हाईपर ऐक्टिव बच्चे को संभालना आसान हो सकता है जानिए कैसे

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लेकिन जो बच्चे अधिकांश तौर पर अक्रामक हो जाते हैं या उन्हें किसी भी चीज का ध्यान नहीं रहता और छोटी-छोटी बातों में भी लापरवाही कर बैठते हैं साथ ही किसी एक काम में अपना दिमाग क्रेंद्रित नहीं कर पाते तो उन्हें अटेंशन डेफिसिट हाइपर ऐक्टिविटी डिसार्डर से ग्रसित माना जा सकता है ।

सामान्य रुप से सभी बच्चे बदमाशी करते हैं या कभी-कभी पैरेंट्स की बातों को अनसुना कर देते हैं । लेकिन जो बच्चे अधिकांश तौर पर अक्रामक हो जाते हैं या उन्हें किसी भी चीज का ध्यान नहीं रहता और छोटी-छोटी बातों में भी लापरवाही कर बैठते हैं साथ ही किसी एक काम में अपना दिमाग क्रेंद्रित नहीं कर पाते तो उन्हें अटेंशन डेफिसिट हाइपर ऐक्टिविटी डिसार्डर से ग्रसित माना जा सकता है ।

घर में ऐसे बच्चे अपने माता-पिता पर गुस्से का इज़हार कर सकते हैं और स्कूल में साथियों के साथ भी इनका तालमेल ठीक नहीं हो पाता है । इस समस्या का समाधान अगर समय से ना किया जाए तो भविष्य में बच्चे की पर्सनल और प्रोफेशनल लाईफ इससे प्रभावित हो सकती है ।

hyperactive child pencil on nose हाईपर ऐक्टिव बच्चे को संभालना आसान हो सकता है जानिए कैसे

ज़रुरी नहीं कि जो बच्चा आपको मानसिक रुप से थोड़ा परेशान लगा रहा है उसके बारे में दूसरों का भी यही ख्याल हो । हाईपर ऐक्टिव और नार्मली ऐक्टिव बच्चों के बीच अंतर पता करना मुश्किल हो सकता है । कई बार अधिक शरारती बच्चों के व्यवहार को हम अधिक चंचल होने या ज़िद्दी होने का नाम देते हैं ।

ये बच्चे सामान्यतया दूसरे बच्चों की अपेक्षा अधिक स्फूर्ति रखते हैं लेकिन स्कूल जाने वाले बच्चों को एडीएचएडी होने पर उनके शिक्षक और पैरेंट्स दोनों को परेशानी होती है । इन्हें संभालकर रखना और इन्हें बेहतर देखभाल के साथ दिशा देना माता-पिता के लिए भी चुनौतीपूर्ण होता है ।

आइए इस लेख के माध्यम से हम हाईपर ऐक्टिव बच्चों को सामान्य अवस्था में लाने के विषय पर गौर करते हैं...

क्या सचमुच आपके बच्चे को मनोचिकित्सक की आवश्यकता है !

  • अगर बच्चा हर वक्त सुपर ऐक्टिव रहता हो
  • सामान भी जान-बूझ कर तोड़ता हो
  • दोस्तों के प्रति व्यवहार अक्रामक हो
  • स्कूल से होमवर्क ना करने या अनावश्यक गतिविधियों की शिकायत मिले
  • अगर वो कॉन्सनट्रेट करने में असमर्थ हो
  • गुस्से पर काबू ना हो और वो समाज से अलग प्रतीत होता हो ।
  • इन सभी लक्षणों पर गौर करने के बाद आप किसी बाल मनोरोग विशेषज्ञ से मिल कर इस विषय में चर्चा कर सकती हैं ।

 

ऐसे बच्चों की देखरेख कैसे करें

हाईपर ऐक्टिव बच्चों का ऐनर्जी लेवल बहुत अधिक रहता है इसलिए अगर आपने उनकी ऊर्जा का सदुपयोग करना सीख लिया तो उनको संभालना आसान हो जाऐगा । स्कूल से आने के बाद के समय को कैसे वो सही कामों में लगा सकते हैं इस पर विचार करना शुरु करें ।

पढ़ाई के अलावा आप उन्हें कुछ अन्य मज़ेदार गतिविधियों में व्यस्त कर सकती हैं ताकि उनका मन लगा रहे ।

  • घर के छोटे कामों में उनकी मदद लें
  • रुल बुक बनाएं जिसे फॉलो करना अनिवार्य हो .
  • उनके लिए दिनचर्या बनाने के साथ अपने लिए भी बनाएं
  • बच्चों को प्रोत्साहित करना ज़रुरी होता है इसलिए छोटे रिवार्ड्स भी दें
  • लगातार पढ़ाई ना करवाएं हर 30 मिनट में 5 मिनट का ब्रेक दें
  • उनसे दोस्ती बना कर रखें ताकि आप उन्हें क्रूर कतई ना लगें ।