“मेरी सास की सनक की वजह से मेरी शादी टूट गई...”

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पति को उसकी मां की वजह से खो देना तो मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था...

रीता और राज की मुलाकात लेक्चर हॉल में पढ़ाई के दौरान हुई। दोनों मेडिकल कॉलेज में पढ़ते थे। अधिकतर प्रोजेक्ट, असाइनमेंट की वजह से दोनों साथ में काम करते थे और उनकी केमेस्ट्री भी और मजबूत हो गई। जल्द ही दोनों एक दूसरे को डेट करने लगे।

6 साल के बाद राज ने रीता को प्रपोज किया। उनकी शादी भी काफी भव्य तरीके से हुई और रीता कहती हैं कि राज से शादी करना उनकी जिंदगी की सबसे अच्छी घटना थी। लेकिन उनकी बॉन्डिंग अपनी होने वाली सास से नहीं बन पाई थी। वो हस्तक्षेप करने वाली, प्रतिद्वंद्वी और जहर के समान थी।

हमारे साथ बैठकर रीता ने अपने दिल की सारी बात हमें बताई कि कैसे घर में स्थिति इतनी बुरी हो गई कि उनके पति बच्चे को लेकर और उन्हें छोड़कर चले गए।

ये है उनकी कहानी...

मुझे हमेशा से मेरी सास पसंद नहीं आई। शादी के पहले भी नहीं। ये असल में दो अलग अलग पर्सनैलिटी, विचार, लाइफस्टाइल, मूल्यों का टकराव था।वो खुद से ही मोहित, आत्मलीन और बहुत ज्यादा ड्रामा करने वाली थी। वो अपने बेटे को हमेशा इमोशनल ब्लैकेल करती थी। ना सिर्फ अपने बेटे को बल्कि मुझे भी ब्लैकमेल करती थी।

src=http://www.theindusparent.com/wp content/uploads/2016/09/saas bahu new.jpg “मेरी सास की सनक की वजह से मेरी शादी टूट गई...”

वो कुछ भी कर देती थी, दंबगई दिखाती थीं, और खुद को ही शोषित भी दिखा देती थी। वो वाकई मॉनस्टर इन लॉ थी जो बिल्कुल सीरियल में दिखाई जाती है। एक भारतीय होने के नाते मुझे पहले ही पता था कि वो थोड़ी पारंपरिक और संकीर्ण मानसिकता होगी लेकिन मुझे लगा कि मैं एडस्जट कर लूंगी।

आखिर मैं राज से प्यार करती थी और उसके साथ अपनी जिंदगी बिताने के लिए कुछ भी कर सकती थी। मैंने सिर्फ हमारे अच्छे भविष्य का सोचा। एक खूबसूरत सा घर जिसे मैं सजाऊंगी, बच्चों को हम खुद पालेंगे और हमेशा खुश रहेंगे। लेकिन मैं गलत थी।

मेरी सास सनकी थी

मेरी शादी के अभी एक महीने ही हुए थे और मेरी सास गीतू* मेरे सारे निर्णय लेती थीं। मुझे लंच क्या करना चाहिए, कहां कपड़े खरीदने चाहिए, कब सोना चाहिए। वो घड़ी की ओर देखते हुए कहती थी बच्चों सोने का समय हो गय। रीता मेरे बेटे को पूरी नींद की जरूरत है उसे जगाकर मत रखो।

उनकी बातें मुझे अंदर तक भेद देती थी और कभी कभी मेरा मन कुछ कहने का करता था लेकिन मैंने हमेशा खुद को रोका। मुझे लोगों को खुश रखना पसंद था और शायद इसलिए वो मुझसे लगातार ऐसा व्यवहार करती रहीं।

