सिंदूर ना लगाना, मंगलसूत्र ना पहनना तलाक का आधार नहीं: हाई कोर्ट

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नागपुर का एक पढ़े लिखे शख्स ने हाई कोर्ट से अपील की उसे तलाक चाहिए वो भी सिर्फ इसलिए क्योंकि वो पुरानी मंगलसूत्र पहनने और सिंदूर लगाने की परंपरा में विश्वास नहीं करती।

मैंने अपनी चार साल की शादी में मैं मंगलसूत्र काफी कम दिन पहनी हूं। खासकर तब जब मैं अपने ससुराल जाती हूं तो पहनती हूं। सिंदूर तो मैं शायद ही कभी लगाती हूं, यहां तक की पर्व त्योहार के समय भी नहीं क्योंकि मुझे ये पसंद नहीं है और केमिकल से त्वचा में जलन होती है।

चुंकि मैं इन देसी परंपराओं को नहीं मानती इसका ये मतलब नहीं कि मैं अपनी शादी का सम्मान नहीं करती या इससे मेरे प्रति मेरे पति की धारणा बदल गई।

मैं पूरी तरह आश्वस्त हूं कि सिर्फ मेरे पति नहीं बल्कि कई ऐसे पुरूष हैं जो मंगलसूत्र पहनना या सिंदूर लगाने को पूरी तरह अपनी निजी पसंद मानते हैं। लेकिन जब मैं ये पढ़ी तो चौंक गई!

एक शख्स को तलाक चाहिए क्योंकि...

नागपुर का एक पढ़े लिखे शख्स ने हाई कोर्ट से अपील की उसे तलाक चाहिए वो भी सिर्फ इसलिए क्योंकि वो पुरानी मंगलसूत्र पहनने और सिंदूर लगाने की परंपरा में विश्वास नहीं करती। इसके अलावा उसने ये भी दलील दी कि उसकी पत्नी सर पर पल्लू नहीं लेती।

src=https://hindi admin.theindusparent.com/wp content/uploads/sites/10/2017/02/bahu.jpg सिंदूर ना लगाना, मंगलसूत्र ना पहनना तलाक का आधार नहीं: हाई कोर्ट

इस पुरानी मानसिकता को जानकर जज भी हतप्रभ रह गए और निर्णय उसके विरुद्ध दिया गया।

जज की बेंच ने कहा कि “21वीं सदी में किसी पुरूष को इस आधार पर तलाक लोने का अधिकार नहीं है कि उसकी पत्नी सर पर पल्लू नहीं लेती, मंगलसूत्र नहीं पहनती या मांग में सिंदूर नहीं लगाती। इस सदी में महिलाओं से क्यों इस तरह की उम्मीद रखी जाए कि वो सर पर पल्लू रखेंगी। ये तलाक का आधार नहीं हो सकता।

हैरानी की बात है कि सिर्फ यही एक शिकायत अपनी पत्नी से नहीं थी। उसने जून 1995 में शादी की थी और 1996 में उसे एक बेटी भी हुई थी।

उसके अजीबोगरीब शिकायतें

बॉम्बे हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान उसने कहा कि उसकी पत्नी को ईगो प्रॉब्लन और बेटी के सामने उसे बुरा और नीचा दिखाती है।

उसकी पत्नी ने 2000 के बाद लगातार अनबन की वजह से घर छोड़कर बेटी के साथ चली गई थी।

इसके पहले 2011 में भी इस शादी को तोड़ने की बात की गई थी लेकिन तब केस खारिज कर दिया गया था क्योंकि उसका आरोप की उसकी पत्नी घर छोड़ कर गई है गलत था। उसे घर छोड़कर जाने के लिए मजबूर किया गया था।

. इसके पिछले बार के केस के खारिज होने के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने ये भी ध्यान दिया कि सभी पेपर में सबसे बड़ा कारण सिंदूर ना लगाना और मंगलसूत्र ना पहनना ही बताया गया था।

जाहिर है जज ने इसे हल्के में नहीं लिया और उसे लताड़ लगाई

कोर्ट ने शख्स से कहा

जज की टीम जिसमें वासंती नायक, जस्टिस विनय देशपांडे थे उन्होंने कहा कि “कोई भी ऐसा ठोस सुबूत नहीं कि परिवार के किसी सदस्य ने, खुद पत्नी ने किसी तरह क्रूरता पति पर की हो। फैमिली कोर्ट सही थी कि ना तो पत्नी ने पति के साथ कभी क्रूरतापूर्ण व्यवहार की हो या छोड़कर गई है। “

इस केस के देश के कई पुरूषों की संकीर्ण सोच का पता चलता है। इस तरह के पुरूष अपनी पत्नी को बस संपत्ती समझते हैं और उन्हें पुराने नियम कानून परंपराएं मानने के लिए मजबूर करते हैं। इस केस में ये भी बिंदु था कि बहुओं के साथ हमारे देश में कई बार घटिया व्यवहार किया जाता है।

3 तरह के गलत व्यवहार जो आज भी बहुओं के साथ होते हैं

  • बाहरी : बुढ़े माता पिता की देखभाल की जिम्मेदारी आज भी हमारे समाज में बेटों पर होती है क्योंकि ज्यादातर पैरेंट्स इस तरह से सोचते हैं और बहुओं से यही उम्मीद रखी जाती है। ये भी नहीं सोचा जाता कि वो अपने नए घर में घुल मिल पाई हैं या नहीं। ये कई औरतों के लिए सच्चाई है।
  • जबरदस्ती बातचीत : अपने नए परिवार में एडजस्ट करने उनका ध्यान रखने से लेकर कई बार जिम्मेदारियों की वजह से बहुओं को खुद को अभिव्यक्त करने की आजादी नहीं होती है। हो सकता है कि आप अपने नए परिवार के सभी नए सदस्यों को पसंद ना करे लेकिन उन्हें दिखाना पड़ता है कि वो सबको पसंद करती हैं।
  • बच्चों के बीच तुलना : अगर बेटे या बेटियों से जुड़ी बात हो तो बहुओं के साथ हमेशा अलग व्यवहार किया जाता है। वो अपने दामाद को अधिक तव्ज्जो देते हैं खासकर अगर बेटी की शादी हो चुकी हो।

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Source: theindusparent