ये सिंपल तरीके अपनाए और अपने बच्चे को हेल्दी eater बनाए

आप अपने बच्चे को जैसे खिलाने की आदत डालते हैं बच्चे उसी को अपनाते हैं। अगर आप बच्चे को मैश कर खाना खिलाएंगे तो उसी की आदत होगी

हर मां अपने बच्चों के पीछ प्लेट लिए दौड़ती हैं कि वो बच्चे को प्लेट का पूरा खाना सकें। ये थोड़ा अजीब जरुर लगता है लेकिन सच्चाई है कि ये डरावना भी है क्योंकि ये बच्चों को खाने से दूर ले जाता है और साथ ही एक ऐसा टास्क है जो खत्म कर पाना भी मुश्किल है।

कुछ दिनों पहले ही मैं अपनी एक दोस्त से मिली जिसकी 11 महीने की बेटी है और वो सिर्फ दूध पीती है। मुझे थोड़ा अजीब लगा इसलिए मैं पूछ बैठी कि उसे खाने की आदत अभी तक क्यों नहीं डाली है। उसने बस इतना कहा कि उसने अभी खाना शुरू नहीं किया बस एक दो चम्मच चावल खाती है।

हालांकि मैं कुछ नहीं बोली लेकिन मुझे समझ आ गया कि बच्चों को खाना खिलाना शुरू करना काफी मुश्किल और चैलेंजिग काम होता है और छोटे बच्चों के लिए खाना शुरू करना ही सबसे मुश्किल होता है।मैंने कई माओं को देखा है कि वो दो साल की उम्र तक के बच्चों को दाल-चावल मैश कर खिलाते हैं ताकि बच्चे के गले में अटके। लेकिन ये तरीका गलत है।

आप अपने बच्चे को जैसे खिलाने की आदत डालते हैं बच्चे उसी को अपनाते हैं। अगर आप बच्चे को मैश कर खाना खिलाएंगे तो उसी की आदत होगी और बाद में खाने में काफी समय लगाएंगे। ऐसा मैं अपने अनुभव से बता सकती हूं।

यहां मैं अपने कुछ एक्सपीरियेन्स शेयर कर रही हूं कि जो मैनें अपने बच्चे के साथ अपनाया और उसे हेल्दी खाने खाना खाने की आदत लगाई।    

6 से 9 महीने के दौरान

शुरूआत से ही मैंने सोच लिया था कि मैं अपने बेबी के खाने में वेराइटी का ख्याल रखूंगी और उसे बस चम्मच से मैश करती थी। ये फैसला सही भी था क्योंकि हम बच्चों को जितना सेंसेटिव बनाएंगे उनके लिए आगे मुश्किल होगा।

  •  शुरूआत में मैश किया हुआ चावल और दाल का पानी देती थी जब उसने 6 महीने तक सिर्फ मां के दूध को पीने की उम्र पार कर ली थी।
  • 9 महीने की हो जाने के बाद मैं उसे सूजी खीर, दलिया खिचड़ी, लौकी सूप जिसमें खूब सारी सब्जियां हो देने लगी। मैं सब्जियों को हल्का मैश करती थी ताकि पेट और फूड पाइप फाइबर का आदि हो जाए।
  • बेबी की डाइट में मैंने सेव और केला भी शामिल की। सेव को हल्का स्टीम कर एक कटोरी में देती थी तो केले का भी छोटे छोटे टुकड़े कर देती थी लेकिन कभी मैश नहीं करती थी।
  • पनीर के साथ-साथ अंडे का सफेद हिस्सा भी उसकी डाइट में शामिल किया लेकिन पनीर हमेशा घर के बने होते थे।
  • अपने बेबी को मैंने कभी सेरेलैक या कोई और बेबी फूड नहीं दी जो आसानी से मार्केट में उपलब्ध रहते हैं क्योंकि उसमें चीनी और प्रीजरवेटिव ज्यादा मात्रा में मिले होते हैं।
  • इसकी जगह दूध में मैरी (Marie Biscuit) देती थी या फिर दूध देती थी जो पैक्ड फूड से ज्यादा बेहतर हैं।
  • शाम में सब्जियों का सूप देना मैं सही समझती थी। एक चम्मच तेल में सभी सब्जियों को हल्का भूनकर मैं प्रेशर कुकर में एक मिनट के लिए डाल देती थी और इसे चम्मच से मैश करके देती थी।

एक साल के बाद

बेबी के एक साल के हो जाने के बाद उनका पाचन तंत्र भी मजबूत हो जाता है। लिहाजा हम एक कदम और आगे बढ़कर छोले और राजमा भी उनकी डाइट में शामिल कर सकते हैं।

  • जब मेरी बेटी एक साल की हुई मैं पैन में फ्राई की सब्जियों को देना शुरू की जसे ब्रोकली और बीन्स
  • गाजर को भी बारीक काटकर मैंने खाने में मिलाना शुरू किया।
  • उबले राजमा और छोले उसे काफी पसंद आते थे औऱ वो काफी चाव से खाती भी थी।
  • इसके बाद उसने फल की शुरूआत की जिसमें तरबूज, आम, अंगूर, संतरा और अनानास शामिल थे। मैंने अंडा देना भी जारी रखा।
  • लंच के समय में दाल चावल भी उसके रुटिन का हिस्सा था जिसके साथ घर की बनी दही और खीरा भी शामिल था।दाल के साथ भिंडी और लौकी भी मैं मिला देती थी।
  • डिनर में सूप में ही एक रोटी डाल देने से रोटी भी काफी सॉफ्ट हो जाती थी और ज्यादातर मेरी कोशिश होती थी कि मैं हाथों से उसे खिलाउं जो हर मां पसंद करती है।

18 महीने के बाद

18 महीने तक में उसे रोज के खाने की आदत लग चुकी थी और खुद से खाना भी सीख गई थे हालांकि वो आधा से ज्यादा खाना टेबल पर गिरा देती थी।मैंने कभी उसे मना नहीं किया क्योंकि मैं उसे फैमिली के साथ डिनर करने से डराना नहीं चाहती थी।

उसे ये सब अच्छा लगता था और बड़ी खुशी के साथ वो रोटी या सलाद पापा-मम्मी को पास करती थी। अगर आप जल्दी खाने की आदत डालेंगे तो बेबी को खिलाने में आपको तकलीफ नहीं होगी।जितना आप समय लेंगे बेबी को उस अनुसार ढालने में उतना ही समय लगेगा।

आज मेरी बेटी चार साल की है और वो सारी सब्जियां खाती है। चुकंदर, भींडी और लौकी भी वो चाव से खाती है। आपके बच्चे भी ये सब खाना पसंद करेंगे, यकीन मानिए ।

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Source: theindusparent