एक छोटी सी बात है जैसे मैं खाना रात में खुद बनाना पसंद करती थी क्यों मेरे पति को घर का खाना पसंद था और वो लंच भी बाहर ही करते थे। गीतू किचन में मेरी रेसिप का मजाक उड़ाती थीं और इसे बोरिंग और बकवास कहती थी। एक बार उन्होंने मुझे कहा भी था कि तुम्हारी मां तुम्हे पढ़ाने लिखाने और घर के काम सिखान में काफी व्यस्त रहती होंगी। मुझे इस बात से काफी चिढ़ हो गई थी।

मैंने उनकी कही कई बातों को अनदेखा किया, लेकिन वो लगातार मेरे साथ रूखा व्यवहार करती थी और इस बारे में मैंने राज को भी बताया। उन्होंने इस बात को यूं ही जाने दिया कि उनकी बातों को ज्यादा सीरियसली लेने की जरूरत नहीं है। मैंने भी शुरूआती कुछ महीनो में एडजस्ट किया लेकिन वो लगातार मेरे धैर्य की परीक्षा लेते रही।

मैंने उनसे दूरी बनानी शुरू कर दी

मैंने उनसे दूरी बनानी शुरू कर दी। मैं अपने काम पर जाती थी और जब घर में होती थी तो डिनर के  समय तक कमरे में होती थी। किसी तरह से मनाने के बाद मेरे पति नए फ्लैट में शिफ्ट होने के लिए तैयार हो गए। ये उनके लिए बहुत बड़ी बात थी और जब उनके बेटे ने उन्हें ये बात बताई तो उनका गुस्सा चरम पर पहुंच गया।

वो मुझपर चिल्लाने लगी और बोलने लगी मैं जहरीली सांप हूं जो उनके घर में घुस आई, मैं उन्हें उनके बेटे से अलग कर रही थी। यहां तक कि उन्होंने बटर लगाने वाली चाकू से अपनी कलाई भी काटने की कोशिश की। मैं इतना ड्रामा नहीं बर्दाश्त कर पा रही थी इसलिए मैंने राज को बोला कि मैं अपने कजिन के घर जा रही हूं ताकि स्थिति अच्छी हो जाए। वो बड़े थे और अपनी जिंदगी के निर्णय खुद ले सकते थे।

अगर वो शिफ्ट होना चाहते थे तो उन्हें शिफ्ट हो जाना चाहिए और मेरी सास को भी खुश और सपोर्टिव होना चाहिए था। वो वीकेंड मेरे लिए अच्छा था लेकिन राज के लिए नहीं। उनकी मां ने बड़ी चालाकी से उनके दिमाग में डालने की कोशिश की मैं राज और उसके मां की नजदीकियों से जलती हूं और मैं उनकी जगह लेना चाहती थी। इस सबसे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन उनकी तेज तर्रार व्यवहार के कारण राज को समझा पाने में कामयाब हो गईं।

मुझे बचपन से ही लोगों की इज्जत करना सीखना गया था लेकिन मैं अपनी सास की कोई इज्जत नहीं करती थी। बतौर इंसान वो बुरी नहीं थी लेकिन हो सकता है हमारे विचार इतने अलग अलग थे कि एक समय के बाद मैं काफी तनाव में चली गई।

दो महीने के बाद हम बाहर शिफ्ट (कई मुश्किलों और हंगामें के बाद) हो गए। राज लेकिन खुश नहीं थे और उन्हें खुश नहीं देखकर मैं भी काफी दुखी हो जाती थी। मैं उन्हें एक्साइटेड करने की कोशिश करती थी (मैं तब प्रेग्नेंट थी) और एक नया आशियाना बनाना चाहती थी।  

हमारा पहला बेबी..

