हिंदू श्राद्ध या पितृ पक्ष में ना करें ये 5 चीजें

इस अवधि के दौरान हिंदू कई परंपराओं को मानते हैं और इसे अपने पूर्वजों के सम्मान के रूप में लिया जाता है।

हर साल पूरे भारत में श्राद्ध और पितृ पक्ष को हिंदू मानते हैं। पितृ पक्ष 16 दिन की अवधि होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस समय में लोग अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि और सम्मान देते हैं। इसलिए कई लोग इसे शोक अवधिमानते भी हैं।

पितृ पक्ष भादप्रद में पूर्णिमा के दिन से शुरू होता है और इस 16 दिन के पितृ पक्ष अवधि दौरान पिंड पूजा की जाती है जिसे पूर्वजों को श्राद्ध देना भी कहा जाता है। इस साल पितृ पक्ष 30 सितंबर को खत्म होगा।

पंडित द्वारा जिनका श्राद्ध किया जाना है उनकी पुण्यतिथी ध्यान में रखकर पिंडदान की तारीख तय की जाती है।इसके बाद घर में पूजा की जाती है और सात्विक भोजन बनाया जाता है।

हिंदू श्राद्ध या पितृ पक्ष में ना करें ये 5 चीजें

हिंदू श्राद्ध या पितृ पक्ष में ना करें ये 5 चीजें

कुछ प्रसाद जानवरों को जैसे कुत्ते, बिल्ली, कौआ को भी खिलाने की प्रथा है क्योंकि माना जाता है कि हमारे पूर्वज जानवर का रूप धारण कर इस दिन हमें देखने आते हैं।

अपने पूर्वजों को सम्मान दिखाते हुए इस अवधि में हिंदू कई रीति-रिवाजों को मानते हैं और इस दौरान कई चीजें करने की सलाह दी जाती है।

1.किसी को भी भोजन या पानी के लिए मना ना करें, चाहे अजनबी ही क्यों ना हो

ऐसी मान्यता है कि हमारे पूर्वज पितृ पक्ष के दौरान घर आते हैं इसलिए किसी को भी इस दौरान भोजन या पानी के लिए मना ना करें फिर चाहे वो अजनबी ही क्यों ना हो।

2.जानवरों को कष्ट ना पहुंचाएं

जानवरों को इस दौरान बिल्कुल भी कष्ट ना पहुंचाएं खासकर कौआ, बिल्ली और कुत्ते को पितृ पक्ष में प्रसाद दिया जाता है इसलिए माना जाता है कि इस समय इन्हें हानि ना पहुचाएं।

3. मांसाहारी भोजन

हिंदू मान्यता के अनुसार पितृ पक्ष के दौरान मांस और अंडा नहीं खाना चाहिए। इस दौरान शुद्ध सात्विक भोजन खाया जाता है। यहां तक खाने में प्याज लहसुन भी नहीं डालना चाहिए। हालांकि कई लोग इस रिवाज को अब नहीं मानते हैं।

4. नाखून काटना और शेव

चूंकि इस समय को शोक अवधि माना जाता है इसलिए नाखून काटना, शेव करना या बाल नहीं कटवाने चाहिए और इसे कई घरों में आज भी माना जाता है।

5. नए कपड़े, जेवर, कार या संपत्ति

कई हिंदू इस दौरान कुछ भी नया नहीं खरीदते हैं जैसे जेवर, नए कपड़े, संपत्ति या कार भी नहीं। इस अपने बड़ों के सम्मान में किया जाता है इसलिए इस दौरान किसी भी तरह के सेलिब्रेशन को नजरअंदाज किया जाता है।