ये टिप्स सी-सेक्शन के बाद जल्दी ठीक होने में आपकी मदद करेंगे

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प्राकृतिक प्रसव की तुलना में सी-सेक्शन के बाद अधिक दिक्कत मिलती है हालांकि ज़ल्दी से ठीक होकर मातृत्व के सुखद ऐहसास को भरपूर जीने के लिए आप खुद को तैयार कर सकती हैं

गर्भवती महिलाओं के मन में सीजेरियन डिलीवरी को लेकर कई सारी आशंकाएं होती हैं । प्राकृतिक प्रसव की तुलना में सी-सेक्शन के बाद अधिक दिक्कत मिलती है हालांकि ज़ल्दी से ठीक होकर मातृत्व के सुखद ऐहसास को भरपूर जीने के लिए आप खुद को तैयार कर सकती हैं। 

अगर आप प्राकृतिक प्रसव चाहती हैं तो आपको अपने डॉक्टर से लगातार पूछ-ताछ करनी चाहिए कि क्या आपका शरीर शिशु को जन्म देने की अवस्था में पहुंच चुका है या किसी समस्या का संकेत दिखाई दे रहा है । 

ऑपरेशन द्वारा प्रसव तब ही करवाया जाता है जब गर्भ में शिशु की स्थिति सही ना हो । कई बार प्रसव पीड़ा ना होने पर या दर्द अचानक बंद हो जाने पर, शिशु के उल्टा होने की स्थिति में या जनन मार्ग संकीर्ण होने पर भी सी-सेक्शन के द्वारा शिशु को सुरक्षित बाहर निकाला जाता है ।

आजकल सी-सेक्शन में बिकनी कट ही लगाया जाता है ताकि भविष्य में ये निशान दिखने के कम चांसेज़ हों। ऑपरेशन की प्रक्रिया को लेकर आपको भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि सर्जरी शुरु होने के पहले ऐनेस्थीसिया द्वारा कमर के निचले भाग को सुन्न कर दिया जाता है । एक सूई चुभने के बाद आपको कोई दर्द महसूस नहीं होगा और शिशु को इस प्रकार जन्म देना आपके लिए रोमांचित कर देने वाला अनुभव होगा ।

सी-सेक्शन के बाद स्पीडी रिकवरी...

लेकिन प्रसव के बाद मिले जख्म के दर्द को झेलना कष्टप्रद होता है ।कई बार सुनी-सुनाई बातों को सच मानकर हमारा मन भारी हो जाता है और आने वाली परिस्थिति के विषय में सोच कर हम परेशान होते हैं । तो आईए जानें स्पीडी रिकवरी के लिए क्या करना चाहिए... ।

1.सर्जरी के बाद जैसे ही आपको अपने कमरे में भेजा जाता है आपके दोनों पैर सुन्न होते हैं, आप सारी चहलकदमी को सेंस कर सकती हैं पर कमज़ोरी या हल्की मदहोशी जैसी अवस्था के कारण ठीक से बोलने में असमर्थ होंगी ।

2.उस समय आपके केयर टेकर को चाहिए कि वो लगातार आपके तलवे को घिसते रहें । पैर को पूरी ताकत से दबाते रहें ताकि रक्त संचार ठीक हो और पैरों में जान वापस आ सके ।  

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3.अस्पताल का बिस्तर आपको आरामदायक भले ही ना लगे पर तकरीबन 6 दिनों तक आपको वहीं रहना होगा इसलिए संयम रखें और डॉक्टर का कहा मानें ।

4.सर्जरी के बाद जैसे ही पैरों में हलचल कर पाएं आपको करवट बदलने की सलाह दी जाती है ।

5.जख्म पर लगी पट्टी के भीतर टीस सी उठती है जो असहनीय होता है तब आप दर्द निवारक सूई के लिए नर्स से कह सकती हैं ।

6.पहली बार उठ कर बैठने में कष्ट ज़रुर होगा पर सहारे से उठने का प्रयास करें ।

7.ऑपरेशन के 2 दिन बाद से ही आपको चलने का प्रयास करना चाहिए । सीधे खड़े होना इस वक्त नामुमकिन सा लग सकता है पर धीरे-धीरे आप सामान्य रुप से चलने लगेंगी ।

8.इस दौरान आपको खांसने, हंसने या बोलने में भी दिक्कत होगी ।ऐसा कोई भी काम या मूवमेंट जिसमें जख्म वाले हिस्से में खिंचाव हो आपको नहीं करना चाहिए।

9.शिशु को स्तनपान कराने के दौरान उसकी पैर को जख्म तक ना आने दें । अपनी जांघों पर या पेट पर तकिया रख कर आप शिशु को फीड करवा सकती हैं।10.ऑपरेशन के बाद जब भी आपकी गायनो खाना शुरु करने की सलाह दें तब से आपको अपना पेट भर कर रखना चाहिए । ध्यान रहे खाने में फाइबर वाले फल, सब्जी एवं अनाज शामिल करें ताकि कब्ज ना हो ।