16 महीने के बच्चे का development

क्या आपने अपने बच्चे को उनकी खिलौने वाली गाड़ी से खेलते वक़्त अजीब-गरीब  साउंड इफेक्ट्स निकालते, नोटिस किया है?? क्या आपने उनकी बढ़ती इमेजिनेशन पर ध्यान दिया??? अगर नहीं , हो ध्यान दें उनकी उन छोटी-छोटी बातों पर.. क्यों की यही समय है जब वो अपनी इमेजिनेशन का विकास करते हैं।उनकी ज़िंदगी अब केवल उनकी आँखों के दायरे तक सीमित नहीं है, बल्कि खेल, कहानियाँ और एक रिच फैंटसी की शुरुवात है।

शारीरिक विकास

यह वो समय भी है जब आपको अपनी सतर्कता बढ़ानी पड़ेगी और अपने आँख और कान खुले रखने पड़ेंगे .  बच्चा क्या कर रहा है?? कहाँ है? ये सब आपको अपने ध्यान में रखना होगा।

16 महीने के बच्चे चलना, घूमना, चीज़ों को पकड़ना या उन्हें फेंकना आदि की कोशिश ज़रूर करते हैं। ये काम काफी थका देने वाला होता है स्पेशल्ली तब जब उन्हें अपनी इन स्किल्स को डेवलप करने में समय लगे।

अगर बच्चे के अंदर चलने का आत्मविश्वास है तो वो ज़रूर कोशिश करेंगे चलने की । हो सकता है की वो अपने हाथो में खिलौने  ले कर चले और आपको आकर दे दें । बच्चों को अपने पेरेंट्स के साथ बाहर घूमने का बड़ा शौक होता है क्योंकि ये न केवल एक नई दुनिया का रास्ता उनके लिए खोल देती है बल्कि फूलों को छूना,गाड़ियों को देखना, रेत से खेलना, तालाब में मछलियो को देखना या बॉल फेंकना, उन्हें बेहद पसंद है।

16 महीने का बच्चा चीज़ों पर चढ़ने के लिए अभी भी बहुत छोटे होते हैं, परंतु जब वो अपने से बड़े बच्चों को ये सब करता देखते हैं तो उन्हें बहुत मज़ा आता है और वो उनको देख के सीखने की कोशिश करते हैं।

संज्ञानात्मक विकास

16 से 18 महीने के बच्चों में संज्ञानात्मक विकास कई स्टेज का प्रारंभ हो जाता है .जहाँ पहले वो आपकी नक़ल उतरा करते थे वहीँ अब वो प्रतीकात्मक खेल खेलने लगते हैं। उदहारण के तौर पर बेबी अब फ़ोन उठा के बात करने की एक्टिंग करते हैं या फिर किसी ब्लाक या चम्मच को फ़ोन समझ के किसी को कॉल करने की एक्टिंग करते हैं। ये न सिर्फ बेहद प्यारा प्रतीत होता है बल्कि विकास की ओर एक बढ़ता कदम भी है। ये इमेजिनेशन के जन्म का समय होता है। बच्चे में इमेजिन करने की क्षमता बढ़ जाती है और वो अपने दिमाग में बहुत  सी ऐसी चीज़ें सोच के खेलने लगते हैं जो असल ज़िंदगयी में मौजूद नहीं होती।

उनका मानसिक विकास भले ही तेज़ी से हो रहा हो लेकिन उनके ध्यान देने की क्षमता अभी भी कम समय की ही होती है। उनमे अटेंशन देने की क्षमता कुछ चंद मिनटों से ज्यादा की नहीं होती और वो कभी भी आसानी से डिसट्रैक्ट हो सकते हैं। और अगर अपनको अपने बच्चे का ध्यान अपनी और खींचना है तो सब से अच्छा तरीका है उनको 10 से 20 मिनट तक की एक छोटी सी कहानी सुनाना। इस से आपके और आपके बेबी के बीच का बांड स्ट्रांग होगा, इसको और ज्यादा मज़ेदार बनाने के लिए आप बेबी को पेजेस पलटने के लिए दे सकते हैं। और अगर बेबी स्टोरी पर ध्यान नही देते, तो इसमें चिंता करने की कोई बात नहीं है! क्योंकि हो सकता है वो उस समय ज़दा रूचि किताब में बनी पिक्चर्स में दिखा रहा हो। पर ध्यान रखियेगा की आप इसको अपने बेबी के पेशेंस लेवल के बाहर तक ना खींचें। आप बस उन्हें फॉलो करे और उनका उत्साह बढायें .

