बच्चों में एकाग्रता बढ़ाने के लिए वास्तु का प्रयोग करें ।

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क्या आप जानते हैं की अगर आपका बच्चा किसी काम में ध्यान नहीं लगा पाता  है तो इसमें आपके घर का दोष हो सकता है ? घबराएं नहीं वास्तु शास्त्र के इन नियमों को अपनाएं।

बच्चों के कमरे में थोड़ा बदलाव उनके एकाग्रता में बढ़ोत्तरी कर सकता है ।एकाग्रता सफलता की कुंजी है लेकिन क्या आप जानते हैं की अगर आपका बच्चा सीखने से दूर भागता है तो इसमें आपके घर का दोष हो सकता है ? वास्तु शास्त्र में बच्चों में कमी को दूर करने के कई तरीके हैं लेकिन बच्चों की परेशानियां ढूंढने तो आपको ही होंगे । वास्तु शास्त्र के हिसाब से घर की पश्चिमी दक्षिण- पश्चिम दिशा शिक्षा क्षेत्र होता है । इसका मतलब ये हैं की इस दिशा में आप कैसे सामन को रलहते हैं इसका सीधा प्रभाव बच्चे की एकाग्रता पर पड़ता है । वास्तु शास्त्र के इन नियमों का पालन करें :

  • पश्चिमी दक्षिण- पश्चिम दिशा में टीवी रखने से बचें क्योंकि ये आकर्षण का क्षेत्र है । अगर आपका बच्चा ध्यान लगाने की कोशिश कर भी रहा हो तब भी उसका ध्यान टीवी की ओर चला जाएगा ।
  • पश्चिमी दक्षिण- पश्चिम दिशा में टॉयलेट का होना या हरे रंग का होना बच्चे की पढ़ाई पर नकारात्मक प्रभाव डालती है । इससे बच्चा पढ़ाई को समय की बर्बादी समझ सकता है ।
  • पश्चिमी दक्षिण- पश्चिम दिशा में ड्रेसिंग टेबल का होना बच्चे के ध्यान को पढ़ाई से अपने सुन्दर और आकर्षक दिखने पर लगा सकता है ।
  • बच्चे के बिस्तर लगाते समय भी ध्यान रखें की ये पूर्वी दक्षिणी-पूर्व में न हो । इससे बच्चे में खुद को लेकर शंकाएं उत्पन्न होनी शुरू हो सकती है । बिस्तर को पश्चिमी दक्षिण- पश्चिम दिशा में लगाएं । यहाँ तक की पुस्तकों को पूर्वी दक्षिणी-पूर्व दिशा में रखना भी पढ़ाई से ध्यान भटकाने या पढ़ी हुई चीज़ों के समझ न आने का कारण बन सकता है ।

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