हाइपोथायरॉयड से जुड़े 6 मिथक..कहीं आप भी तो नहीं करतीं इन पर विश्वास

मिथक 1: थायरॉयड के कारण आपका वजन बढ़ता है।

अगर आपको भी मेरी तरह हाइपोथॉयरॉयड की समस्या है तो संभवतकई लोगों ने अब तक आपको बोला होगा कि आप कभी वजन नहीं कम कर पाएंगी।  लेकिन मैं अगर आपसे कहूं कि ये गलत है तोजी हां मुझे हाइपोथायरॉयडिज्म की समस्या है और इसका पता मुझे तब चला जब मैं गर्भधारण करने की कोशिश कर रही थी।आपको विश्वास नहीं होगा कि मैं गर्भधारण थायरॉयड  की वजह से नहीं कर पा रही थी। इसके बारे में मैंने आपको पहले के लेख में बताया भी है। 

आज मेरी बेटी 6 साल की है और लगभग 7 सालों तक थायरॉयड पीड़ित रहने के बाद मैंने पाया कि इससे जुड़े कई मिथक और झूठी कहानियां भी हैं। यहां मैं आपको सबसे साधारण मिथकों के बारे में बता रही हूं।  

1. आपका अपने वजन पर कोई कंट्रोल नहीं रहता

ये पूरी तरह गलत है और मैं आपको बता दूं कि पहले मुझे भी इसपर विश्वास हो गया था। लेकिन कई सालों के संघर्षपढ़ाई और कई लोगों के साथ चर्चा करने के बाद मैंने पाया कि थायरॉयड जैसी कोई भी लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारी  अच्छे लाइफस्टाइल को अपनाकर ठीक किया जा सकता है। 

मेडिसीन प्रैक्टिसनर डॉ जॉनथन डिसूजा का कहना है कि "हाइपोथायरोडिज्म को आसानी से सही दवाओं से कंट्रोल किया जा सकता है। सुबह वॉक करना और सुबह के धूप में हल्के व्यायाम से आपको काफी फायदा मिलेगा। जब आपकी त्वचा और मांशपेशियों को सुबह की धूप लगती है तो उन्हें सीधा विटामिन डी मिलता है जो काफी फायदेमंद होता है।अपनी दवाओं को सही समय पर लेनास्वस्थ खानाव्यायाम से आप आसानी से वजन कंट्रोल कर सकते हैं।

 

अगर आप रेगुलर चेकअप कराते रहें और सही समय पर दवा लेते रहें तो हाइपोथायरॉयडिज्म का आपके वजन के बढ़ने से कुछ भी लेना देना नहीं है। हल्का सा ध्यान देकर आप अपना वजन कंट्रोल कर सकते हैं। 

इसलिए अगर आपने व्यायाम करना थायरॉयड की वजह से बंद कर दिया है तो मैं आपको बता दूं कि अब जरूरत है कि आप वापस फिटनेस पर ध्यान दें। अगर आपको लग रहा है कि ये संभव नहीं है तो ऐसा ना सोचें क्योंकि ये आसानी से संभव है। बेटी के जन्म के 6 सालों बाद मैंने अपना 16 किलो वजन घटाया वो भी सिर्फ हेल्दी डाइट और व्यायाम को फॉलो करके। 

 2.आप जब चाहे दवा बंद कर सकते हैं

थायरॉयड की सही दवा लेना सबसे महत्वपूर्ण है लेकिन ये ब्लड टेस्ट T3, T4 और TSH टेस्ट के बाद ही दिया जा सकता है जिसे थायरॉयड विशेषज्ञ को देखना चाहिए।

एक बार आपने डॉक्टर से मिल लिया और दवा की सही डोज लेने लगे फिर ज्यादातर 6 महीने में एक बार आपको ब्लड टेस्ट कराने की जरुरत पड़ती है। 

थायरॉयड की दवाएं खाली पेट में ली जाती है और इसे लेने के एक घंटे बाद ही कुछ भी खाने पीने की सलाह दी जाती है।

आप जब भी टेस्ट करवाती हैं और आपको पता चले कि आपका TSH लेवल कम हो गया है तो भी आपको दवा लेना बंद नहीं करना चाहिए। हमेशा याद रखिए कि ये सिर्फ डॉक्टर ही कर सकते हैं क्योंकि वो भी थायरॉयड विशेषज्ञ हैं। 

3. आप इलाज के लिए किसी भी डॉक्टर के पास जा सकते हैं

किसी भी डॉक्टर या फिजिशियन से मिलने से आपका फायदा से अधिक नुकसान होगा। अगर आप मेरी तरह हाइपोथायरॉयडिज्म से पीड़ित हैं तो आपको सिर्फ थायरॉयड स्पेशलिस्ट के पास जाना चाहिए जिन्हें इंडोक्रिनोलॉजिस्ट भी कहा जाता है। 