अगर आप बच्चे में बचपन से ही रीडिंग हैबिट उजागर करना चाहते हैं तो उनके सामने लंबा नहीं परंतु ज्यादा पढ़ने की कोशिश करें। छोटी-छोटी कहानियाँ आप बच्चे के उठने के बाद और सोते समय उनको सुना सकते है, इससे उनमें पढ़ने का इंटरेस्ट पैदा होगा।

और ज़रूरी है की जब आप किताब पढ़ें तो बेबी को पढ़ते हुए देखें क्योंकि ये उम्र बच्चों को सब कुछ दिखने की है उन्हें बताने की नहीं, वो आपका ही उदाहरण फॉलो करेंगे .

 

सामाजिक और भावनात्मक विकास

आपके बच्चे को भले ही लोग पसंद हो पर ये ज़रूरी नहीं की उनको अपने चीज़े शेयर करना पसंद हो। उनको अपने खिलौने , स्नैक्स और यहाँ तक की उनका अटेंशन भी शेयर करना पसंद नहीं ना हो। उनका फोकस अभी उनकी खुद की ज़रूरतों पर ज्यादा होता है।

इसलिए आप घबराइये नहीं अगर आपका बेबी किसी से अपने चीज़े शेयर नहीं करता, तब भी जब वो उनसे खेल भी ना रहे हो, याद रखिये कुछ महीने पहले तक उनके लिए ये तक समझना मुश्किल था की आप और वो दो अलग लोग हैं।

इमेजिनेशन के जन्म के साथ-साथ बच्चे में दुसरो की फीलिंग भी इमेजिन करने की समझ आ जाती है। दूसरों के शब्दों में भावनाएँ और सहानुभूति के भावों को समझने की समझ उत्पन्न होनी शुरू हो जाती है।

यही समय है जब आप बच्चे को उनकी सही भावनाओं से अवगत कारवाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। यदि वो रो रहे हैं तो आप उन्हें बताएं की वो दुखी हैं इसलिए रो रहे हैं, और अगर वो हंस रहे हैं तो आप उन्हें बताएं की वो खुश हैं  इसलिए हंस रहे हैं। अपनी खुद की भावनाओं का सही ज्ञान मिलने पर बच्चे दूसरों की भावनाओं को भी अच्छे से समझ सकते हैं। सबसे सुंदर एहसास वो है जब आपका बेबी  आपको  उदास देखता है और आपके पास आकर आपको गले लगाता है।

जब बच्चा पेरेंट्स में से किसी एक के लिए लगाव ज्यादा दिखाता है तो ये आपकी जिम्मेदारी बन जाती है की आप उनके इस लगाव को ज्यादा बढ़ावा ना दें । ये आवश्यक है की दोनों माँ और बाप अपने बच्चे के साथ बराबर का समय व्यतीत करे। हो सकता है की शुरुवात में बच्चा रोने लगे पर कुछ समय बाद वो नार्मल हो जाते हैं। पेरेंट्स एक दूसरे से बेबी की तस्वीरें भी शेयर कर सकते हैं ताकि उन्हें तसल्ली रहे की उनका बेबी ठीक  है।

बच्चों का चीज़ों पर कम फोकस करना ऐसे समय में आपके बहुत काम आ सकता है, उनको बहुत  ही आसानी से किसी गाने या खेल के ज़रिये डिसट्रैक्ट किया जा सकता है। यही तरीका आप तब भी अपना सकते हैं बेबी उदास हो जाते हैं। आप उन्हें एहसास दिलाएं की आप उनकी भावनाएं समझ सकते हैं उनका ध्यान आसानी से किसी और बात पर केंद्रित कर सकते हैं।

 

बोली और भाषा

इस उम्र में बच्चे बातचीत करने की कोशिश करना शुरू कर देते हैं। वो कोशिश करते हैं आपको चीज़ें बताने की और आपके रिस्पांस को बहुत  ध्यान से सुनते हैं। और अगर आप नोटिस करे तो अब वो आपके कम्युनिकेशन स्टाइल की नकल करने की कोशिश करते हैं।

