12 महीने के बच्चे का Development

पहले साल में बच्चे सिर्फ खुद को ही डिस्कवर करते हैं लेकिन अब उसे पता है की उसके चारो ओर पूरी दुनिया उसके इंतज़ार में है । वो अब जल्दी से जल्दी खड़े होना और चलना चाहता है ।यकीन मानिए ये एक नए रोलरकोस्टर की शुरुवात भर है ।

शारीरिक विकास
12 महीने के बाद बच्चे का वजन करीब 8 से 10 किलो हो जाता है और हाइट करीब 70 से 77 सेंटीमीटर । लेकिन अगर इतना नहीं भी है तो घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि अलग अलग बच्चों में ये वेरिएशन अलग अलग हो सकती है । ज्यादातर बच्चे एक साल बाद अपना पहला कदम उठाने लगते हैं।  लेकिन यहाँ भी कुछ बच्चे इस माइलस्टोन को छु पाते हैं तो कुछ नहीं छु पाते हैं ।

आपके कॉफ़ी टेबल और सोफे के बीच में कब वो बिना सहायता के आना जाना शुरू कर दे तो समझिये की बस अब वो ओन वहला कदम उठाने के कगार पर है । और जहाँ तक उसे ख़ुशी मिलने के बात है उसे सबसे ज्यादा ख़ुशी डब्बों में सामान भरने और फिर उसे खाली करने में आता है ।और ये भरने और खाकी करने में केवल डब्बे ही नहीं आपका पर्स भी आता है इसीलिए संभाल कर रखें । इन सबका मतलब यही है की बच्चे का विकास बड़ी तेजी से हो रहा है और उसके मोटर स्किल्स डेवलप हो रहे हैं ।

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आप अगर गौर करेंगे तो पाएंगे की वो एक हाथ दूसरे के मुकाबले ज्यादा इस्तेमाल करता है । यही वो समय है जब बच्चों के हाथों का परेफरेंस पता लगता है । मोटर स्किल्स डेवेलप होने के साथ साथ वो कप को हाथों में पकड़ना सीखेगा, अपनी उंगलियों से खाने की कोशिश करेगा यहाँ तक की खुद ही कपड़े पहनने की भी कोशिश करेगा । जब वो खड़ा होता है तो दुनिया को एक नयी ऊंचाई से देखता है और जैसे जैसे उसकी मांसपेशियाँ मजबूत होने लगती हैं वैसे वैसे वो औने लिए नए नए खेल ढूंढता है । गेंद या कोई और सामान फेंकना, खिलौने वाले कार चलाना, सोफे पर चढ़ना, आदि अभी उसके सबसे पसंदीदा खेल हैं ।

संज्ञानात्मक विकास

इस साल बच्चे का विकास पूरी तरह से बाहरी दुनिया पर टिका है। अब उसे धीरे धीरे एहसास होने लगा है की उसके आसपास की दुनिया उसकी सोच से बहुत बड़ी और अनोखी है । जहाँ पहले उसे अपने पेरेंट्स ली गॉड में ही बैठ कर यहाँ वहां जाना होता था वहां आज वो अपने घुटनों पर रेंग रेंग कर चले जाते हैं । यही वो समय भी है जब उसकी मेमोरी का विकास होता है । इसी समय उसे रंगों और अलग अलग आकारों में बताने की शुरुवात करनी चाहिए ।

दुनिया की डिस्कवरी के साथ साथ उस दुनिया पर अपने असर का पता भी बच्चे को अभी ही लगता है ।आपका बच्चा अब धीरे धीरे समझ रहा है की उसके हर एक्शन का एक रिएक्शन उसे मिलता है । वो अब इस समझ को विकसित कर रहा है की वो सच में कुछ कर सकता है । अब वो आओनी ही पसंद के खेल खेलना शुरू कर देगा जैसे गेंद लुढ़कना या आपकी नाक को दबाना आदि। उसे जो चीज़ पसंद है वो उन चीजों की ओर इशारा करके आपको बताने की कोशिश करेगा । ये द्विपक्षीय कम्युनिकेशन की शुरुवात भर है ।इसी समय बच्चे टाटा, बाय बाय, या किस्सी करना सीखते हैं । लेकिन इसका मतलब ये नहीं है की आपके जाने से उनपर फर्क नहीं पड़ता।

सोशल और इमोशनल विकास 

दुनिया को एक्स्प्लोर करना बहुत रोमांचित करने वाला काम है लेकिन थोड़ा डरावना भी है । दुनिया बहुत बड़ी है, बच्चा खुलके इसे एक्स्प्लोर करना चाहता है लेकिन तभी तक जबतक आप उसके आसपास हैं । एक्सप्लोरेशन के दौरान वो बार बार ये चेक करता है की आप उसके आसपास हैं या नहीं । इस समय अब बच्चा थोड़ा शर्मिला भी हो सकता है । आपसे दूर होने का डर और नए लोगों के आने से वो थोड़ा सहम सकता है लेकिन चिंता न करें ये सब बड़े होने का हिस्सा है ।

