकी मदद करना चाहते हैं तो उसे अलग-अलग रंग दिखायें , अलग-अलग आकारों से अवगत करवाएं . उसकी उँगलियों को और स्थिर करें .इतनी सारी एक्टिविटीज करने का मतलब है की बच्चे का विकास तेज़ी से हो रहा है। इन सब में उनके सोने का टाईमटेबल थोडा बदल सकता है, ज़्यादातर बच्चे इस समय तक एक बार ही सोना पसंद करते हैं, हो सकता है की कुछ बच्चे बिलकुल भी न सोयें । बहुत से बच्चे रात में सोने के समय भी तकलीफ दे सकते हैं, एक पूरा रोमांचक दिन बिताने के बाद, उनका एक्साइटमेंट लेवल उतना ही बना रहता है जिसके कारण वो चैन की नींद नहीं सो पाते, या फिर हो सकता है की उनको रात की जगह दिन में नींद की ज्यादा ज़रुरत हो, आप अपने बेबी को सबसे अच्छे से जानते हैं, इसलिए अपने आप पर भरोसा करें और जो उसके लिए बेस्ट हो वो करे।

नींद में बाधा और स्लीप पैटर्न का बदलना भी आपके बेबी को जल्दी नींद से उठा सकता है । इसलिए ज़रूरी है की आप बेबी की स्लीपिंग हब्बिट्स पे ध्यान दे और ज़रूरत पड़ने पर अपना और बेबी, दोनों का टाईमटेबल चेंज कर सकते हैं। याद रखिये बेबी का वर्त्तमान का टाईमटेबल उसके पूरे बचपन तक वही रहेगा।

बच्चा अगर बाथरूम जाने में रुचि दिखा रहा है तो आप बच्चे को पॉटी ट्रेनिंग भी दे सकते हैं, हालांकि इसमें जल्दबाजी की जरुरत नहीं है क्योंकि ज़्यादातर बेबी अपने दूसरे जन्मदिन से पहले अपने ब्लैडर को कंट्रोल करना नहीं जान पाते हैं ।

संज्ञानात्मक विकास

इस उम्र में बेबी को गाना बेहद पसंद होता है, न केवल खुद गाना बल्कि आपके गाने सुन ना भी बहुत  पसंद होता है। तालियां बजाना और इधर उधर घुमना उनका पसंदीदा काम है। बेशक उनको सुर या ताल की समझ न हो लेकिन उनको मुश्किल इंस्ट्रूमेंट्स में काफी दिलचस्पी होती है।

कहानियाँ सुनना, तस्वीरों को देखना, पज़ल्स सोल्व करना, पज़ल्स को सही जगह प्लेसकरना ये सब उनकी एजुकेशनल एक्टिविटीज़ का हिस्सा है।कभी कभी बच्चे अपने आप खेलना पसंद करते हैं। उनके साथ आप घरेलु चीज़ों के साथ खेला करिये या फिर फ़ोन पे बात करने की एक्टिंग किया करिये, या फिर उनके लिए किताबे पढ़ा करिये, ये सब आपको नियमित  तौर पर करना चाहिये। कुछ समयबाद वो आपके सारे एक्शन कॉपी करने लगेगा।

बेबी बहुत से तरीकों की आवाज़े निकलने की कोशिश भी करते हैं। ज़्यादातर वो अपने खिलौनों की आवाजें निकालने की कोशिश करते है, और सफल भी हो जाते हैं।अगर आपको आपके घर में जुराबें या टोपियाँ इधर उधर पड़ी मिलती हैं तो समझ जाइये की आपका बेबी, कपड़े उतारना सीख रहा है। इसलिए अपने बच्चे का ख़ास ध्यान रखें और उनपर सख्त नज़र रखे, स्पेशल्ली वो पेरेंट्स जो ठन्डे इलाकों  में रहते हैं।

सामाजिक और भावनात्मक विकास

बेबी को हमेशा अपनी मम्मी का “लिटिल हेल्पर” बोला जाता है। आपके बेबी को आपकी मदद् करना बहुत पसंद होता है, स्पेशल्ली साफ सफाई के काम हो या फिर उनके लिए खाना बनाते समय फ्रिज में से सामान निकालना, वो हर चीज़ में आपकी सहायता करने की कोशिश ज़रूर करते हैं, और अगर अपने उनकी इस छोटी सी कोशिश को सराह दिया तो वो बहुत गौरवान्वित महसूस करते हैं।

बच्चे को अपनी दिनचर्या में शामिल करने के बहुत से तरीके होते हैं, जैसे की उनसे पालक के पत्ते निकलवाना, या फिर गाजर को बर्तन में रखवाना, धुलने के कपड़ो को मशीन में डालना, या खाना खाने के बाद रसोइ में सफाई करवाना आदि। ध्यान रखिये की बच्चे को आपको कम करते देखना बहुत पसंद है, इसलिये जब भी आप कोई भी काम करे, अपने बेबी को उस काम के बारे में ज़रूर समझाए।

बच्चों का ध्यान केंद्रित करने का समय बहुत छोटा सा होता है। इसलिए अगर वो उस काम को छोड़ के किसी और काम या खेल में लग जाए, तो उनको बिना गुस्सा या आक्रोश दिखाए जाने दे और उनकी कोशिश के लिए उनको सराहें ।

आपका बच्चा अपनी आदते आपको देख के निर्धारित करता है। उनके सामने अच्छे उद्धरण पेश करिये क्योंकि वो उन उद्धरणों से ही सीखता है, जैसे की दिनचर्या  से रिलेटेड कोई काम , या फिर सामाजिक नियम जो हम अपनी ज़िन्दगी में फॉलो करते हैं।