ये स्टेज बच्चों की  “ना” बोलने की स्टेज होती है। बहुत  बार आपका बेबी वही काम कर रहा होगा जिसके लिए उनसे आपसे थोड़ी देर पहले “नो” बोला था। ये इसलिए क्योंकी बच्चे नए शब्दों का एक्सपेरिमेंट करते हुए उनके मतलब को भी जानने की कोशीश करते हैं।

“नो” मतलब कुछ भी हो सकता है, हो सकता है उनके “नो” कहने का मतलब हो “नहीं अभी नहीं, पर कुछ समय बाद ठीक है” या फिर हो सकता है उन्हें “नो” शब्द बोलना इतना ज्यादा पसंद हो की वो पुरे दिन नो नो ही बोलते रहे भले ही उनका मतलब यस बोलना हो।

आपका बच्चा बाहरी दुनिया में अपने प्रभाव को भी देखने की कोशिश करेगा। उनके पास कितनी अथॉरिटी है?? उन्हें कौन से फैसले लेने के अधिकार हैं ? वो नहायेगा  या नहीं क्या ये फैसला उन्हें लेने दिया जाएगा?

एक माँ होने के नाते ये आपकी जिम्मेदारी  है की आप उनकी सीमा निश्चित करे और उन्हें अपने आस-पास की चीजों को समझने में मदद करे।

चेतावनी- भले ही आपका बेबी बोलने में असक्षम हो लेकिन उसकी समझ बुझ पहले से काफी बढ़ गयी है और वो आपकी बातें समझने लगते हैं।

स्वास्थ्य और पोषण

ज़रूरी नहीं है की सारे बच्चों को नींद से उठने के बाद भूख लगे, स्पेशल्ली तब जब सोने से पहले उन्होंने पेट भर खाना खाया हो।

इस उम्र में बच्चों की खाने पिने की आदत अनियमित होती है। क्या पता एक दिन वो 3 कटोरी भर के दलिया खाए और अगले ही दिन वो सिर्फ एक या दो चम्मच ही उस दलिए को खाए।

चिंता की कोई बात नहीं है, जब तक आपका बेबी खुश है एक्टिव है और अच्छे से विकास कर रहा है तो इसका मतलब वो बिलकुल ठीक हैं और स्वस्थ हैं। उनके बढ़ते दांतो पर अपनी नज़र ज़रूर रखे।

खाने का और स्नैक्स टाइम का समय निश्चित करना बेहद ज़रूरी है। बच्चों का पेट छोटा होता है इसलिए वो एक बार में ज्यादा खाना नहीं खा सकते लेकिन उनको थोड़ी-थोड़ी देर में कुछ न कुछ खिलाते रहना चाहिए। कोशिश करें की आप उनके लिए पोषण से भरा खाना और फल स्टॉक कर के रखें ।

माता पिता के लिए टिप्स

बच्चों को पानी से खेलना बेहद पसंद होता है, भले ही वो बाल्टी में से पानी छलकाना हो या बाथटब में खेलना हो।

विकास की इस स्टेज पर यदि आपका बच्चा केवल एक ही हाथ का इस्तेमाल कर रहा है या बड़बड़ाता नहीं या किसी भी तरीके का इशारा नहीं करता तो आपको अपने शिशु रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।

याद रखे सभी बच्चे अपने समय से विकास करते हैं। जहाँ कुछ बच्चे घंटो तक सड़क पर चलती गाड़िओं को देखते हैं वहीँ दूसरी ओर कुछ बच्चे  2 मिनट भी शांति से एक जगह नहीं बैठ सकते।

कुछ बच्चों को खाना पीना बहुत  पसंद होता है तो कुछ को बिलकुल भी खाना पीना पसंद नहीं होता।

इन एक्टिविटीज का उनके भविष्य और शिक्षा से कोई लेना देना नहीं है । ये तो बस उनके निजी विकास का एक पहलू है। इतिहास गवाह है, मश्हूर वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने 3 साल की उम्र में बोलना शुरू किया था।

अपने शिशु के विकास के बारे में और भी जानने के लिए आप हमारे अन्य आर्टिकल्स भी पढ़ सकते हैं। और यदि आप अपने शिशु को लेकर ज्यादा चिंतित है तो अपने शिशु विशेषज्ञ से जल्द से जल्द संपर्क कर, अपनी दुविधा उन्हें बताए।

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