सिंदुर..बिंदी..बिछिया..जानिए इनके पहनने के पीछे कारण

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क्या आप उन महिलाओं में से एक नहीं हैं जो रोज बिंदी या सिंदुर लगाती हैं? हम आपको बताते हैं सिंदुर,बिंदी या बिछिया पहनने से क्या फायदे होते हैं।

क्या आप उन महिलाओं में से एक नहीं हैं जो रोज बिंदी या सिंदुर लगाती हैं ? क्या आप जानती हैं कि इनके असल में क्या क्या फायदे हैं?

हो सकता है आप भी उनमें से एक हों जो रोज बिंदी और माथे पर सिंदुर लगाती हैं। लेकिन हो सकता है कि आपको पता ना हो कि सिंदुर और बिंदी लगाने के भी कई फायदे होते हैं और ये वैज्ञानिक तौर पर भी सिद्ध हो चुका है।

क्या आप उन महिलाओं में से एक नहीं हैं जो रोज बिंदी या सिंदुर लगाती हैं ? क्या आप जानती हैं कि इनके असल में क्या क्या फायदे हैं। हम आपको बताते हैं कि सिंदुर, बिंदी या पैरों कि उंगलियों में बिछिया पहनने से क्या क्या फायदे होते हैं। पढ़िए आगे।

1. मांग में ही सिंदुर क्यों

कई लोगों का मानना है कि इससे पता चलता है कि किसकी शादी हो चुकी है, किसकी नहीं – मतलब कुंवारी और शादीशुदा औरतों के बीच का अंतर, लेकिन ये एक ऐसी प्रथा हो जो पिछले 5000 सालों से हमारे देश में चली आ रही है। सिंदुर के बारे में ललिता साहसरानमम और सौंदर्या लाहिरी में भी बताया गया है।

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[Image courtesy: gomama247.com]

हिंदु मान्यता के अनुसार लाल रंग शती और पार्वती की शक्ति का प्रतीक माना जाता है। शती ने अपने जीवन को अपने पति की जिंदगी बचाने के लिए त्याग दिया था।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवी पार्वती सिंदुर लगाती थीं क्योंकि ये अखंड सुहाग की निशानी होती है।

विज्ञान के अनुसार : आयुर्वेद के अनुसार लाल सिंदुर पाउडर सर पर लगाने से हमारे सर के चक्र एक्टिव हो जाते हैं। इसकी वजह से सकारात्मक उर्जा का प्रवाह होता है। सकारात्मक उर्जा का मतलब है कि पति पत्नी के बीच अभी निभेगी और वो स्वस्थ्य रहेंगे।

सिंदुर मरकरी, हल्दी, चंदन और लाइम से बनता है। मरकरी से तनाव दूर होता है और दिमाग एक्टिव रहता है। दिमाग के एक्टिव रहने से बल्ड प्रेशर भी कंट्रोल में रहता है मतलब सेक्सुअल लाइफ भी अच्छी होगी। आप सभी को पता होगा कि हल्दी में एंटी बैक्टेरियल गुण होते हैं और चंदन से ठंढक मिलती है।

2. आप बिंदी क्यों लगाती हैं

भले आज ज्यादातर महिलाएं बिंदी लगाती हैं, पहले के समय में बिंदी चिपकाया नहीं बल्कि बिंदी की जगह पर तिलक लगाया जाता था। इसके पीछे मान्यता थी कि ये तीसरे आंख को दिखाता है जो वो चीजें देख सकती है जो बाकी नहीं देख सकती।

पुराने जमाने में बिंदी से औरत की जाति तक पता चल जाती थी जैसे क्षत्रिय लाल तिलक लगाती थीं तो ब्राह्मण चंदन का टीका।

धार्मिक मान्यता की बात करें तो लाल रंग देवी की शक्ति का प्रतीक होता है जबकि कुमकुम, जिसे हल्दी, चंदन और लाइम से बनाया जाता है, उसके कई फायदे होते हैं। 

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[Image courtesy: macaulay.cuny.edu/]

स्वास्थ्य के लिए – ऐसा माना जाता है कि जहां बिंदी लगाई जाती है वहां अंजा चक्र होता है। अंजा चक्र शरीर का छठा चक्र होता है जो तनाव, इसोमेनिया और टेंशन को दूर रखने में मदद करता है।  

महिलाएं बिंदी इसलिए लगाती हैं ताकि वो तनाव को दूर रख सकें और घर में खुशियां रहें। लाल बिंदी शादी, सम्मान, प्यार, खुशियां और शादी की सफलता को दिखाती है।

3. शादीशुदा औरतें बिछिया (Toe Ring) क्यों पहनती हैं

बिछिया भी सिर्फ शादीशुदा महिलाएं ही पहनती हैं।बिछिया पहनने के पीछे सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि वैज्ञानिक कारण भी हैं। रामायण में भी इसकी व्याख्या की गई है। जब रावण ने सीता का अपहरण किया था तब सीता ने बिछिया निकाल कर फेंक दिया था ताकि राम उन्हें खोज सकें। 

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[Image courtesy:  सिंदुर..बिंदी..बिछिया..जानिए इनके पहनने के पीछे कारण

वैज्ञानिक कारण है कि जिस उंगली मे बिछिया पहनी जाती हैं वो nerve सीधे गर्भाशय और दिल से जुड़ी होती है। इससे पीरियड का कंट्रोल भी अच्छे से होता है।

हालांकि आजकल महिलाएं सोने का बिछिया पहनती हैं लेकिन चांदी का पहनना ज्यादा अच्छा माना जाता है क्योंकि ये धरती की पोलर एनर्जी को खींचती है औऱ शरीर तक पहुंचाती है।

आयुर्वेद के अनुसार कोई धातु हमे जरुर पहननी चाहिए और पैर मे बिछिया पहनने से धरती से पॉजिटिव एनर्जी लेकर आपके शरीर तक पहुंचाने में मदद करेगी।

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Source: theindusparent