Healthy Lifestyle के साथ 35 साल के बाद भी माँ बनना आसान है

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जो महिलाएं 35 साल के बाद गर्भवती होना चाहती हैं उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती है उनका स्वास्थ्य . उदाहरण के लिए मुंबई की प्रतिभा कौशल (बदला हुआ नाम) जो पेशे से इंजिनियर हैं वो बाय चॉइस हेल्थ जंकी हैं यानी स्वास्थ्य पर ध्यान देती हैं . कौशल 37 साल की उम्र में सफलतापूर्वक गर्भवती होने में कामयाब रहीं.कौशल बताती हैं “मैं अपने उम्र के लोगों के मुकाबले मोटी नहीं थी . मैंने काम में और अपने लाइफस्टाइल में खुद को हेल्थी बनाए रखा . यही एक चीज़ है जो आपको चाहिए अगर आप अधिक उम्र में माँ बनना चाहती हैं”

मैच्योर प्रेगनेंसी क्या है?

जब कोई महिला 35 या उससे ज्यादा के उम्र में प्रेग्नेंट होती हैं तो उसे मैच्योर प्रेगनेंसी कहते हैं . कई स्टडी तो यहाँ तक बताते हैं की ज्यादा उम्र में प्रेग्नेंट होने वाली महिलाओं में कई तरह की जटिलताएं होने की भी संभावना बहुत बढ़ जाती है . ये जटिलताएं बहुत दिनों तक भी आपका पीछा कर सकती हैं .

गुडगाँव की वेल वीमेन क्लिनिक में डायरेक्टर और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नुपुर गुप्ता ने theIndusparent.com को बताया “हालांकि इस गर्भवती होने में उम्र एक जरुरी फैक्टर है लेकिन अगर 35 की उम्र के बाद भी एक स्वस्थ लाइफस्टाइल अपनाई जाए तो सफलतापूर्वक गर्भ धारण किया जा सकता है”

मुंबई में मालपानी इनफर्टिलिटी क्लिनिक में मेडिकल डायरेक्टर डॉ. मालपानी ने इंडसपैरेंट से बात करते हुए बताया “हाँ ये सही है की महिलाएं अब गर्भवती होने की अवस्था को टाल रही हैं क्योंकि अब तकनीक मौजूद है जिससे अधिक उम्र में भी गर्भवती हुआ जा सकता है .”

हालांकि दोनों एक्सपर्ट ये भी मानते हैं की 35 की उम्र के बाद गर्भवती होने वाली महिलाओं को किसी भी तरह की जटिलताओं के लिए भी तैयार रहना चाहिए .”

35 साल के बाद गर्भवती होने के रिस्क फैक्टर

35 साल के बाद गर्भवती होना बहुत ही रिस्की माना जाता है . द ह्यूमन एंड फर्टिलाइजेशन एंड एम्ब्र्योलोजी अथॉरिटी , यूनाइटेड किंगडम 35 साल के बाद फर्टिलिटी घटने के ये कारण बताते हैं :

  • ओवुलेशन की फ्रीक्वेंसी घटने से फर्टिलिटी में बहुत कमी आती है
  • एग्स की गुणवत्ता , साइज़, और संख्या में कमी आती है
  • गर्भपात होने की संभावना बढ़ जाती है
  • स्पर्म काउंट का कम हो जाना
  • आपातकालीन सीजेरियन सेक्शन की संभावना
  • बच्चों में डाउन सिंड्रोम होने की संभावना

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स्वास्थ्य से जुडी अन्य समस्याएं: 

गुडगाँव की वेल वीमेन क्लिनिक में डायरेक्टर और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नुपुर गुप्ता बताती हैं की कैसे 35 साल से ज्यादा उम्र में प्रेग्नेंट होने से स्वास्थ्य सम्बन्धी और भी समस्या भी हो सकती हैं .

  • क्रोनिक स्वास्थ्य समस्याएं :डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर आदि 30 से 40 साल की महिलाओं में आम बात होती है . “इस बात को समझ लें की आपको इन सभी समस्याओं को नियंत्रण में रखना होगा अगर आपको 35 की उम्र के बाद भी प्रेग्नेंट होना है तो क्योंकि ये आपके होने वाले बच्चे को भी रिस्क में डाल सकती हैं”
  • जन्म से पहले ही बच्चे की मौत: 30 साल से अधिक उम्र में प्रेग्नेंट होने वाली महिलाओं में बच्चे के जन्म से पहले ही मृत्यु या कम वजन के होने की संभावना ज्यादा होती है
  • सीजेरियन बर्थ: इस प्रोसेस का इस्तेमाल भी अधिक उम्र की महिलाओं में ज्यादा होता है .यहाँ तक की आजकल ज्यादातर महिलाएं सीजेरियन सेक्शन के द्वारा ही डिलीवरी करती हैं ताकि बच्चे और माँ के रिस्क को कम किया जा सके .

