सावधान..इसे खाने से बच्चों के दिमाग पर पड़ता है बुरा असर..बच्चे हो सकते हैं सुस्त

मम्मी, प्लीज इसे नोट कर लें!

आप जैसा खाते हैं वैसे ही होते हैं – ये लाइन बच्चों सहित हर किसी पर सटीक बैठती है। जब बात बच्चों के लिए सही न्यूट्रिशन के चुनाव की आती है तो हम माएं इस बात को सुनिश्चित करते हैं कि जो भी खाने की चीजें हों वो उनके लिए बेस्ट हों।

हालांकि कई ऐसी भी खाने की चीजें हैं जिन्हें हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं क्योंकि हमें लगता है कि ये बच्चे कभी कभी खा सकते हैं। लेकिन ये सच नहीं है क्योंकि कुछ ऐसी भी चीजें होती हैं जो ना सिर्फ आपके बच्चों के मस्तिष्क के विकास के लिए नुकसानदायक है बल्कि उन्हें बातें देर से समझ आती हैं।

तो यहां हम विशेषज्ञों की राय के आधार पर खाने की कुछ चीजों की लिस्ट बता रहे हैं जिन्हें बच्चों को किसी भी हाल में ना दें।

1. पैकेज्ड और प्रोसेस्ड फूड

PacKaged foods such as noodles contain high amounts of MSG

पैकेज्ड और प्रोसेस्ड फूड जैसे पैक्ड चिप्स, पैक्ड नमकीन चिप्स, खाने की अन्य चीजें, बर्गर, पिज्जा (मैगी कप नूडल्स, बाकी इंस्टेंट नूडल्स) जिनमें मोनोसोडियम ग्लूटामेट (MSG) मौजूद हो उन्हें नजरअंदाज करें।

MSG का इस्तेमाल खाने के स्वाद बढ़ाने को लिए किया जाता है लेकिन इससे मूड और व्यवहार भी बदलता है। यह सिर में दर्द और अतिसक्रियता को बढ़ाता है। बेहतर होगा कि आप फास्ट फूड और पहले से बने खाने को नजर अंदाज करें।

2. कृत्रिम रंग/मिलावटी खाना

Candies and jellies contain artificial colours and flavours that must be avoided

कई देशों में खाने में कृत्रिम रंगों के इस्तेमाल को बैन कर दिया है क्योंकि इसका बच्चों पर बुरा असर पड़ता है। इससे बच्चों में ADHD, घबराहट, अतिसक्रियता और सिर दर्द की समस्या हो सकती है। कृत्रिम रंगों के प्रयोग से व्यवहार में भी बदलाव आते हैं।

ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कृत्रिम रंग कई मीठी चीजों में पाई जाती है। पैरेंट्स अक्सर चीनी को व्यवहार में बदलाव के लिए जिम्मेदार ठहराते हैं। आपको आश्चर्य हो सकता है लेकिन कृत्रिम रंग अक्सर ब्रेड और दही में भी पाए जाते हैं।

इसलिए कई भारतीय घरों में दही खरीदने की जगह घर में ही बनाने की प्रथा है। अधिक मिलावटी खाने से बच्चों के विकास पर भी असर पड़ता है।

3. गैस से भरा ड्रिंक/सोडा/कोल्ड ड्रिंक/कैफिन युक्त ड्रिंक/चाय/कॉफी

 

कैफीन प्राकृतिक रूप से चॉकलेट, कॉफी, आइज्ड टी में पाया जाता है। इसके अलावा कई कंपनी इसे सोडा, जुकाम की दवाओं में भी डालती है। टोरंटो पब्लिक हेल्थ ऑर्गनाइजेश्न के लेख ‘Nutrition Matters’ के अनुसार कोला के एक केन में 36 से 46 मिलिग्राम तक कैफीन होता है।

बच्चों का शरीर कैफीन के असर के लिए बेहद छोटा है इसलिए बच्चों में तनाव, घबराहट, नींद ना आना, सिर दर्द, पेट में दर्द आदि की समस्या होती है।

4. अधिक चीनी युक्त खाना

Sugar in excess can make your child hyperactive

अधिक चीनी के कारण भी बच्चे अतिसक्रिय हो जाते हैं जिसका असर सिर्फ उनके ग्रेड्स नहीं बल्कि व्यवहार और मूड पर भी पड़ता है।

रिर्सच मे यह बात साबित हो चुकी है कि इसका बुरा प्रभाव बच्चों के दिमाग पर भी पड़ता है। कुछ खाने की चीजों में ग्लूकोज और फ्रूक्टोज अधिक मात्रा में होती है जिसकी वजह से इंसुलिन का स्त्राव होता है।यह बच्चों के दिमाग और मनोदशा को नकारात्मक तरीके से प्रभावित करता है।