क्या आप बच्चे की sleeping problems से परेशान हैं ?

क्या आप बच्चे की sleeping problems से परेशान हैं ?

कई माता पिता के लिए नींद एक दूर की कौड़ी लगती है . बच्चे जो बिस्तर पर लड़ते है , गुलाटियां मारते हैं इससे और ज्यादा परेशानी होती है . तो क्यों कोई बच्चा दिन में नहीं सोता है या रात में सोने में परेशान करता है ? पढ़िए और जानिये की बच्चे को एक आराम की नींद माता पिता कैसे दे सकते हैं ?

बच्चे को पर्याप्त मात्रा में सोना क्यों आवश्यक है ?

सोने के दौरान ही बच्चे के शरीर का विकास होता है . जब बच्चा सो रहा होता है तब उसकी कोशिकाएं व्यस्त रहती हैं . अच्छी नींद बच्चे के विकास के लिए जरूरी है . सोते समय बच्चे का दिमाग अपने दायें और बायें सेरीब्रम से सम्पर्क स्थापित करने में व्यस्त होता है . स्प्लेनियम के द्वारा कार्पस काल्लोसम का निर्माण होता है जो किसी फाइबर की तरह दायें और बायें सेरीब्रम को आपस में जोड़ देता है जिससे दोनों के बीच में संपर्क स्थापित हो जाता है .

बच्चे की नींद अच्छे से पूरी न होने पर क्या होता है ?

अध्यन बताते हैं की 1 से 3 साल की उम्र तक अच्छी नींद न आने सी जब बच्चा 6 साल का हो जाता है तब उसमे हाइपरएक्टिविटी, और बौद्धिक क्षमता में कमी आती है .2012 में किये गये एक शोध के मुताबिक ढाई से तीन साल की उम्र में अच्छी नींद न पाने बच्चों में व्यग्रता बढ़ जाती है इसके अलावा वो किसी समस्या का समाधान भी आसानी से नहीं ढूंड पाते हैं .इससे उम्रभर मूड बदलने की स्थिति बनी रहती है .

दिन में एक बच्चे को कितनी नींद मिलनी चाहिए

विशेषज्ञों के मुताबिक़ एक बच्चे को दिन में करीब 11 से 14 घंटे सोना चाहिए .नेशनल स्लीप फाउंडेशन की तरफ से 2015 में ये एडवाइजरी जारी की गयी थी :

(0 से  3 महीने तक ) - दिन में 14 से 17 घंटे
(4 से  11 महीने तक ) - दिन में 12 से 15 घंटे
(1 से  2 साल तक ) - दिन 11 से  14 घंटे
(3 से  5 साल तक) - 10 से  13 घंटे

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बच्चे का नींद चक्र

दो तरह के नींद होते हैं एक रैपिड ऑय मूवमेंट और नॉन रैपिड ऑय मूवमेंट :

  1. नॉन रैपिड ऑय मूवमेंट या “शान्ति” से सोना :ये वो समय होता है जब  मरम्मत आदि काम होता है . मांशपेशियों में रक्त पहुंचता है , शरीर की ताकत वापस आती है, कोशिका बढती हैं और कोशिकाओं के मरम्मत का काम होता है . हॉर्मोन आपके बच्चे के शरीर के विकास में जुटे होते हैं . ये वो क्षण होता है जब बच्चा सबसे गहरी नींद में होता है .
  2. रैपिड ऑय मूवमेंट या “सक्रीय” नींद :इस दौरान मष्तिष्क की गतिविधिओं के कारण आपके बच्चे को सपने आते हैं . इस दौरान बच्चे के सांस लेने में , दिल के धड़कने में अनियमिता आती है .बच्चा नींद का जवाब भी अपने रोने , चीखने आदि से देता है जो बिलकुल ही सामान्य बात है . ये नींद चक्र के दोनों हिस्से मिलकर करीब 50 मिनट तक रहते हैं .

कुछ बच्चों के नींद आना बहुत मुश्किल क्यों होता है ?

जन्म लेने के समय से उलट 2 साल की उम्र में आपका बच्चा सोता कम है और जागता ज्यादा है . अपने बचपन में बच्चा अपने आस पास की गतिविधिओं , आस पास के लोगों के प्रति ज्यादा जागरूक होता है और वो ये सब देखते और समझने की कोशिश करता है .ये हैं वो कुछ बातें जिस वजह से बच्चे को नींद नहीं आती है आसानी से :

  • सोने के समय से कंफ्यूज रहना
  • खुद को आराम न देना
  • भूख के कारण
  • सोते समय आराम न मिलना
  • आजादी का अनुभव करना
  • अँधेरे से डॉ लगना
  • कमरे का बहुत ठंडा या बहुत गर्म होना
  • पैजामा आदि का आरामदायक न होना
  • माता पिता के साथ ज्यादा समय बिताने की इच्छा
  • सोने के बाद मम्मी पा को न देख पाने की चिंता सताना
  • दिनभर में बहुत ज्यादा थकान हो जाना

अगर बच्चा सोने से मना कर दे तो माता पिता को क्या करना चाहिए ?

