हमारी thinking और society को बदलना होगा ताकि हमारा आने वाला कल काली स्याही में न बदल जाये !

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ये कैसा समाज है ? जो रेप, मर्डर, और आतंक को अपनी चाय की चुस्की के साथ पढ़कर भूल जाता है।

क्या होगा इस समाज का, अगर औरत सिर्फ पन्नों पर छपी काली स्याही बन कर रह जाएगी ? क्या यही सचाई है हमारे आज और आने वाले काले कल की ?

 

हालात  हमें अपने घर से बदलने होंगे। माता- पिता होने के नाते अपने बच्चों के आज और आने वाले कल की ज़िम्मेदारी हमारी है ।हमे अपने बच्चों के आने वाले कल के लिए उन्हें आज से ही तैयार करना होगा -:
-   उन्हें सिर्फ किताबी नहीं सामाजिक तौर पर भी आदर्श इंसान बनाना होगा

-   हर तरह की हिंसा, अपमान और अत्याचार को अपने और अपने बच्चों की सोच और आचरण से निकला होगा 
-   हर बच्चे, हर मर्द को हर हाल में हर एक लड़की और औरत की इज़्ज़त करना सीखना होगा 
-   और हर बेटी, हर औरत को अपनी रक्षा खुद करना सीखना होगा

 

रूढ़िवादी सोच से जुडी हमारी जड़ें कहीं हमारी आने वाली नेसल को बर्बाद न कर दें । अगर हम अब भी नहीं बदले तो हमारे आने वाले कल की भयानक तस्वीर को कोई नहीं बदल पायेगा।जिस समाज में एक औरत के मान- सम्मान को आसानी से धूल में मिला दिया जाता है और फिर अख़बार के पन्नों में लिख कर दबा दिया जाता है, उसके उज्वल भविष्ये की कल्पना करना बेमानी है ।

 

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