वो आगे बताती हैं की इन सभी जटिलताओं के बावजूद भी सुरक्षित तरीके से माँ बना जा सकता है.

 

35 के उम्र के बाद भी सुरक्षित तरीके से माँ बनना

उनके मुताबिक ये कुछ तरीके हैं जिनसे आप 35 की उम्र के बाद भी सुरक्षित रूप से माँ बन सकती हैं .

  • स्त्री रोग विशेषज्ञ से मिलें और अपनी पूरी जांच करायें
  • रेगुलर पैरेंटल केयर अपनाएं .इससे आप अपनी और बच्चे के हेल्थ को मॉनिटर कर पाएंगी .अगर आपको किसी तरह की शंका हो तो अपने केयर प्रोवाइडर से इसके बारे में बात करें और अपनी तसल्ली करें .
  • स्वस्थ भोजन लेना शुरू करें, सुपर फूड्स खाना शुरू करें जिनमें आयरन, कैल्शियम, फोलेट, फाइबर आदि प्रचुर मात्रा में मौजूद हों .
  • अपने वजन को ध्यान से बढायें ,आप दो लोगों के लिए खा रही हैं ये सोच के हड़बड़ी न करें .
  • खुद को फिट, हेल्थी, एक्टिव और एनेर्गेटिक रखने के लिए साधारण फिजिकल एक्टिविटी करते रहें .
  • प्रेगनेंसी के दौरान शराब, धुम्रपान, ड्रग्स आदि से दूर रहें
  • आपके हेल्थ केयर के द्वारा दिए गये किसी भी दवाई का सही तरह से सेवन करें
  • क्रोमोसोमल अनियमता के पैरेंटल टेस्टिंग के बारे में पता करें

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35 साल के बाद प्रेग्नेंट होने वाली महिलाओं के लिए पैरेंटल टेस्टिंग

आप भले ही हेल्थी लाइफस्टाइल अपना लें, हेल्थी डाइट लेने लगें, आपको हेल्थ चेक अप और पैरेंटल टेस्ट की जरूरत पड़ेगी ताकि आप तय कर सकें की आपके और आपके बच्चे के साथ सब ठीक है या नहीं .गुडगाँव में वेल वीमेन क्लिनिक की डॉ. गुप्ता कुछ टेस्ट के बारे में बताती हैं जो 35 से ऊपर की हर प्रेग्नेंट महिला को करनी चाहिए :

  • अमिनोसेंटसीस : इस पैरेंटल टेस्ट में डाउन सिंड्रोम, सिकल सेल में खराबी, सिस्टिक फाइब्रोसिस, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, आदि की जांच की जाती है .
  • नुकल ट्रांस्लुसेंसी स्क्रीनिंग : इसे NT या नुकल फोल्ड स्कैन भी कहते हैं . ये एक नॉन-इनवेसिव टेस्ट है
  • मैटरनीटी-21 प्लस टेस्ट :ये नया ब्लड टेस्ट है जो प्रेगनेंसी के 10 महीने के भीतर किया जाता है. इससे डाउन सिंड्रोम और बाकी क्रोमोसोमल अनियमता जिनमें ट्राइसोमी 18, 13 शामिल है , इसके अ;आवा सेक्स क्रोमोसोम अनियामता का भी पता चल जाता है
  • कोरिओनिक विल्ली सम्प्लिंग : इससे बर्थ डिफेक्ट , जेनेटिक्स डिफेक्ट आदि का पता लगाया जाता है .
  • अल्ट्रासाउंड : इससे गर्भके अन्दर भ्रूण की संख्या का पता लगाया जा सकता है . इससे बच्चे के स्वास्थ्य का भी पता चलता है .

हालांकि ये बात भी नोट करने वाली है की एक अच्छी संख्या में 35 से ज्यादा उम्र की महिलाएं सफलतापूर्वक माँ बन जाती हैं .मेडिकल साइंस की तरक्की ने ऐसा मुमकिन कर दिया है .इसके बावजूद भी 35 से अधिक उम्र की माँ बनने की इक्षा रखनेवाले महिलाओं को रिस्क फैक्टर अपने दिमाग में रखना चाहिए

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