बच्चे आदतों को मानते और उसी को फॉलो भी करते हैं . इसीलिए माँ बाप को चाहिए की वो बच्चे के सोने के लिए क नियमित रूटीन बना दें .इस रूटीन को बनान एके लिए इन बिन्दुओं का ध्यान रखें :

  1. सोने से पहले बच्चे को पैजामा पहनायें
  2. बच्चे से 10 मिनट बात करें या उसे कहानी सुनाएं
  3. बच्चे को दूध पिलायें
  4. लाइट बंद कर दें
  5. बच्चे को थपथपाएं , हो सके तो साथ में सो जाएँ

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अगर आपका बच्चा कुछ कारणों के वजह से सोने से मना कर रहा है ...

जाने की कोशसिह करे की किस कारण वो सोने से मना कर रहा है और शान्ति से उस समस्या को सुलझाएं .बच्चे पर गुस्सा न करें और उसपर चिल्लाएं नहीं .

अगर आपका बचा सोना छोड़ के कुछ और करना चाहता है.......

ऐसे में बच्चे से बातचीत करें और उससे समझाने की कोशिश करें . उसे किसी असी बात का लालच ना दें जो उसकी आदत बनकर बाद में आपको ही परेशानी में डाले . शांत रहें और प्यार से बात करें . उदाहरन के लिए अगर आपका बच्चा पिने के लिए पानी माँगा रहा है तो उसे कहें की पानी पीकर सो जायेंगे . याद रखें की इस समय आपका बच्चा अपनी आज़ादी और नियमों के बीच तालमेल बैठाना सीख रहा है .

अगर आपका बच्चा अपने छोटे से पालने से बार बार निकलने का प्रयास करता हो ....

ये नए और बड़े बिस्तर पर जाने का संकेत हो सकता है . नए बिस्तर पर जाना नया सरप्राइज भी बन सकता है . लेकिन नए बिस्तर में भी बच्चे के न गिरने का प्रबंध करें चारी तरह बाड़े लगा दें या कुछ भी करें जिससे उसकी बिस्तर से गिरने की संभावना खत्म हो जाए . बच्चे से बात करें और बोलेन की बिस्तर से बार बार उतरना ठीक नहीं है और उसे अच्छे से सो जाना चाहिए .

क्या साथ में सोनम बच्चे की आदत होती है ?

भारत, जापान, बाली में ज्यादातर बच्चे अपने माँ बाप के साथ ही सोते हैं और ये पूरी तरह से स्वीकार्य भी है . अध्यन बताते हैं की साथ सोने में 5 साल के बच्चे के वर्ताव में कोई ख़ास फर्क नहीं पड़ता है.  जो बच्चे अपने माता – पिता से साथ सोते हैं उन्हें सुरखा का अनुभव होता है . ज्यादातर माता पिता बच्चे के साथ सोने के बावजूद इंटिमेट होने के तरीके ढूंढ ही लेते हैं ताकि और बच्चे हो सकें !

बच्चे रात मेसोते सोते जग क्यों जाते हैं ?

हर माता पिता चाहते हैं की उनका बच्चा आराम से रात भर सोये लेकिन बच्चे अक्सर रात मेजग जाते हैं जिसमे निम्नलिखित कारण हो सकते हैं :

  • दांत की परेशानी
  • वो किसी चीज़ को लेकर चिंतित हैं
  • भूख लगी है
  • कीड़े आदि अस पास हों
  • रात में डरावने सपने

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नींद न आने पर मदद चाहिए ?

डरावने सपने बच्चे को डरा सकते हैं . इसके लिए किसी शिशुरोग विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए .  डरावने सपने ज्यादातर 3 से 8 वर्ष की उम्र में आते हैं . अगर आपके बच्चे को रात में डर लगता है तो हो सकता हियो की उसे पता ही न चले की वो कर क्या रहा है चीख रहा है , बिस्तर से निचे गिरने वाला है या कुछ और . हो सकता है की उनकी आँखें खुली हो लेकिन वो पूरी तरह से जगे नहीं हों .ऐसे समय में आपको किसी नींद के विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए .

 

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