हाइपो या हाइपरथायरॉयडिज्म इंडोक्रीन ग्लैंड में पाया जाने वाला डिस्ऑर्डर है और इसका इलाज सिर्फ स्पेशलिस्ट से करवाना ही बेहतर होगा। 

किसी फैमिली डॉक्टर या जेनरल प्रैक्टिशनल के मुकाबले इंडोक्रिनोलॉजिस्ट हार्मोन की पढ़ाई ज्यादा गहराई से करते हैं और कहने की जरुरत नहीं है कि यही कारण है कि वो ज्यादा अच्छा इलाज करेंगे। 

4. आपको पत्तागोभी नहीं खाना चाहिए

पत्तागोभी क्रूसीफेरस सब्जी में गिना जाता है और कई लोग मानते हैं कि हाइपोथायरॉयड से ग्रसित लोगों को इसे पूरी तरह अपनी डाइट से हटा देना चाहिए।हालांकि 10-15 दिनों में एक बार पत्तागोभी खाना नुकसानदायक नहीं होता है।

precautions during pregnancy

ऑनलाइन हेल्थ मैगजीन लीव स्ट्रॉन्ग की एक रिपोर्ट के अनुसारपत्तागोभी के सेवन से हाइपोथायरॉडिज्म बढ़ता है, इसके असल में बहुत ही कम तथ्य हैं। पत्तागोभी के कई फायदे हैं जिनके कारण हाइपोथायरॉयड का होना काफी मुश्किल है। पत्तागोभी में सल्फर पाए जाने वाले संयुक्त पदार्थ की वजह से उसमें सुगंध पाई जाती है जो कैंसर से बचाता है।1 कप पत्तागोभी 22 कैलोरी, 32 एमजी विटामिन सी और 2.2  फाइबर हमारे शरीर को देता है।इसलिए कहने की जरुरत नहीं है कि पत्तागोभी भी वजन कम करने के दृष्टिकोण से बेहतरीन सब्जी है।

डॉ जॉनाथन के अनुसार विटामिन डी के लेवल का भी थायरॉयड ग्लैंड पर असर पड़ता है। विटामिन डी से भरपूर भोजन जैसे चीज, मशरुम, फैटी फिश जैसे सेलमन या टूना, अंडे खाने से आप सही मात्रा में विटामिन डी पाते हैं।

5. अगर आप आपको थायरॉयड की समस्या है तो आप जान जाएंगे

आठ साल पहले मेरा वजन ऐसे बढ़ रहा था जैसे पहले कभी नहीं बढ़ा था, लेकिन बाकियों की तरह मुझे भी लगा कि मेरी शादी हुई है और लाइफस्टाइल अच्छा नहीं है इसलिए ऐसा है लेकिन भगवान का शुक्र है कि मैं मीडिया से हूं।

हाइपोथायरॉयडिज्म के भी कई लक्षण होते हैं जिससे आपको आसानी से पता चल सकता है कि आप इससे ग्रसित हैं जैसे वजन का बढ़ना, आलस्य और जल्दी थक जाना आदि।

हाइपोथायरॉयड के लक्षणों में आपकी अंगुठी आपको ना आना, कपड़े बहुत टाइट होना, आपका चेहरा और और आपकी आंखें हल्की सूजी हुई लगना आदि भी शामिल है।

अगर आपने लगातार कुछ दिनों तक पार्टी किया है और थक गए हैं तो ठीक है लेकिन आप एक बार मॉल का चक्कर लगाने के बाद थका हुआ और आलसी महसूस करते हैं तो ये लक्षण है।

6. दवा छोड़कर और लाइफस्टाइल सुधारकर थायरॉयड कंट्रोल कर सकते हैं

हम अक्सर कई टीवी चैनल पर देखते हैं कि लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियां लाइफस्टाइल में सुधारकर ठीक की जा सकती है।

मैं भी इसे मानती हूं लेकिन इसका ये मतलब नहीं होता कि लाइफस्टाइल सुधारें और दवा लेना बंद कर दें। ये गलत है और बिना डॉक्टर से बात किए कभी भी कोई दवा लेना बंद ना करें।

हमेशा याद रखें कि एक अच्छी लाइफस्टाइल विकल्प नहीं बल्कि जिंदगी जीने का तरीका होना चाहिए जैसे आप खाते और सांस लेते हैं। व्यायाम और सही खानपान से आप थायरॉयड पर नजर रख सकते हैं।

अगर आपके साथ भी ऐसा कुछ अनुभव है हमें और हमारे पाठकों के साथ शेयर करें। अपने विचारों को कमेंट बॉक्स में जरुर लिखें।