11 अच्छी आदतें जो अपने बच्चों को 2 साल की उम्र से सीखाना शुरू करें

क्या आप चाहते हैं कि आपके बच्चों में अच्छी आदत हो? यहां हम आपको साधारण बातें बता रहे हैं जो बच्चों में कम उम्र से डालें।

गुण और अच्छी आदतों के साथ बच्चों को बड़ा करने का अर्थ है कि उन्हें हर दिन कुछ नया सीखाना और फॉलो करने के लिए प्रोत्साहित करना। ये एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें बहुत धैर्य और अनुशासन की जरूरत होती है।

हम पहले भी इसपर चर्चा कर चुके हैं कि अगर हम चाहते हैं कि हमारे बच्चों में अच्छी आदतें हों तो किन बातों को नजरअंदाज करनी चाहिए लेकिन आज हम कुछ आदतों पर चर्चा करें जो 2 साल से 9 साल के बीच बच्चों को सीखाना चाहिए।

प्लीजऔर धन्यवाद बोलना

जैसे ही वो अच्छे से बात करने लगे तो उन्हें विनम्र होना सीखाएं। उन्हें प्लीज और सॉरी कहना सिखाएं। कुछ जरूरत हो तो प्लीज कहना और अगर धन्यवाद कहना एक अच्छी आदत है

बीच में नहीं बोलना

एक बार बच्चे बात करना सीख जाएं तो पैरेंट्स को गाइड करना चाहिए कब उन्हें बोलना है और कब उन्हें इतंजार करना चाहिए और अपनी बोलना चाहिए।

‘Excuse me’ कहने की आदत

अगर उन्हें बीच में अपनी बात रखनी है तो पूरी विनम्रता के excuse me बोलें। ये एक ऐसी आदत है जो उन्हें डकार या खांसी लेने के बाद बोलनी आनी चाहिए।

किसी के चेहरे या शारीरिक बनावट पर कमेंट नहीं करना

trying to "fix" your kids

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बड़बोला होना अच्छी आदत नहीं है चाहे वो बड़े हो या बच्चे। इसलिए किसी को भी मोटा कहना गलत है चाहे वो पीठ के पीछे ही क्यों ना हो।

कमरे में आने से पहले दरवाजे से खटखटाना

अगर दरवाजा नहीं भी लगा है तो बंद दरवाजे को खोलने से पहले जरूर खटखटाएं। उन्हें सिखाएं कि जबतक कोई अंदर से हां या ना नहीं बोले तब तक अंदर नहीं जाएं।

असभ्य भाषा का प्रयोग नहीं

बच्चे स्पॉन्ज की तरह होते हैं। वो जो देखते हैं चाहे वो टीवी शो या बड़ों को वही आत्मसात कर लेते हैं। कई बार उन्हें पता भी नहीं होता कि उनका रवैया या बोलने का तरीका गलत है। आप उन्हें सही तरीका बता सकते हैं कि कैसे वो असभ्य भाषा बोलने की आदत ना डालें।

दूसरों का मजाक ना उड़ाना

किसी को चिढ़ाना या मजाक उड़ाना बहुत ही बुरी आदत होती है ये सभी जानते हैं। पैरेंट्स को बच्चों की छोटी छोटी बातों का ध्यान रखना चाहिए और किसी का बैकग्राउंड कितना भी गलत क्यों ना हो उसका मजाक नहीं उड़ाना चाहिए।

खांसते या छींकते वक्त मुंह पर हाथ रखना

दूसरो का ध्यान रखते हुए बच्चों को खांसते या छींकते वक्त मुंह पर हाथ रखने की आदत होनी चाहिए।

लोगों के सामने नाक में उंगली ना डालना

कुछ बच्चों में नाक में उंगली डालने की आदत होती है। उन्हें सिखाएं कि लोगों के सामने ऐसा ना करें या फिर बाथरुम में जाएं।

अगर कुछ बोरिंग हो तो मुंह ना बनाएं

बच्चे कई बार क्लास में, चर्च में होते हैं लेकिन उन्हें समझाएं कि हमेशा मजाक नहीं होता।उन्हें धैर्य के साथ रहना चाहिए। हो सकता है ये बच्चों के काफी मुश्किलों भरा हो लेकिन लगातार समझाने से वो जरूर सीख जाएंगे।

कुछ जरूरत हो तो विनम्रता से पूछें

जब खाना खा रहे हों या कुछ चाहिए तो विनम्रता के साथ मांगे और बाद में धन्यवाद जरूर बोलें।

आप इस लिस्ट में और कौन-कौन सी अच्छी आदतें जोड़ना चाहेंगी?