ये हमारा पहला घर और पहला बेबी था लेकिन वो काफी उदास था। उसकी मां ने हमसे हमारा स्पेशल क्षण भी छिन लिया जिसके लिए मैं कभी माफ नहीं करूंगी।

मेरी प्रेग्नेंसी के दौरान उन्होंने एक बार भी मुझे कॉल नहीं किया और ना तो मिलने आई। वो अपने शब्दों पर कायम थी कि मैं तुम्हारे घर में कभी कदम नहीं रखूंगी। मुझे राज को देखकर काफी बुरा लगता था कि वो पहले जैसे नहीं रहा, वो अपनी मां के आसपास रहना चाहता था और मुझे लगता था जैसे मैंने उससे ये सब छीन लिया। इसलिए एक बेवकूफ की तरह मैंने उससे कहा कि किसी तरह उन्हे मना ले और वो हमारे साथ रहने आ गईं।

जब रोहन* का जन्म हुआ था तो उन्होंने मेरी मदद नहीं की और मुझे राज और घर आए मेहमानों के सामने नीचा दिखाने की कोशिश की। मेरे पैरेंट्स कुछ साल पहले गुजर गए  थे और मैं अपनी सारी कुंठा अंदर ही रखती थी।

कई कई ऐसे दिन होते थे जब वो रोहन को अपने कमरे में ले जाती थी और मुझे दूध पिलाने या उसके साथ समय बिताने नहीं देती थी क्योंकि उन्हें लगता था कि मैं ज्यादा अच्छा कर सकती हूं।

कई बार मैंने इन बातों को राज के साथ शेयर किया और उन्होंने कहा भी कि वो बात करेगा लेकिन वो नाकाम रहा..इसलिए मैंने किया।मैनें बिल्कुल सीधे सपाट अंदाज में उनसे बात किया (हालांकि समझाना नामुमकिन था)। मैंने उन्हें बताया कि मैं उनके साथ रहकर कैसा महसूस करती हूं और उनकी बुरी आदतों का भी जिक्र किया।

राज मुझसे नाराज हो गए

ये मेरे लिए बहुत बड़ी बात थी और मुझे सच बताऊं तो इस बात का फ्रक था। लेकिन राज मुझसे नाराज हो गए। उन्होंने कहा कि वो हमेशा सपोर्टिव रहे लेकिन परिवार की बात आती है तो वो इसे फॉलो नहीं कर पा रहे थे।

मेरा बेटा दो साल का है और स्थिति बदतर हो गई है। गीतू हर पैरेंटिंग के फैसलों के बीच में आती हैं। राज इतने तनाव में चले गए कि उन्होंने हम दोनों के मामले में हार मान ली।

उसकी मां ने उसके दिमाग में डाल दिया कि मैं बुरी मां हूं। मैं बहुत ज्यादा काम करती हूं । ये अविश्वसनीय है कि वो किस हद तक मुझसे छुटकारा पाने के लिए जा सकती हैं। मुझे तो पता भी नहीं कि उनकी समस्या क्या है। वो कभी चीजों को ठीक करना ही नहीं चाहती हैं।

पिछले महीने राज मेरे सामने रो पड़े कि वो अब ये सब और नहीं बर्दाश्त कर सकता । वो इस शादी को तोड़ना चाहता है। मैंने अपने दोस्तों, परिवार वालों से बात किया कि वो क्या सोचते हैं। वो इतना कायर है कि अपने परिवार के लिए खड़ा नहीं हो सकता तो साथ रहने का भी कोई मतलब नहीं।

आज भी मैं उसी से प्यार करती हूं और उसके लिए लड़ूंगी, हमारे लिए लड़ूंगी, अपने बेटे के लिए लड़ूंगी जो अपने पापा के साथ बड़ा हो रहा है। अब वो और हम अलग अलग रहते हैं और मुझे पता नहीं इसे कैसे सुलझाना है। मैं अपने पति और बच्चों के साथ रहना चाहती हूं।

समय ही बताएगा कि ये कहानी कैसे खत्म होगी। मैं प्रार्थना करती हूं और आशा करती हूं कि मुझे इस परिस्थिति से निकलने की शक्ति मिले। अपने पति को उसकी मां की वजह से खो देना तो मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था। लेकिन यही जिंदगी है।

(कहानी जैसा कि पविन  चोपड़ा को बताया गया)

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Source: theindusparent