इस समय तक बच्चा बोलना शुरू कर देता है, और स्वाभाविक तौर पर वो चीजों पर  अपना हक़ मानता है। ये बच्चे के विकसित होने की एक और निशानी है। इस स्टेज पे बच्चा चिड़चिड़ा व्यवाहर भी करने लगता है, कई बार वो आपको फ़ोन पे बात करने में परेशान कर सकता है या फिर खाना खाने में थोड़े नखरे दिखाए, ये सब स्वाभाविक है परंतु ये आपकी ज़िमेदारी है की आप अपने बच्चे के इर्द गिर्द एक सीमा बना दें , ताकि उनको अपनी सीमाओं का एहसास रहे।

बच्चों को नियम और दायरे समझाना बहुत  ज़रूरी है। उनके लिए एक सुरक्षित वातावरण बनाना आपकी जिम्मेदारी  है। समय-समय पर आपको अपने बेबी को गले लगा कर बताना चाहिए की आप उनसे कितना प्यार करते हैं।

बोल और भाषा

इस समय तक बच्चा बोलना शुरू कर देता है और दस शब्द साधारण तौर पर बोल लेता है, जैसे की मम्मी, नहीं, मेरा, नहीं चाहिए, और उनकी मनपसन्द चीज़े जैसे की दूध, बॉल, या बिल्ली।

बोलने से ज़्यादा बच्चा इस उम्र में ज़्यादा शब्द समझता है। वो बहुत  सी चीज़ों को देख के पहचान सकता है, शरीर के बहुत  से अंगों को भी पहचानने की क्षमता रखता है। वो तस्वीरों में लोगों को भी आराम से पहचान लेता है।

इस स्टेज पर बच्चे एक आधी लाइन भी बोल लेते है, उनकी शब्दावली बढ़ाने  के लिए आपको अपने बच्चे को शब्दों का मतलब समझाना चाहिए, ताकि वो उन शब्दों को याद कर लें और लाइन में उनका उपयोग करे।

बच्चों के दिमाग का भी विकास इसी दौरान होता है। अगर आप नोटिस करे तो आप पाएंगे की बच्चों की मेमोरी भी शार्प होने लगती है. उन्हें आपकी पढ़ी हुई स्टोरी याद रहती हैं और वो आपसे अपेक्षा रखते हैं की आप अच्छे से उन्हें कहानियाँ पढ़के सुनाए।

स्वास्थ्य और पोषण

अब समय है बच्चों को संक्रमण से बचाने का और तीन बूस्टर लगाने का और वो तीन बूस्टर हैं DTaP, पोलिओमेलिटस, हेमोफिलुस इन्फ्लुएंजा टाइप बी .जैसे जैसे बच्चे बड़े होते वैसे वैसे पेरेंट्स को उनके खाने पिने के समय पर काफी संघर्ष करना पड़ सकता है। ये फैसला पेरेंट्स को करना चाहिए की किस दिन क्या बनेगा, और बच्चे की इच्छा के ऊपर होना चाहिए की उसको कितना खाना है।

18 महीने के बच्चे में स्वाद को समझने की क्षमता बढ़ती है। हो सकता है की जो खाना आपके बच्चे को फ़िलहाल पसंद हो वही खाना उनको अगले ही दिन नापसंद हो। अगर बच्चा एक दिन कम खाना खाए तो समझ जाए की वो उसकी भरपाई अगले दिन ज़रूर करेगा। ये ध्यान ज़रूर रखे की बच्चों के खाने में पोषण की कमी न हो। एक अच्छी सेहत के लिए पोषण भरा खाना अत्यंत आवश्यक है।

माता पिता के लिए टिप्स

ये वो समय होता है जब आपका बच्चा विकास के पथ पर चल रहा होता है। कुछ बच्चे तेज़ी से विकास करते हैं तो कुछ अपना समय लेते हुआ धीरे धीरे। जहाँ एक तरफ कुछ बच्चे शब्द बोलना सीख रहे होते हैं वहीँ दूसरी और बच्चे सेंटेन्सेस बोलने की कोशिश कर रहे होते हैं।

जहाँ एक तरफ कुछ बच्चों को पता होता है की उनको क्या चाहिए वहीँ दूसरी ओर कुछ बच्चे धीरे धीरे समय के साथ चलते हुए अपनी पसंद या ना पसंद के बारे में समझते हैं।पर ज़रूरी नहीं है की सारे बच्चों का विकास इसी तरह हो, इतिहास गवाह है, अल्बर्ट आइंस्टीन ने 3 वर्ष की उम्र में बोलना शुरू किया था।

शिशु के विकास के बारे में और भी जानने के लिए आप हमारे अर्टिवले रेड फ्लैग में पढ़ सकते हैं। और यदि आप ज्यादा चिंतित हैं, तो आप हमारे शिशु रोग विशेषज्ञ से सलाह भी ले सकते हैं।

कुछ रेड फ़्लैग्स जो आपको ध्यान में रखना चाहिए :- अगर इस उम्र में आपके बच्चे ने चलना फिर शुरू नहीं किया और वो आपके सहारा के बिना नहीं उठ पते, या फिर उन्हें घुटनो के बल रेंगने में तकलीफ हो रही है या फिर खाना खाने में परेशानी हो रही है तो आपको अपने शिशु रोग विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।

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