सावधान! मां ने अपनाया पुराना नुस्खा, 21 दिन के बच्चे ने गवाई आंख

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हम सभी जानते हैं कि हमारे देश की महिलाएं अपनो बच्चों के लिए कई पुराने तौर तरीनके आजमाती हैं और भारत के हर कोने में ये नुस्खे और टोटके काफी पॉपुलर हैं।

हम सभी जानते हैं कि हमारे देश की महिलाएं अपनो बच्चों के लिए कई पुराने तौर तरीनके आजमाती हैं और भारत के हर कोने में ये नुस्खे और टोटके काफी पॉपुलर हैं।

लेकिन सच्चाई ये भी है कि ये तरीके विज्ञान की नजर में सही हैं इसका कोई प्रूफ नहीं है।  हालांकि हर मां कभी ना कभी कोई तरीके जरुर अपनाती हैं लेकिन किसी ने सोचा नहीं होगा कि ऐसे तरीके किसी के बच्चे के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

हुआ क्या ...

लगभग डिलिवरी के एक सप्ताह बाद सीमा ने गौर किया कि उसके बेटे की दायीं आंख में लाल धब्बा है। बिना किसी संकोच के सीमा ने अपने परिवार वालों से और उम्रदराज महिलाओं को इसके बारे में बताया और कोई देसी नुस्खा खोजने लगी। उसे किसी ने अपने दूध की कुछ बूंदे बेबी की आंख में डालने के लिए कहा जिससे उसकी आंखे ठीक हो जाएंगी।

src=https://hindi admin.theindusparent.com/wp content/uploads/sites/10/2017/02/baby.jpg सावधान! मां ने अपनाया पुराना नुस्खा, 21 दिन के बच्चे ने गवाई आंख

लेकिन असल में इसका ठीक उल्टा हुआ। बेटे की आंख ठीक होना तो दूर आखों में पस आ गया और सूजन बढ़ गया। सीमा शॉक्ड थी कि ऐसा कैसे हो सकता है? उसने भी वही किया जो हर मां करती है फिर उसके साथ ही ऐसा क्यों।

बच्चे की आंख को पहुंची चोट

 
बेटे के आंख को नुकसान तो पहुंचा ही लेकिन समस्या बस इतनी नहीं थी। 24 सितंबर को सीमा के 21 दिन के बेटे का क्रोनिया ट्रांसप्लांट किया गया। डॉक्टर का कहना था कि ब्रेस्ट मिल्क  से इंफेक्शन और भी बढ़ गया और स्थिती काफी विकट हो गई। 

सीमा के भाई नंदू (काल्पनिक नाम) ने कहा, "हमलोगों ने कभी नहीं सोचा था कि ये सालों से चला आ रहा तरीका बेटे के लिए इतना नुकसानदायक साबित होगा। बिना सोचे समझ उठाए एक कदम की  कीमत उसकी आंख को चुकानी पड़ी"

आखों में बकरी का दुध, आक के पौधे का रस, मूत्र डालना काफी पुराना नुस्खा है लेकिन चिकित्सीय रुप से ये गलत है। क्रोनिया स्पेसलिस्ट डॉ कविता  राव का कहना है  जो चीज बिल्कुल बेकार है वो किसी भी तरह से कैसे फायदा पहुंचा सकती है। उन्होंने आगे कहा कि बेबी को सिर्फ एंटीबॉयोटिक ड्रॉप की जरुरत थी जिससे उसका इंफ्केशन खत्म हो जाता। 

इससे भी बुरी खबर है कि क्रोनिया के ट्रांसप्लांट करने के बाद भी बेबी की रोशनी अभी तक वापस नहीं आ सकी है। "क्रोनिया का रंग हो सकता है सफेद पड़ जाए लेकिन हमें उसकी रोशनी लाने के लिए Vision correction corneal transplant ऑपरेशन कुछ महीनो बाद करनी होगी।" 

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Source: theindusparent