आपका बच्चा अब अलग अलग लोगों के बीच फर्क करना सीख रहा है । उसे सबसे घुलने मिलने के लिए फ़ोर्स न करें वो औने आप लोगों को औने ढंग से समझ लेगा । सकारात्मक पहलु देखें तो अब आपके अलावा वो और भी कुछ लोगों से बांड बनाने की कोशिश करेगा । कई बच्चों के साथ खेलते समय हो सकता है की आपका बच्चा किसी के साथ ऑय कांटेक्ट बनाने की कोशिश करे । यहाँ तक की खिलौने से खेलने के बाद वो औने खिलौने दूसरों को दे भी सकता है। ये एक खूबसूरत दोस्ती की शुरुवात भी हो सकती है ।

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और इन सबसे प्यारी बात ये है की अब वो आपको गाके लागाकर किस्सी देकर प्यार करने की कोशिश करेगा । बच्चे के बड़े होने की इस अवस्था में आपको हमेशा उसके साथ रहना चाहिए । उसे खुद से चीजें भले ही एक्स्प्लोर करने दीजिये लेकिन हमेशा उसके आसपास ही रहिये ताकि उसमें सुरक्षा की भावना बनी रहे । वो अब खुद से खाना खाने या जूते आदि पहनने की भी नाकामयाब या कामयाब कोशिश कर सकता है ।
आज़ादी का ये पहला अनुभव उसे जिद्दी भी बना सकता है । बच्चा अभी सब कुछ खुद ही करना चाहता है इसीलिए अगर आप अच्छी सोच के साथ भी उसकी मदद करने की सोचेंगे तो वो तुरन्त नाराज़ हो जाएंगे । उसे खुद से ही काम करने दें और आपसे मदद मांगने का इंतज़ार करें । आपका बच्चा अब छोटा बेबी नहीं है और ना ही ज्यादा बड़े हो गए हैं ।

वो अब भी औने शरीर के बाहर की चीजों को एक्स्प्लोर कर रहे हैं । इसीलिए अगर वो दूसरे बच्चों को मारता पिटता है या उसे अपने खिलौने नहीं देता है या किसी ख़ास खिलौने से ख़ास रिश्ता बना लेता है, तो चिंता न करें । आप मानें या न मानें लेकिन इस उम्र में ये सब बहुत साधारण बात है ।उसे शान्ति से समझाएं लेकिन उसके लिए अभी कोई डिसिप्लिन न बनाएं ।


भाषा और बोली

बोलना सिखने में मेमोरी के विकास का बहुत बड़ा रोल होता है । बाहर से भले ही आपको कुछ न दिखे लेकिन अंदर से उसका दिमाग सभी इनफार्मेशन को सेव करने के लिए ओवरटाइम काम कर रहा होता है । वो आपके बोले गए शब्दों को अपने मेमोरी में कैद शब्दों से मैच कराने की कोशिश करता है । उसकी शब्दावली में विकास होना इस बात का सूचक है की अब वो साधारण से इंस्ट्रक्शन को सुनना और समझना शुरू कर देगा ।

और क्या पता वो अब छोटे छोटे फ्रेज के जवाब अभी से दे रहा हो जैसे "वो बॉल दे दो" या "उस खिलौने को बॉक्स में डाल दो" आदि । अगर आप उसे इशारा करते हुए किसी चीज़ के बारे में बताएंगे तो उसे जल्दी समझ आएगा ।बच्चे आँख मिलकर बस्ती क्र इ से भी जल्दी समझते हैं । ज्याफटर बच्चे इस उम्र तक एक दो शब्द बोलना सिख जाते हैं जैसे "मम्मा", "पापा" आदि ।

वो आपकी आवाज़ से आपकी नक़ल करने की कोशिश भी करेगा । ध्यान से सुनेंगे तो आप भी पहचान पाएंगे की वो किसकी आवाज़ निकालने की कोशिश कर रहा है ।अभी आपका बच्चा खिलौनों से खेलने में मदमस्त होता है इसीलिए उसे अभी ज्यादा टाइम लगेगा शब्दों को सिखने में । शब्दों को बनाना और बोलना आसान काम नहीं है इसमें मांसपेशियों का बहुत ज्यादा इस्तेमाल होता है । अभी बच्चा सिर्फ अपनी मांसपेशियों पर नियंत्रण रखने पर ध्यान दे रहा है।

स्वास्थ और पोषण
12 महीने होते ही उसे MMR (measles, mumps and rubella) की पहली डोज़ और पनेउमोकॉकल की पहली बूस्टर दिलवानी चाहिए । ये कानूनी रूप से भी जरूरी है ।अब बच्चा रेगुलर खाना खाने में अपना इंटरेस्ट खो सकता है और हो सकता है की वो घूमते फिरते कुछ भी खाने की आदत डाल रहा हो । उसे जबरदस्ती खाना खिलाने की कोशिश करना उसके जिद्द को बढ़ावा दे सकता है ।

1 साल में बच्चे का पेट पूरी तरह से विकसित हो चूका होता है इसीलिए अब उसे गाय का दूध पिलाना शुरू किया जा सकता है । फिर भी ध्यान रखें की कहीं बच्चा गाय का दूध पिने से हिचक तो नहीं रहा । अगर ऐसा है भी तो ये टेम्पररी है इसिकिये ज्यादा चिंता करने की कोई बात नहीं है । और इन सबसे ज्यादा जरूरी बात बच्चे के विकास में पेरेंट्स के लिए ये है की अपना फ़ोन या कैमरा हमेशा तैयार रखें ताकि उसके पहले कदम को और ऐसी बहुत सी बातों को आप कैमरे में कैद कर सकें।

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